कर्नाटक कांग्रेस सरकार मंत्रीमड़ल विस्तार: दो विधायकों का इस्तीफे

कर्नाटक कांग्रेस सरकार मंत्रीमड़ल विस्तार:

05.00 PM IST August 3,2026  इंडिया प्राइम पॉलिटिकल डेस्क दिल्ली । कर्नाटक कांग्रेस सरकार मंत्रीमड़ल विस्तार । मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार में सोमवार (3 अगस्त 2026) को पहला बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार पूरा हो गया है, जिसमें 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। बेंगलुरु के राजभवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा (Gayathri Shantegouda) का नाम ऐन वक्त पर अंतिम सूची से हटाया

एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा (Gayathri Shantegouda) का नाम ऐन वक्त पर अंतिम सूची से हटा दिए जाने के कारण वे सोमवार (3 अगस्त 2026) को आयोजित कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुईं। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार  के नेतृत्व वाले इस पहले बड़े फेरबदल में पहले 20 मंत्रियों को शामिल करने की घोषणा हुई थी, जिसमें गायत्री शांतेगौड़ा एकमात्र महिला चेहरा होने वाली थीं। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान की अंतिम सूची में आखिरी मिनट में हुए बड़े बदलावों के चलते केवल 19 विधायकों को ही मंत्रिपरिषद की शपथ दिलाई गई

अंतिम समय में नाम हटने का कारण और सिद्दारमैया की नाराजगी

  • सत्रहवें स्थान से नाम गायब: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा सुबह जारी प्रारंभिक सूची में गायत्री का नाम शामिल था लेकिन शाम 4:05 बजे होने वाले शपथ ग्रहण में देरी India Today के बीच अचानक उनका नाम ड्राप कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने स्वयं गायत्री को फोन कर शपथ ग्रहण में न जाने India Today और बेंगलुरु राजभवन से दूरी बनाए रखने के लिए कहा था 
  • नेताओं की खुली बगावत और तीखे आरोप: गायत्री का पत्ता कटने से नाराज होकर वरिष्ठ नेता सिद्दारमैया खुद इस हाई-प्रोफाइल शपथ ग्रहण समारोह News18 में शामिल नहीं हुए। कुरुबा समुदाय से आने वाली गायत्री शांतेगौड़ा को कैबिनेट से बाहर किए जाने को लेकर कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ खेमों में भारी असंतोष फैल गया है, जहां पार्टी नेताओं ने डी.के. शिवकुमार पर “केवल पसंदीदा गुट और पूर्व मुख्यमंत्रियों के बच्चों को तरजीह” देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

गायत्री शांतेगौड़ा को मंत्री बनाए जाने की क्या थी वजह?

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मिली थी जीत: गायत्री शांतेगौड़ा को कैबिनेट में शामिल किया जाना एक बड़ा ‘वाइल्ड कार्ड’ सरप्राइज था South First। दरअसल, इसी साल 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने चिकमगलूर स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र South First से भाजपा के विधान परिषद सदस्य (MLC) एम.के. प्राणेश की जीत को रद्द कर दिया था South First, जिसके बाद शीर्ष अदालत के आदेश पर ही कांग्रेस की गायत्री को आधिकारिक विजेता घोषित किया गया South First।
  • शून्य महिला प्रतिनिधित्व पर छिड़ा विवाद: पहले चरण के मंत्रिमंडल गठन में शिवकुमार सरकार में एक भी महिला शामिल नहीं थी NewsDrum। 34 सदस्यीय पूरी कैबिनेट की घोषणा के वक्त गायत्री को एकमात्र महिला मंत्री News18 बनाने की तैयारी थी, लेकिन आखिरी वक्त पर उनका नाम कटने से अब पूरी कर्नाटक कैबिनेट बिना किसी महिला मंत्री के NewsDrum काम करेगी, जिससे सरकार में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और जेंडर बैलेंस पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिवकुमार सरकार की कुल कैबिनेट क्षमता 14 से बढ़कर 33 सदस्यों की हो गई

इस विस्तार के बाद शिवकुमार सरकार की कुल कैबिनेट क्षमता 14 से बढ़कर 33 सदस्यों की हो गई है। नई मंत्रिपरिषद में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने के लिए 11 नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि 10 अनुभवी विधायकों को भी शामिल किया गया है।

नए मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों के अनुभव, सार्वजनिक कार्य और उनकी प्रमुख उपलब्धियां

