जयपुर मेयर माली बने ,अभी नही तो कभी नही .समाज ने दी बीजेपी को दी चेतावनी !
इंडिया प्राइम टीवी जयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजे आने के बाद अब मेयर और डिप्टी मेयर पद को लेकर लॉबिंग और सियासी उठापटक बेहद तेज हो गई है।
चुनावों में भाजपा और कांग्रेस ने माली समाज के कुल 25 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था, जिनमें से 5 बीजेपी, 3 कांग्रेस और 1 निर्दलीय प्रत्याशी ने शानदार जीत दर्ज की है। इस राजनीतिक सफलता के बाद माली समाज ने अब सीधे जयपुर नगर निगम में मेयर पद पर अपना दावा ठोक दिया है। समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात कर जयपुर में माली समाज को मेयर पद देने की पुरजोर मांग रखी है।
नगर निगम में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर माली-सैनी समाज ने दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजस्थान प्रदेश सैनी-माली महासभा और जयपुर जिला माली-सैनी समाज संस्था के संयुक्त तत्वावधान में समाज ने एकजुट होकर चुनावी रणनीति के तहत लामबंदी शुरू कर दी है।
जयपुर नगर निगम चुनावों की शुरुआत के साथ ही टिकटों की मांग को लेकर घमासान तेज हो गया है। हसनपुरा स्थित मालियों की बगीची में माली-सैनी समाज संस्था की ओर से एक बड़ी महाबैठक आयोजित की गई। इस बैठक में समाज के प्रबुद्धजनों ने हुंकार भरते हुए भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों प्रमुख दलों से जयपुर नगर निगम के वार्डों में 30-30 टिकट देने की पुरजोर मांग उठाई थी।
लेकिन पार्टियों द्वारा पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व न मिलने और टिकटों की अनदेखी किए जाने से समाज में भारी आक्रोश है। इसी नाराजगी के चलते समाज ने सिविल लाइंस और किशनपोल विधानसभा क्षेत्रों के तहत आने वाले निगम वार्डों में मतदान बहिष्कार का बड़ा ऐलान कर दिया है। आपको बता दें कि इन दोनों ही क्षेत्रों में माली-सैनी समाज के लगभग 45,000 मतदाता हैं, जो हार-जीत का समीकरण बदलने का दम रखते हैं।
इस विरोध के बीच निगम के भीतर नए समीकरण भी बनते दिख रहे हैं। जहाँ एक तरफ सामान्य वर्ग यानी वैश्य, ब्राह्मण और राजपूत समाज से मेयर और डिप्टी मेयर बनाने की चर्चाएं चरम पर हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मूल ओबीसी कोर बैंक को साधे रखने के लिए माली और कुमावत समाज में से भी किसी चेहरे को डिप्टी मेयर पद की रेस में शामिल करने के समीकरणों पर विचार किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि समाज के इस कड़े रुख के बाद राजनीतिक दल क्या कदम उठाते हैं।







