चलती रेल का इंजन डिब्बे छोड़कर आगे निकला, यात्रियों में मचा हड़कंप ? कहां हुआ हादसा जाने इंडियाप्राइमटीवी
इंडिया प्राइम टीवी सीटी डेस्क चलती रेल का इंजन डिब्बे छोड़कर आगे निकला हरियाणा के रेवाड़ी-हिसार रेल मार्ग पर मंगलवार दोपहर, 30 जून 2026 को एक बड़ा रेल हादसा होने से बाल-बाल बच गया [dutton-invest]। ट्रेन संख्या 14030 (रेवाड़ी-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस) अपने निर्धारित समय से देरी से दोपहर 3:14 बजे रेवाड़ी स्टेशन से रवाना हुई थी [dutton-invest]। सफर शुरू होने के कुछ ही समय बाद, गोकलगढ़ रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेन का इंजन अचानक डिब्बों से अलग हो गया [dutton-invest]।
यह हादसा चलती ट्रेन का कपलिंग हुक अचानक टूटने (ट्रेन पार्टिंग) के कारण हुआ [dutton-invest]। हुक टूटते ही एयर प्रेशर पाइपलाइन कट गई, जिससे ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेक लग गए और यात्रियों से भरे डिब्बे पटरी पर सुरक्षित रुक गए [dutton-invest]। लोको पायलट ने तुरंत इंजन रोका और सावधानी से उसे रिवर्स लाकर वापस डिब्बों से जोड़ दिया। पूरी तकनीकी जांच के बाद सभी 150 यात्रियों को सुरक्षित लेकर ट्रेन आगे के लिए रवाना हो गई [dutton-invest]।
परिचालन और डाउनस्ट्रीम प्रभाव
चलती ट्रेन से इंजन अलग होने की इस घटना के कारण रेवाड़ी-हिसार रेल मार्ग पर कुछ समय के लिए ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ [dutton-invest]:
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: सुरक्षा नियमों के तहत ट्रेन के गार्ड ने तुरंत डिब्बों के पहियों के नीचे हैंडब्रेक लगाए और लकड़ी के गुटके (Wooden Wedges) लगाए ताकि ढलान होने पर भी डिब्बे पीछे न लुढ़कें।
- ट्रैक क्लीयरेंस: कपलिंग को दोबारा जोड़ने, सुरक्षा संरेखण (Alignment) की जांच करने और एयर प्रेशर टेस्ट करने के दौरान इस रेल लाइन पर यातायात कुछ देर बाधित रहा।
- जांच के आदेश: हालांकि तकनीकी काम पूरा होने के बाद मार्ग पर ट्रेनों का संचालन सामान्य रूप से बहाल कर दिया गया है, लेकिन उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) और बीकानेर मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने कपलिंग हुक टूटने की इस गंभीर लापरवाही की जांच के आदेश दे दिए हैं [dutton-invest]।
जानिए क्या है नियम कौन है जिम्मेदार
रेलवे नियम और जिम्मेदारी (Accountability)
भारतीय रेलवे के जनरल एंड सब्सिडियरी रूल्स (G&SR) के अनुसार, ‘ट्रेन पार्टिंग’ को एक बेहद गंभीर और परिणामी हादसा माना जाता है। इसमें जवाबदेही तय करने के लिए सख्त नियम हैं:
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│ ट्रेन पार्टिंग जवाबदेही │
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│ कैरिज एंड वैगन │ │ लोको पायलट / │ │ मेंटेनेंस │
│ (C&W) विभाग │ │ लोको स्टाफ │ │ वर्कशॉप │
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│• खराब निरीक्षण │ │• अचानक झटका देना│ │• घटिया क्वालिटी │
│• दरारें न देखना │ │• थ्रॉटल का गलत │ │ के कपलिंग पार्ट्स│
│• फिटनेस विफलता │ │ इस्तेमाल │ │• ओवरहॉलिंग खामी │
