कारगिल विजय दिवस : वीरों को नमन, सैनिकों के सम्मान पर CM भजनलाल का बड़ा संदेश

इंडिया प्राइम जयपुर कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित शौर्य संध्या कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह भारत के स्वाभिमान, साहस और अटूट राष्ट्रीय संकल्प की ऐतिहासिक विजय थी। उन्होंने कहा कि देश के जांबाज सैनिकों ने कठिनतम परिस्थितियों में भी अद्भुत वीरता का परिचय देकर दुनिया को भारतीय सेना की ताकत दिखाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय जवानों ने 15 से 18 हजार फीट की ऊंचाई, अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और दुर्गम पहाड़ियों जैसी कठिन चुनौतियों के बीच करीब 85 दिनों तक संघर्ष किया। टाइगर हिल, टोलोलिंग, बटालिक और द्रास जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर तिरंगा दोबारा फहराकर सेना ने असंभव लगने वाले लक्ष्य को भी हासिल कर दिखाया।

उन्होंने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि इस युद्ध में 527 भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि 1300 से अधिक जवान घायल हुए। राजस्थान के 58 वीर सपूतों ने भी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। मुख्यमंत्री ने कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया, स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा और कैप्टन अमित भारद्वाज सहित सभी शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा नीति अधिक मजबूत, स्पष्ट और आत्मविश्वास से भरपूर हुई है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत तेजस लड़ाकू विमान, ब्रह्मोस मिसाइल और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरणों में स्वदेशी तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का तेजी से विकास किया जा रहा है, जिससे सेना की क्षमता और अधिक मजबूत हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का भारत आतंकवाद और दुश्मन की साजिशों का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि देश ने बीते वर्षों में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से अपनी निर्णायक सैन्य क्षमता का परिचय दिया है। भारत अब अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ निर्णय लेने वाला राष्ट्र बन चुका है।
सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीद परिवारों के लिए सैनिक कल्याण विभाग को और अधिक सशक्त बनाया गया है। राज्य सरकार ने युद्ध में बलिदान देने वाले सैनिकों के आश्रितों और शौर्य पदक विजेताओं को 25-25 बीघा भूमि आवंटित की है। इसके अलावा बलिदानी सैनिकों के 154 आश्रितों को सरकारी नौकरी प्रदान की गई, जबकि अन्य वीर सैनिकों के 47 आश्रितों को भी राजकीय सेवा में नियुक्ति मिली है।
उन्होंने बताया कि पूर्व सैनिकों की पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर 418 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 1,228 मामलों का निस्तारण हुआ। रेक्सको के माध्यम से पूर्व सैनिकों को दोबारा रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है और विभिन्न विभागों में कार्यरत भूतपूर्व सैनिकों के मानदेय में वर्ष 2024 और 2025 में 10-10 प्रतिशत की वृद्धि भी की गई है। साथ ही ब्यावर, खैरथल-तिजारा और फलोदी में नए जिला सैनिक कल्याण कार्यालय खोले गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को सेना के शौर्य और बलिदान से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से भारतीय सेना की वॉर ट्रॉफियों को प्रमुख स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्थापित किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित हो सके। उन्होंने नागरिकों से सैनिकों, वीर नारियों और शहीद परिवारों का सम्मान करने तथा देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कारगिल युद्ध के शहीदों के परिजनों, वीर नारियों, सेवारत सैन्य अधिकारियों और पूर्व सैनिकों का सम्मान किया तथा रेक्सको के माध्यम से पूर्व सैनिकों को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए। समारोह में सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।