शिवराज तंगदागी सांस्कृतिक व सामाजिक कार्य: अनुभवी नेता शिवराज तंगदागी  इससे पहले सिद्दारमैया सरकार में कन्नड़ और संस्कृति विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने राज्य की लोक कलाओं के संरक्षण और ग्रामीण कलाकारों को सरकारी मदद पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

लक्ष्मण सवादी प्रशासनिक अनुभव: पूर्व उपमुख्यमंत्री और कद्दावर नेता [लक्ष्मण सवादी]( का प्रशासनिक अनुभव काफी बड़ा है। वे उत्तरी कर्नाटक क्षेत्र में कृषि संकट को दूर करने, सिंचाई परियोजनाओं को समय पर लागू करने और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए जाने जाते हैं।

मशहूर और युवा चेहरे बी.जेड. जमीर अहमद खान और रिजवान अरषद बेंगलुरु क्षेत्र के अल्पसंख्यक चेहरों के रूप में जमीर अहमद खान और रिजवान अरषद को शामिल किया गया है। जमीर अहमद पूर्व में आवास और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रह चुके हैं, जिन्होंने गरीबों के लिए किफायती आवास योजनाओं का सफल क्रियान्वयन किया था। वहीं रिजवान अरषद ने शहरी विकास, युवाओं के रोजगार और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए लगातार आवाज उठाई है।

मधु बंगारप्पा पूर्व मुख्यमंत्री बंगारप्पा के बेटे मधु बंगारप्पा अपने क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को सुधारने और पिछड़े वर्गों के कल्याण कार्यों में सक्रिय रहे हैं। वहीं एसएस मल्लिकार्जुन दावणगेरे क्षेत्र के वरिष्ठ नेता हैं, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर बागवानी और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने में अहम योगदान दिया है।

डॉ. अजय सिंह वरिष्ठता और साख  पूर्व मुख्यमंत्री धरम सिंह के बेटे डॉ. अजय सिंह कल्याणा-कर्नाटक (पिछड़े क्षेत्र) के विकास के लिए गठित बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उत्कृष्ट कार्य कर चुके हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर गांवों तक पहुंचाने के लिए कई सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियां बनाने में योगदान दिया है।

कर्नाटक कांग्रेस सरकार मंत्रीमड़ल विस्तार कलह

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर यह राजनीतिक कलह और दो विधायकों का इस्तीफा आज ही यानी 3 अगस्त 2026 (सोमवार) को हुआ है। यह घटना राज्य में होने वाले कैबिनेट विस्तार से ठीक मिनच पहले यानी शाम 4 बजे से पहले हुई, जिसने सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष को सतह पर ला दिया है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाले 34 सदस्यीय मंत्रिमंडल में बचे हुए 20 खाली पदों को भरने के लिए सोमवार शाम को ही राजभवन (ग्लास हाउस) में शपथ ग्रहण समारोह होना तय किया गया था। इस विस्तार से ठीक पहले पार्टी आलाकमान द्वारा मंत्रियों की जो अंतिम सूची जारी की गई, उसमें जगह न मिलने से नाराज वरिष्ठ विधायकों में बगावत के सुर तेज हो गए।

 कैबिनेट में जगह न मिलने पर बगावत और इस्तीफे (The Conflict and Resignations)

दो वरिष्ठ विधायकों का इस्तीफा: कैबिनेट सूची में नाम न होने से नाराज होकर इंडी विधानसभा सीट से वरिष्ठ कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल और सागर सीट से विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने सोमवार को पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी.

नेताओं के बच्चों को प्राथमिकता’ इस्तीफा देते हुए सागर के विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला और कहा कि “कांग्रेस में अब सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्रियों के बच्चों को ही प्राथमिकता और महत्व दिया जा रहा है”। वहीं यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने आरोप लगाया कि पार्टी आलाकमान उन्हें मंत्री बनाने का अपना पुराना वादा निभाने में पूरी तरह विफल रहा है।

इन दो इस्तीफों के अलावा मैसूर क्षेत्र के बेहद वरिष्ठ कांग्रेस नेता और छह बार के विधायक तनवीर सैत ने भी कैबिनेट में शामिल न किए जाने पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंदरूनी राजनीति और स्थानीय समीकरणों के चलते वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी कर मैसूर क्षेत्र के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम किया गया है, जिसके विरोध में उनके समर्थकों ने मैसूर में सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है।

 

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