अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट: रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने पहले पूर्णकालिक CEO
इंडिया प्राइम टीवी नेशनल डेस्क श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर प्रबंधन, प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है।
5,000 से अधिक आवेदनों के बाद हुआ चयन
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर प्रबंधन, प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया गया है। देशभर से आए 5,000 से अधिक आवेदनों के बाद उच्चस्तरीय चयन समिति ने उनके नाम को अंतिम मंजूरी दी।
ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी भी शामिल
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों को भी शामिल किया गया है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। ट्रस्ट के नए प्रशासनिक ढांचे को मंदिर के बढ़ते कामकाज और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी रहे हैं। उनका मूल संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से है। वे भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। सैन्य सेवा के दौरान उन्हें रणनीतिक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का अनुभव रहा है।
कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर का अनुभव
जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर में 1999 के कारगिल युद्ध से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण कमान संभाली थी। देश के प्रति उनकी सेवाओं के लिए उन्हें उत्तम युद्ध सेवा मेडल यानी UYSM से सम्मानित किया जा चुका है।
30 अप्रैल 2026 को हुए थे सेवानिवृत्त
जितेंद्र मिश्रा इसी वर्ष 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। सैन्य सेवा से रिटायर होने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में इतनी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलना भी चर्चा का विषय है।
पहली बार बनाया गया पूर्णकालिक CEO का पद
राम मंदिर ट्रस्ट में पहली बार पूर्णकालिक CEO का पद बनाया गया है। इस पद का उद्देश्य मंदिर के प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कामकाज को अधिक व्यवस्थित करना तथा विभिन्न व्यवस्थाओं में स्पष्ट जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करना है। नए CEO के नेतृत्व में मंदिर के दैनिक संचालन, विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों की निगरानी को मजबूत करने पर जोर रहेगा।
चंदा और चढ़ावे के विवाद के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव
राम मंदिर में मिलने वाले चंदे और चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले के बाद ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे थे। मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया और कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आईं। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत पर विशेष जोर दिया गया।
नए CEO के सामने बड़ी जिम्मेदारियां
जितेंद्र मिश्रा के सामने मंदिर के प्रशासनिक संचालन को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। मंदिर के दैनिक कामकाज, विस्तार और विकास से जुड़े कार्यों की निगरानी के साथ-साथ अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।
लाखों श्रद्धालुओं की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती
अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था और VIP मूवमेंट को व्यवस्थित करना नए CEO के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होगी। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
स्टाफ और अधिकारियों में जवाबदेही पर जोर
ट्रस्ट के अलग-अलग विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना भी नए प्रशासनिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही को रोकने के लिए निगरानी और जवाबदेही की प्रक्रिया मजबूत किए जाने पर जोर रहेगा।
नकद चंदे के बजाय डिजिटल भुगतान को बढ़ावा
चंदे और चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। UPI, नेट बैंकिंग और सीधे बैंक ट्रांसफर जैसे माध्यमों को बढ़ावा देकर नकद लेनदेन को कम करने की कोशिश की जा रही है।
दान और खर्च की जानकारी सार्वजनिक करने पर जोर
श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत करने के लिए मंदिर को मिलने वाले दान और उसके उपयोग से जुड़ी जानकारी को अधिक पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दान देने वाले श्रद्धालुओं को धन के उपयोग और प्रबंधन से संबंधित पर्याप्त जानकारी मिल सके।
CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड से होगी निगरानी
मंदिर के दान पात्रों और नकद राशि की गिनती से जुड़ी प्रक्रिया में CCTV निगरानी और डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ स्वतंत्र ऑडिट और थर्ड-पार्टी जांच जैसी व्यवस्थाओं के जरिए वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
सुरक्षा और प्रशासन को लेकर नया सिस्टम
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को केवल CEO की नियुक्ति के तौर पर नहीं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सैन्य सेवा में लंबे अनुभव वाले अधिकारी के आने से सुरक्षा, अनुशासन, प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही को अधिक व्यवस्थित करने की उम्मीद है।
अब निगाह नए CEO की कार्यप्रणाली पर
राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या, मंदिर परिसर के विकास कार्य और वित्तीय व्यवस्था की पारदर्शिता को देखते हुए जितेंद्र मिश्रा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके नेतृत्व में राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली और दान प्रबंधन में कितना बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।