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- कैरिज एंड वैगन (C&W) विभाग: ट्रेन की बोगियों और कपलिंग की फिटनेस के लिए यह विभाग प्राथमिक रूप से जिम्मेदार होता है। स्टेशन से ट्रेन छूटने से पहले ट्रेन एग्जामिनर (TXR) को कपलिंग की बारीकी से जांच करनी होती है। यदि जांच में यह सामने आता है कि हुक में पहले से ही कोई दरार (Metal Fatigue) थी जिसे मेंटेनेंस के समय नजरअंदाज किया गया, तो सीधे सीएंडडब्ल्यू स्टाफ को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
- लोको पायलट (ट्रेन चालक): यदि लोकोमोटिव के डेटा लॉग से यह पता चलता है कि लोको पायलट ने ट्रेन शुरू करते या बढ़ाते समय अचानक से बहुत तेज थ्रॉटल दिया (जिससे ट्रेन को भारी झटका लगा), तो कपलिंग पर अचानक आए इस अत्यधिक खिंचाव के लिए लोको पायलट को दोषी माना जाता है।
- मेंटेनेंस वर्कशॉप/डिपो: यदि तकनीकी जांच में यह पाया जाता है कि पीरियोडिकल ओवरहॉलिंग (POH) के दौरान कपलिंग में घटिया या अमानक (Substandard) स्पेयर पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया था, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित डिपो के इंजीनियरों और सप्लायर वेंडर पर आती है।
इंजन दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया (The Re-Coupling Procedure)
हादसे के बाद इंजन को ट्रेन के बाकी डिब्बों से सुरक्षित रूप से जोड़ने के लिए रेलवे स्टाफ निम्नलिखित वैज्ञानिक चरणों का पालन करता है:
[डिब्बे सुरक्षित करना] ──► [धीमी गति में रिवर्स] ──► [CBC इम्पैक्ट लॉक] ──► [प्रेशर पाइप जोड़ना] ──► [कंटिन्यूटी टेस्ट]
- डिब्बों को सुरक्षित करना (Securing Coaches): ट्रेन पार्टिंग होते ही गार्ड सबसे पहले डिब्बों के हैंडब्रेक कस देता है ताकि वे पूरी तरह से स्थिर (Immobile) हो जाएं।
- नियंत्रित गति में रिवर्स लाना (Controlled Engine Reverse): गार्ड से वॉकी-टॉकी पर अनुमति मिलने के बाद, लोको पायलट इंजन को बेहद धीमी गति (8 से 10 किमी/घंटा से अधिक नहीं) में पीछे (रिवर्स) लाता है।
- सेंटर बफर कपलर (CBC) लॉक करना: सहायक लोको पायलट (ALP) नीचे उतरकर इंजन और पहले कोच के सीबीसी कपलर के ‘नकल’ (Knuckle) को हाथ से खोलता है। इसके बाद जब इंजन धीरे से कोच से टकराता है, तो दोनों के नकल आपस में फंस जाते हैं और अंदर का लॉकिंग पिन अपने आप नीचे गिरकर लॉक हो जाता है।
- टेल-टेल मार्क की जांच: एएलपी टॉर्च की रोशनी में यह सुनिश्चित करता है कि लॉकिंग पिन पूरी तरह बैठ गया है। इसके लिए कपलर पर बने सुरक्षा निशान (Telltale Marks) का आपस में ठीक से मिलना अनिवार्य है।
- एयर पाइप कनेक्शन और लीकेज टेस्ट: इसके बाद ब्रेक पाइप (BP) और फीड पाइप (FP) के होज़ पाइपों को आपस में जोड़ा जाता है और इंजन से 5 kg/cm² का एयर प्रेशर छोड़ा जाता है। एएलपी यह जांचता है कि जोड़ों से हवा का कोई रिसाव तो नहीं हो रहा है।
- कंटिन्यूटी टेस्ट (Continuity Test): अंत में, लोको पायलट और गार्ड प्रेशर गेज की सुइयों की जांच करके कंटिन्यूटी टेस्ट करते हैं, जिससे यह साबित होता है कि ब्रेक सिस्टम पूरी ट्रेन में आखिरी डिब्बे तक सही ढंग से काम कर रहा है। इसके बाद ही ट्रेन को आगे रवाना किया जाता है।
