जयपुर नगर निगम चुनाव: मेयर किस जाति और राशी का बनेगा
इंडिया प्राइम टीवी जयपुर नगर निगम चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी में महापौर और उप-महापौर की कुर्सी को लेकर घमासान चरम पर है। 21 सितंबर को होने वाले मेयर चुनाव से पहले, दावेदारों की अपनी-अपनी जातियों में ही उठी मांगों ने बड़े-बड़े दिग्गजों की उम्मीदों पर पानी फेरने की तैयारी में है। ऐसे में बीेजेपी आला कमान को सबको साथ लेकर चलने वाले मेयर उपमेयर का नाम तय करने में पसीने छूट रहे है।
मेयर किस जाति और राशी का बनेगा
जयपुर नगर निगम चुनाव नतीजे आने के बाद सबसे ज्यदा वैश्य समाज से मेयर बनाने की सबसे तेज चर्चाओं के बीच, सुनील कोठारी और विमल अग्रवाल जैसे बड़े नाम रेस में आगे दिख रहे थे। अग्रवाल समाज के 8 पार्षदों और जैन व गुप्ता वर्ग के समर्थन से यह खेमा मजबूत तो है, लेकिन पेंच यह है कि वैश्य समाज की दावेदारी ही बाकी जातियों के लिए आक्रामक रुख का कारण बन गई है। इसे लेकर बनिया समाज ने अलग अलग ज्ञापन प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड को दिए है।
दूसरी तरफ, जयपुर के लगभग 30 ब्राह्मण संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि पिछले 30 सालों से शहर को कोई स्थाई ब्राह्मण मेयर नहीं मिला है, इसलिए इस बार किसी वरिष्ठ ब्राह्मण पार्षद को कुर्सी दी जाए। इसके साथ ही राजपूत समाज के 15 पार्षदों (11 भाजपा) और 40 से अधिक ओबीसी पार्षदों (गुर्जर, यादव, जाट, माली) का भारी-भरकम गणित पार्टी के सामने खड़ा है। मूल ओबीसी वर्ग से डिप्टी मेयर बनाने और राजपूत-ब्राह्मण नेताओं की लॉबिंग ने पार्टी आलाकमान को धर्मसंकट में डाल दिया है।
जातीय संतुलन, विधायकों की शर्त और बाड़ेबंदी में बंद पार्षदों की रायशुमारी के बीच यही जातीय खींचतान दिग्गजों का खेल बिगाड़ रही है। जब हर समाज अपनी ही जाति का मेयर या डिप्टी मेयर मांग रहा है, तो किसी एक नाम पर सहमति बनना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। यही वजह है कि खुद को सबसे बड़ा दावेदार मान रहे नेता भी अपनी ही जातिगत घेराबंदी और अंदरूनी खींचतान में उलझकर मेयर पद से दूर होते नजर आ रहे हैं।






