सहकारिता विभाग का ग्रीन मिशन: जियो-टैगिंग के साथ हर पौधे की होगी निगरानी-डॉ. समित शर्मा
IndiaPrime Environment Desk | जयपुर | 4 जुलाई 2026 राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में सहकारिता विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। सहकार सप्ताह के अंतर्गत राज्यभर की सहकारी संस्थाओं में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें केवल पौधे लगाने पर ही नहीं बल्कि उनकी दीर्घकालिक सुरक्षा और संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया।
शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश की प्रत्येक सहकारी संस्था ने अपने परिसर अथवा सार्वजनिक स्थानों पर कम से कम पांच पौधे लगाए हैं। इन सभी पौधों की जियो-टैगिंग कराई जा रही है, जबकि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सौंपी गई है, ताकि अभियान केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए।
राज्य स्तरीय वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने चित्तौड़गढ़ स्थित प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक परिसर में पौधारोपण कर की। वहीं जयपुर के झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राइसेम परिसर में भी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में पौधे लगाए।
डॉ. समित शर्मा ने अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे ग्रीन को-ऑपरेटिव इनिशिएटिव को जनआंदोलन का स्वरूप दें तथा प्रत्येक लगाए गए पौधे की जिम्मेदारी व्यक्तिगत स्तर पर लेकर पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करना प्रशासनिक दायित्व के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी है।
उन्होंने कहा कि विभाग पर्यावरण संरक्षण को सहकारिता आंदोलन से जोड़ते हुए किसानों को सौर ऊर्जा, जैविक एवं नैनो उर्वरकों के उपयोग, ड्रिप सिंचाई (बूंद-बूंद सिंचाई) तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। उनका मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की उत्पादन लागत कम करने और आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
अभियान में विभाग तथा राइसेम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विभाग का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को केवल वित्तीय एवं कृषि सेवाओं तक सीमित न रखकर उन्हें पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के साझेदार के रूप में विकसित करना है।
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इस अभियान की सबसे उल्लेखनीय विशेषता जियो-टैगिंग आधारित निगरानी है। सरकारी वृक्षारोपण अभियानों की सफलता अक्सर पौधों के जीवित रहने की दर पर निर्भर करती है। यदि सहकारिता विभाग नियमित निगरानी और जवाबदेही की इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करता है, तो यह मॉडल अन्य विभागों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। साथ ही, सहकारी संस्थाओं के माध्यम से हरित ऊर्जा, जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की रणनीति पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास—दोनों लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है।
