निकाय चुनाव 2026: जयपुर से कोटा तक BJP का मुस्लिम दांव, क्या बदल रही है चुनावी रणनीति?
इंडिया प्राइम टीवी जयपुर: निकाय चुनाव 2026 .राजस्थान के आगामी नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देकर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। खास बात यह है कि इनमें वार्ड 19 की सामान्य सीट से शाहनवाज अंसारी भी शामिल हैं।
जयपुर से कोटा तक BJP का मुस्लिम दांव
यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राजस्थान के 2023 विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था। ऐसे में नगर निगम चुनाव में आठ मुस्लिम चेहरों को मैदान में उतारना पार्टी की स्थानीय चुनावी रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
जयपुर में किन मुस्लिम उम्मीदवारों पर BJP ने लगाया दांव?
बीजेपी ने जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए वार्ड 19 से शाहनवाज अंसारी, वार्ड 109 से जाकिर खान कायमखानी, वार्ड 113 से फरीदुद्दीन ‘जैकी’, वार्ड 117 से शब्बो जहां, वार्ड 128 से माजिद पठान, वार्ड 136 से मिजाना मिर्जा, वार्ड 137 से रईस मंसूरी और वार्ड 146 से अफसाना को टिकट दिया है।
इनमें शब्बो जहां पहले भी 2020 के जयपुर नगर निकाय चुनाव में बीजेपी की मुस्लिम उम्मीदवार रह चुकी हैं। इस बार पार्टी ने उन्हें दोबारा वार्ड 117 से मौका दिया है।
सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड 19 की
बीजेपी का वार्ड 19 से शाहनवाज अंसारी को टिकट देना खास तौर पर चर्चा में है। यह सामान्य सीट है, इसलिए यहां मुस्लिम उम्मीदवार को उतारना आरक्षण की वजह से नहीं बल्कि पार्टी के चुनावी फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषण में इसे स्थानीय सामाजिक समीकरण और उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ से जोड़कर देखा जा रहा है। खुद बीजेपी की ओर से कहा गया है कि उम्मीदवारों का चयन करते समय इलाके के मतदाताओं की संरचना और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखा गया।

क्या कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश?
जयपुर के मुस्लिम बहुल और कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में बीजेपी का यह प्रयोग चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना सकता है। पार्टी के सामने चुनौती सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि ऐसे इलाकों में अपना संगठनात्मक और राजनीतिक आधार मजबूत करने की भी है।
यही वजह है कि इस रणनीति को ‘वोट बैंक में सेंध’ के संभावित प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि बीजेपी के मुस्लिम उम्मीदवार वास्तव में कांग्रेस के कितने वोट काट पाएंगे। अंतिम तस्वीर चुनाव परिणाम के बाद ही साफ होगी।
BJP के लिए ‘मुस्लिम आउटरीच’ या सिर्फ स्थानीय चुनावी गणित?
बीजेपी की ओर से इसे विकास और स्थानीय मुद्दों के आधार पर समर्थन हासिल करने की रणनीति के रूप में पेश किया जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे पार्टी की छवि सुधारने और चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश बता सकता है।
इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को सीधे तौर पर बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति में स्थायी नीति परिवर्तन कहना अभी उचित नहीं होगा। फिलहाल यह राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में स्थानीय स्तर पर किया गया एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रयोग है।
कोटा में भी BJP का मुस्लिम दांव
जयपुर के बाद कोटा में भी बीजेपी ने मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक कोटा में बीजेपी ने अपने 100 उम्मीदवारों में 5 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी कुछ शहरी निकायों में मुस्लिम समुदाय के स्थानीय प्रभावशाली चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति आजमा रही है।
अब असली परीक्षा चुनाव परिणाम की
जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड हैं। मौजूदा चुनाव कार्यक्रम के अनुसार मतदान 9 और 11 सितंबर को तथा मतगणना 14 सितंबर को निर्धारित है।
इस चुनाव में बीजेपी के आठ मुस्लिम उम्मीदवारों का प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इससे पता चलेगा कि पार्टी की यह रणनीति सिर्फ टिकट वितरण तक सीमित रहती है या वास्तव में मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक समर्थन में बदलती है।
क्या बीजेपी का यह कदम मुस्लिम वोटरों तक नई राजनीतिक पहुंच बनाने की
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