राजस्थान निकाय चुनाव: पार्षद ‘गायब’, होटल-रिसॉर्ट में बाड़ाबंदी से सियासी हलचल तेज
इंडिया प्राइम टीवी जयपुर। पार्षद ‘गायब’ राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। खासतौर पर उन नगर परिषदों और निकायों में जहां किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां पार्षदों की बाड़ाबंदी की खबरों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। कई जगहों पर पार्षदों को शहर से बाहर होटल और रिसॉर्ट में ठहराए जाने की जानकारी सामने आ रही है।
21 सितंबर के सभापति चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
निकाय चुनाव के बाद अब सबकी नजर 21 सितंबर को होने वाले सभापति और अध्यक्ष के चुनाव पर है। त्रिशंकु बोर्ड वाले निकायों में एक-एक पार्षद का वोट बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। यही वजह है कि राजनीतिक दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने और दूसरे खेमे की संभावित सेंध से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक राजस्थान के अलग-अलग निकायों में पार्षदों को जयपुर, कुंभलगढ़, उदयपुर, माउंट आबू सहित अन्य स्थानों पर ठहराया गया है। कुछ जगहों पर बीजेपी और कांग्रेस के पार्षदों को अलग-अलग समूहों में रखा गया है।
पार्षद गायब कहां कहां हुए
बांसवाड़ा के पार्षद कुंभलगढ़ में
बांसवाड़ा में किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद बोर्ड गठन को लेकर जोड़-तोड़ तेज है। यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों खेमों के पार्षदों को कुंभलगढ़ के रिसॉर्ट्स में ठहराए जाने की खबर है।
इस पूरी कवायद का मकसद पार्षदों को सुरक्षित रखना और बोर्ड गठन से पहले किसी तरह की राजनीतिक सेंध की संभावना को कम करना बताया जा रहा है।
अलवर में पार्षदों को लेकर पुलिस पहुंची रिसॉर्ट
अलवर में भी बोर्ड गठन को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हैं। कांग्रेस के पार्षदों और प्रत्याशियों को जयपुर में ठहराए जाने की खबरों के बीच पुलिस के रिसॉर्ट पहुंचने से मामला चर्चा में आ गया।
पुलिस को कथित तौर पर एक प्रत्याशी को बंधक बनाए जाने की सूचना मिली थी। हालांकि वहां मौजूद पार्षदों ने पुलिस के सामने कहा कि वे अपनी इच्छा से वहां आए हैं और उनका अपहरण नहीं हुआ है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर निकाय चुनाव के बाद पार्षदों को शहरों से बाहर क्यों रखा जा रहा है।
बारां में प्रत्याशी परिवार सहित संपर्क से बाहर
बारां में वार्ड 16 की बीजेपी प्रत्याशी अंतिमा यादव, उनके पति एडवोकेट संजय यादव और उनके बच्चे के संपर्क से बाहर होने का मामला भी सामने आया था। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
हालांकि इस मामले को सीधे राजनीतिक बाड़ाबंदी या किसी दल की कार्रवाई से जोड़ना अभी उचित नहीं होगा। पुलिस जांच और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
निर्दलीय पार्षदों पर टिकी नजर
राजस्थान के कई निकायों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच बहुमत का अंतर कम है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के बाद अब राजनीतिक दलों की रणनीति सिर्फ अपने पार्षदों को साथ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्दलीय पार्षदों से संपर्क और बोर्ड गठन के लिए समर्थन जुटाने पर भी नजर है।
चुनाव खत्म, अब शुरू हुआ ‘नंबर गेम’
राजस्थान में निकाय चुनाव का मतदान और मतगणना पूरी हो चुकी है, लेकिन बोर्ड गठन से पहले राजनीतिक गतिविधियां अपने चरम पर हैं।
होटल और रिसॉर्ट में ठहराए जा रहे पार्षदों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सवाल यही है कि कौन सा पार्षद किस खेमे के साथ है और 21 सितंबर को सभापति चुनाव में किसके पक्ष में वोट जाएगा?
अब राजस्थान की नगर परिषदों और निकायों में जनता के फैसले के बाद पार्षदों का नंबर गेम बोर्ड की तस्वीर तय करेगा।






