राजस्थान में APO पर सरकार की सख्ती: 30 दिन से ज्यादा खाली बैठाने पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही, जानिए पूरा नियम, इतिहास और देश में स्थिति

APO पर सरकार की सख्ती

देवेन्द्र सिंह इंडिया प्राइम जयपुर । APO पर सरकार की सख्ती राजस्थान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को Awaiting Posting Orders (APO) पर लंबे समय तक रखने की व्यवस्था पर सख्ती शुरू कर दी है। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बिना काम के लंबे समय तक वेतन देकर रखने की परंपरा पर रोक लगे और प्रशासनिक जवाबदेही तय हो।

APO यानी Awaiting Posting Orders का अर्थ है कि किसी अधिकारी को पुरानी पोस्ट से हटा दिया गया है, लेकिन नई पोस्टिंग का आदेश अभी जारी नहीं हुआ है। सामान्य परिस्थितियों में यह एक अस्थायी व्यवस्था होती है, लेकिन कई वर्षों से देश के कई राज्यों में APO को कभी-कभी प्रशासनिक कार्रवाई, दबाव या विवादित मामलों में लंबा खींचने के आरोप लगते रहे हैं।

राजस्थान में हाल ही में वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी 30 दिन से ज्यादा समय तक APO रहता है तो संबंधित विभाग को इसकी वजह बतानी होगी और जिम्मेदारी तय होगी। संबंधित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS), प्रमुख सचिव या सचिव स्तर के अधिकारियों को इसकी जानकारी मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेजनी होगी।

स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य है।

वित्त विभाग के प्रमुख प्रावधान

  1. राज्य सेवा अधिकारियों को अधिकतम 30 दिन तक APO रखा जा सकता है।
  2. 30 दिन से अधिक अवधि होने पर पोस्टिंग आदेश जारी करना आवश्यक होगा।
  3. 35 दिन से अधिक APO रहने वाले मामलों की रिपोर्ट प्रशासनिक सुधार विभाग को भेजी जाएगी।
  4. ऐसे मामलों में प्रशासनिक विभाग को पूरा औचित्य बताकर मुख्यमंत्री की स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।
  5. APO अवधि में कर्मचारी को “On Duty” माना जाएगा।

2018 का महत्वपूर्ण वित्त विभाग आदेश

वित्त विभाग के आदेश संख्या F-RULES-7704-06082018 के अनुसार:

  • जिन मामलों में 30 दिन के भीतर पोस्टिंग नहीं होती, उनकी जानकारी संबंधित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव द्वारा मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी।
  • APO मामलों की त्रैमासिक समीक्षा (Quarterly Review) अनिवार्य होगी।
  • समीक्षा रिपोर्ट CMIS पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
  • जिन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित हो, उन्हें APO रखने के बजाय नियमानुसार विभागीय कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।

राजस्थान वित्त विभाग आदेश खोज पोर्टल:
Finance Department Rajasthan Order Search Portal

राजस्थान सेवा नियम (RSR):
Rajasthan Service Rules (RSR) Volume-II

APO संबंधी वित्त विभाग आदेश (F.1(1) 2007):
Finance Department APO Order PDF

2018 संशोधित आदेश:
Finance Department Order dated 06.08.2018

राजस्थान हाई कोर्ट ने भी तय की APO की सीमा

राजस्थान हाई कोर्ट ने APO व्यवस्था पर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि APO को सजा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह केवल प्रशासनिक आवश्यकता या जनहित में होना चाहिए। अधिकारी को APO करने का कारण लिखित रूप में बताना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि APO का इस्तेमाल निलंबन (Suspension) जैसी कार्रवाई से बचने या अनुशासनात्मक प्रक्रिया को टालने के लिए नहीं किया जा सकता। सामान्य रूप से APO 30 दिन से अधिक नहीं होना चाहिए, जब तक उचित कारण और सक्षम स्तर की मंजूरी न हो।

फरवरी 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • APO को दंडात्मक कार्रवाई के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
  • APO आदेश लिखित कारणों सहित जारी किया जाना चाहिए।
  • APO अवधि 30 दिन से अधिक नहीं होनी चाहिए, जब तक वित्त विभाग से उचित स्वीकृति न ली जाए।
  • APO का उपयोग निलंबन (Suspension) के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता।

पिछले 5 वर्षों में APO क्यों चर्चा में रहा?

राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में कई विभागों में APO की स्थिति चर्चा में रही। खासकर:

  • शिक्षा विभाग
  • चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग
  • पुलिस विभाग
  • प्रशासनिक सेवाएं
  • स्थानीय निकाय विभाग

इन विभागों में ट्रांसफर विवाद, विभागीय जांच, राजनीतिक बदलाव और प्रशासनिक फेरबदल के दौरान अधिकारियों को APO किया जाता रहा है।हालांकि किसी भी अधिकारी का नाम उदाहरण के तौर पर तभी लिया जा सकता है जब आधिकारिक रिकॉर्ड या न्यायालय के दस्तावेज उपलब्ध हों। केवल लंबे APO की चर्चा के आधार पर किसी अधिकारी पर आरोप लगाना उचित नहीं है।

APO लंबे समय तक रहने की समस्या क्या है?

सरकारी व्यवस्था में APO पर रहने वाले कर्मचारी को आमतौर पर वेतन मिलता रहता है, लेकिन वह नियमित जिम्मेदारी नहीं संभालता। इससे:

  1. सरकारी धन पर अतिरिक्त भार पड़ता है
  2. प्रशासनिक काम प्रभावित होता है
  3. कर्मचारी का करियर प्रभावित हो सकता है
  4. विभागों में अनिश्चितता बढ़ती है

इसी कारण सरकार अब हर तीन महीने में APO मामलों की समीक्षा करने और रिपोर्ट CMIS पोर्टल पर अपलोड करने की व्यवस्था कर रही है।

APO पर सरकार की सख्ती

किन राज्यों में APO की समस्या ज्यादा देखी गई?

भारत में APO या “Waiting for Posting” जैसी स्थिति लगभग सभी राज्यों में किसी न किसी रूप में मौजूद है, लेकिन समस्या वहां ज्यादा दिखाई देती है जहां:

  • ट्रांसफर नीति स्पष्ट नहीं है
  • राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप ज्यादा रहते हैं
  • विभागों में पद खाली रहते हैं
  • प्रशासनिक निर्णय में देरी होती है

विशेषज्ञों के अनुसार बड़े राज्यों जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं क्योंकि यहां कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या बहुत अधिक है।

कौन से राज्य बेहतर माने जाते हैं?

कुछ राज्यों ने ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम और स्पष्ट नीति के जरिए प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने की कोशिश की है। उदाहरण के तौर पर:

  • Karnataka ने कई विभागों में ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया विकसित की है।
  • Kerala में सेवा मामलों के डिजिटलीकरण और कैडर मैनेजमेंट पर जोर दिया गया है।
  • Gujarat में भी प्रशासनिक प्रबंधन को अपेक्षाकृत व्यवस्थित माना जाता है।

हालांकि हर राज्य में विभाग के अनुसार स्थिति अलग हो सकती है।

केंद्र सरकार में APO जैसी व्यवस्था

केंद्र सरकार में भी अधिकारियों की पोस्टिंग, ट्रांसफर और तैनाती के लिए नियम हैं। केंद्र में अलग-अलग सेवाओं के लिए संबंधित कैडर नियंत्रण प्राधिकरण (Cadre Controlling Authority) निर्णय लेते हैं।केंद्र सरकार में भी किसी कर्मचारी को बिना कारण लंबे समय तक खाली रखना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामलों में Department of Personnel and Training (DoPT) समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करता है। केंद्र में IAS, IPS, IRS जैसी सेवाओं के लिए कैडर नियम अलग होते हैं। वहां राज्य सरकारों की तरह APO शब्द कम इस्तेमाल होता है, लेकिन “waiting for posting”, “compulsory waiting” या “awaiting orders” जैसी व्यवस्थाएं मौजूद रहती हैं।

आगे क्या असर पड़ेगा?

राजस्थान सरकार के नए निर्देशों से उम्मीद है कि:

  • अधिकारी लंबे समय तक बिना कारण APO नहीं रहेंगे
  • विभाग समय पर पोस्टिंग आदेश जारी करेंगे
  • प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी
  • सरकार के वित्तीय संसाधनों की बचत होगी

लेकिन असली चुनौती यह होगी कि नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें और विभाग वास्तव में 30 दिन की समय सीमा का पालन करें।कुल मिलाकर APO व्यवस्था को खत्म नहीं किया जा सकता क्योंकि कई बार प्रशासनिक कारणों से इसकी जरूरत होती है, लेकिन इसका इस्तेमाल दंड या दबाव के साधन के रूप में नहीं होना चाहिए। राजस्थान हाई कोर्ट और सरकार के नए निर्देश इसी संतुलन को बनाने की कोशिश हैं।

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