जयपुर दूदू स्कूल में अंतिम संस्कार ,जमीन के दावे पर विवाद
इंडिया प्राइम टीवी जयपुर डेस्क। जयपुर दूदू स्कूल में अंतिम संस्कार , राजस्थान के दूदू कस्बे में स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल परिसर में 20 वर्षीय युवक के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को सड़क हादसे में युवक की मौत के बाद बड़ी संख्या में लोग शव और अंतिम संस्कार की सामग्री लेकर स्कूल परिसर पहुंचे। आरोप है कि स्कूल बंद होने के कारण पीछे के गेट का ताला तोड़कर परिसर में प्रवेश किया गया और टीन शेड के पास अंतिम संस्कार कर दिया गया।
घटना के बाद स्कूल प्रशासन, स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी है। स्कूल की प्रधानाचार्य सरिता मीणा की शिकायत पर दूदू पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जयपुर दूदू स्कूल में अंतिम संस्कार , क्यों
दूदू के माल की ढाणी निवासी 20 वर्षीय बाबू बागरिया की रविवार को एक ट्रैक्टर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके बाद बागरिया समाज के बड़ी संख्या में लोग शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर दूदू के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल परिसर पहुंचे।
पुलिस और स्कूल प्रशासन के अनुसार, रविवार को स्कूल में अवकाश था। आरोप है कि पीछे के गेट का ताला तोड़कर लोग परिसर में दाखिल हुए और टीन शेड के पास अंतिम संस्कार कर दिया।
स्कूल में करीब 750 बच्चे पढ़ते हैं
जिस स्थान पर अंतिम संस्कार किए जाने की बात सामने आई है, वहां स्कूल के करीब 750 बच्चे पढ़ते और खेलते हैं। घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।
स्कूल प्रशासन का कहना है कि परिसर में इस तरह प्रवेश करना और अंतिम संस्कार करना गंभीर मामला है। वहीं स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर जमीन के इस्तेमाल और पुराने दावों का विवाद भी सामने आया है।
बागरिया समाज का क्या दावा है?
बागरिया समाज के लोगों का दावा है कि स्कूल की चारदीवारी बनने से पहले यह जगह उनके समाज की पारंपरिक श्मशान भूमि रही है। समाज के अनुसार, स्कूल परिसर के भीतर उनके पूर्वजों की करीब 5 से 7 पुरानी छतरियां भी मौजूद हैं।
समाज के लोगों का यह भी दावा है कि वर्ष 2017 में मृतक युवक के दादा-दादी का अंतिम संस्कार भी इसी स्थान पर किया गया था। इसी वजह से परिवार और समाज के लोग युवक का अंतिम संस्कार पूर्वजों की जगह पर ही करना चाहते थे।
हालांकि, बागरिया समाज के पार्षद कालूराम बागरिया ने भी माना है कि स्कूल परिसर में जबरन प्रवेश कर अंतिम संस्कार करना गलत था। उन्होंने इसे समाज की गलती बताते हुए भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होने की बात कही है।
स्कूल प्रशासन का दावा—2008 में जमीन आवंटित हुई
दूसरी ओर, स्कूल प्रशासन का कहना है कि यह जमीन वर्ष 2008 में स्कूल के नाम आवंटित हो चुकी है। प्रशासन के अनुसार पिछले कई वर्षों से इस स्थान पर कोई अंतिम संस्कार नहीं हुआ था।
स्थानीय पार्षदों की ओर से इसे स्कूल की जमीन पर अतिक्रमण के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है। इस मुद्दे को नगर पालिका की बोर्ड बैठक में उठाए जाने की बात कही गई है।
जमीन के पुराने रिकॉर्ड की जांच
मामले में अब प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। दूदू एसडीएम गुलाब सिंह वर्मा के निर्देश पर तहसीलदार स्तर की टीम गठित की गई है। टीम जमीन के पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि जिस जमीन को बागरिया समाज पारंपरिक श्मशान भूमि बता रहा है, उसका राजस्व रिकॉर्ड क्या है और वर्ष 2008 में स्कूल को जमीन आवंटित किए जाने की कानूनी स्थिति क्या थी।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
दूदू थानाधिकारी संजय शर्मा के अनुसार, स्कूल प्रधानाचार्य की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
पुलिस वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिन पर स्कूल का ताला तोड़कर परिसर में प्रवेश करने का आरोप है।
अब जांच से साफ होगी जमीन की स्थिति
दूदू की इस घटना में फिलहाल दो दावे आमने-सामने हैं। बागरिया समाज इसे अपने पूर्वजों की पारंपरिक श्मशान भूमि बता रहा है, जबकि स्कूल प्रशासन का कहना है कि जमीन वर्ष 2008 में स्कूल के नाम आवंटित हो चुकी है।
अब प्रशासनिक जांच और पुराने राजस्व रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जमीन की वास्तविक कानूनी स्थिति क्या है। फिलहाल पुलिस स्कूल परिसर में कथित तौर पर जबरन प्रवेश और ताला तोड़ने के मामले की जांच कर रही है।







