Rajasthan police new Sop: थाना में आने वाली शिकायत के निस्तारण की अब नई एसओपी .

Rajasthan police new Sop

इंडिया प्राइम जयपुर क्राइम डेस्क Rajasthan police new Sop. राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने थानों में परिवादियों (शिकायतकर्ताओं) की सुनवाई न होने और शिकायतों को लंबित रखने की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इस नई व्यवस्था के तहत जयपुर सहित पूरे प्रदेश के थानों में अब थानाधिकारी (SHO) किसी भी पीड़ित को परिवाद लेकर टरका नहीं सकेंगे। इस एसओपी का मुख्य उद्देश्य पुलिस महकमे में पारदर्शिता बढ़ाना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और आम जनता को समयबद्ध तरीके से प्रभावी न्याय दिलाना है।

Rajasthan police new Sop (Important Instructions)

शिकायत निवारण अधिकारी (GRO) की नियुक्ति: प्रत्येक जिला एवं रेंज स्तर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Addl. SP) स्तर के एक तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारी को शिकायत निवारण अधिकारी (Grievance Redressal Officer) नियुक्त किया जाएगा, जो सीधे तौर पर इन शिकायतों के निस्तारण के लिए जिम्मेदार होगा।
डिजिटल और नियमित निगरानी: जीआरओ (GRO) द्वारा राजकॉप सिटीजन मोबाइल ऐप (RajCop Citizen App) और सीसीटीएनएस (CCTNS) पोर्टल पर थानों में लंबित चल रहे सभी परिवादों की नियमित रूप से डिजिटल ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग की जाएगी।

मासिक समीक्षा और त्रैमासिक विश्लेषण: जिला और रेंज स्तर पर हर महीने लंबित परिवादों की समीक्षा के लिए विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही, प्रत्येक 3 महीने में शिकायतों के निस्तारण में देरी होने के मूल कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा, ताकि पुलिसिंग व्यवस्था में आवश्यक सुधार के सुझाव मुख्यालय को भेजे जा सकें।

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 SOP के अभाव में पहले आने वाली समस्याएं (Earlier Problems)

 थानों से पीड़ितों को टरकाना: पहले थानों में कोई स्पष्ट जवाबदेही न होने के कारण एसएचओ (SHO) या जांच अधिकारी गंभीर शिकायतों पर भी समय पर मुकदमा दर्ज नहीं करते थे और पीड़ितों को बार-बार चक्कर कटवाकर टरका देते थे।
समयसीमा का अभाव और पेंडेंसी: किसी परिवाद (Complaint) के निस्तारण के लिए पहले कोई सख्त समयसीमा तय नहीं थी, जिसके कारण थानों में महीनों तक शिकायतें बिना किसी ठोस कार्रवाई के धूल फांकती रहती थीं।
निगरानी तंत्र और जवाबदेही की कमी: उच्च अधिकारियों के पास थानों में आने वाली हर छोटी-बड़ी शिकायत का लाइव डेटा या ट्रैकिंग सिस्टम नहीं था, जिससे नीचे के स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और पक्षपात की शिकायतें आम थीं और दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती थी।

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