मछलियां खाने से बचें: बाढ़ के दौरान क्यों बिहार सरकार जारी की चेतावनी ?
इंडिया प्राइम टीवी नेशनल डेस्क बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियां खाने से बचें! बिहार मत्स्य विभाग की बड़ी चेतावनी .बिहार में नेपाल से आई विनाशकारी बाढ़ और प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच एक बेहद जरूरी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने राज्य के नागरिकों के लिए एक सख्त स्वास्थ्य चेतावनी (Advisory) जारी की है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ के पानी से पकड़ी गई या बहकर आई मछलियों को खाने, खरीदने और बेचने से पूरी तरह परहेज करें।
क्यों खतरनाक हैं बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियां?
बाढ़ के दौरान पानी का बहाव बेहद तेज होता है, जिससे तालाबों, झीलों और मत्स्य पालन केंद्रों से मछलियां निकलकर खुले पानी में बह जाती हैं। लेकिन यह पानी शुद्ध नहीं होता।
सीवेज और कचरे के संपर्क में आ रही हैं मछलियां
मत्स्य प्रभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ का पानी शहरों और गांवों के गंदे नालों (सीवेज), फैक्ट्रियों के कचरे, और कचरा डंपिंग यार्ड्स से होकर गुजरता है। इस वजह से पानी में भारी मात्रा में प्रदूषण फैल जाता है। नदियाँ और जलभराव वाले क्षेत्र इस समय पूरी तरह दूषित हो चुके हैं।
मरे हुए जानवरों (Carcasses) का सेवन
बाढ़ के तेज बहाव में कई मवेशी और जंगली जानवर बहकर मर जाते हैं। पानी में सड़ रहे इन मृत जानवरों के अवशेषों को बाढ़ के पानी में मौजूद मछलियां खा रही हैं। इसके कारण उनके शरीर में कई तरह के खतरनाक टॉक्सिन्स (जहर) जमा हो रहे हैं।
मछलियों में पाए जाने वाले प्रमुख हानिकारक तत्व:
- बैक्टीरिया और वायरस: ई-कोलाई (E. coli) और साल्मोनेला जैसे जानलेवा जीवाणु।
- फंगस (कवक): मछलियों की त्वचा और गलफड़ों में पनपने वाले फंगल इन्फेक्शन।
- जहरीले रसायन: सीवेज और औद्योगिक कचरे से निकले हैवी मेटल्स (सीसा, पारा आदि)।
नेपाल की बाढ़ और बिहार की नदियों का बढ़ता संकट
नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद वहां आई बाढ़ का पानी अब बिहार की सीमा में प्रवेश कर चुका है। इसके कारण बिहार की मुख्य नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है।
कोसी और गंडक नदी में बहकर आई ‘विदेशी’ मांसाहारी मछलियां
बाढ़ के पानी के साथ उत्तर बिहार के जिलों में कुछ ऐसी अज्ञात और अजीब मछलियां बहकर आई हैं जो आम तौर पर स्थानीय तालाबों में नहीं पाई जातीं। इनमें मुख्य रूप से प्रतिबंधित थाई मांगुर और गोइता जैसी खतरनाक मांसाहारी मछलियां शामिल हैं। ये मछलियां इंसानी सेहत के लिए बेहद हानिकारक मानी जाती हैं।
इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा:
- पश्चिम और पूर्वी चंपारण
- गोपालगंज और सारण
- सुपौल, सहरसा और मधेपुरा
- पूर्णिया और कटिहार
दूषित मछली खाने के लक्षण और बचाव के उपाय
अगर किसी व्यक्ति ने अनजाने में बाढ़ के पानी से पकड़ी गई दूषित मछली का सेवन कर लिया है, तो उसे गंभीर फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण का सामना करना पड़ सकता है।
दूषित मछली खाने के तुरंत बाद दिखने वाले लक्षण
बाढ़ के पानी की संक्रमित मछली खाने के कुछ ही घंटों के भीतर शरीर में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- लगातार उल्टी और पेट में तेज ऐंठन होना।
- गंभीर दस्त (डायरिया) और डिहाइड्रेशन।
- अचानक तेज बुखार और सिरदर्द होना।
- चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना या सांस लेने में तकलीफ।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जरूरी गाइडलाइंस
अगर आप या आपके परिवार में कोई मछली खाने का शौकीन है, तो इस बाढ़ के सीजन में इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- स्थानीय शिकार से बचें: किसी भी जलभराव वाले क्षेत्र, खेत या सड़क के किनारे जमा बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछली बिल्कुल न खरीदें।
- अपरिचित मछलियों को न छुएं: यदि बाजार में कोई बहुत सस्ती या अजीब दिखने वाली मछली बेच रहा है, तो उसे लेने से मना करें।
- तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें: यदि दूषित मछली खाने के बाद ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण दिखें, तो घरेलू उपचार के भरोसे न रहें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या डॉक्टर के पास जाएं।
निष्कर्ष: जब तक नदियों का जलस्तर सामान्य नहीं हो जाता और पानी प्राकृतिक रूप से साफ नहीं हो जाता, तब तक सुरक्षित और प्रमाणित स्रोतों से ही खाद्य सामग्री खरीदें। आपकी सतर्कता ही आपके परिवार को इस गंभीर बीमारी से बचा सकती है।







