डोटासरा v/s किरोड़ी लाल मीणा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैरों में पड़ रोने लगा था कि साहब मेरे मुकदमे वापस ले लो मुझे केसों से बचा लो.

Dotasara V/s Kirodi

इंडिया प्राइम पॉलिटिकल डेस्क डोटासरा v/s किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर सीधा हमला बोलते हुए यह बड़ा बयान दिया है। उन्होंने जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि एक समय किरोड़ी लाल मीणा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैरों में गिरकर रोने लगे थे और अपने ऊपर दर्ज मुकदमे वापस लेने की गुहार लगाई थी। उन्होने कहा कि किरोड़ी लाल मीणा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैरों में पड़ गया था रोने लगा था कि साहब मेरे मुकदमे वापस ले लो मुझे केसों से बचा लो..
ऐसा आदमी हम पर आरोप लगाता है
किसी को इतना मत छेड़ो कि तुम्हारा बुढ़ापा खराब हो जाए

किरोड़ी लाल मीणा का रुख
इससे पहले, किरोड़ी लाल मीणा ने अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा को खुली चुनौती दी थी कि यदि उन पर ‘तिल बराबर’ भी भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध हो जाता है, तो वे तुरंत अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। राजस्थान की राजनीति में यह जुबानी जंग खाद-बीज विभाग पर हुई एसीबी (ACB) की कार्रवाई और पेपर लीक मामलों के बाद और तेज हो गई है.

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी राजनीतिक टकराव की है तो वह है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भाजपा सरकार में कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बीच चल रही जुबानी जंग। 24 जून 2026 को यह विवाद तब नए स्तर पर पहुंच गया जब डोटासरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि एक समय किरोड़ी लाल मीणा तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैरों में गिरकर अपने खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की गुहार लगाने लगे थे। इसके जवाब में भाजपा खेमे में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

हालांकि यह लड़ाई अचानक शुरू नहीं हुई। इसके पीछे कई सालों का राजनीतिक इतिहास, पेपर लीक विवाद, कृषि विभाग की कार्रवाई, एसीबी जांच और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का लंबा सिलसिला है।

आखिर कब शुरू हुई डोटासरा-किरोड़ी की राजनीतिक लड़ाई?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच वास्तविक टकराव 2020-21 के बाद से दिखाई देना शुरू हुआ, लेकिन यह खुलकर सामने तब आया जब किरोड़ी लाल मीणा ने राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामलों को प्रमुख मुद्दा बनाया।

उस समय कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और गोविंद सिंह डोटासरा शिक्षा मंत्री थे। विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार पर हमलावर थी। किरोड़ी लाल मीणा सड़कों पर आंदोलन कर रहे थे और उन्होंने कई बार दावा किया कि भर्ती परीक्षाओं में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है।

डोटासरा ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया और कहा कि भाजपा मुद्दों का राजनीतिकरण कर रही है। यहीं से दोनों नेताओं के बीच तीखे बयान शुरू हुए।

पेपर लीक मामला बना सबसे बड़ा युद्धक्षेत्र

2021 से लेकर 2023 तक राजस्थान में REET, शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं को लेकर विवाद बढ़ते गए। उस दौर में किरोड़ी लाल मीणा भाजपा के सबसे आक्रामक नेताओं में शामिल थे।

उन्होंने कई बार जयपुर में प्रदर्शन किए, गिरफ्तारियां दीं और भर्ती घोटालों के पीछे बड़े राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस का कहना था कि जांच एजेंसियां काम कर रही हैं और विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।

2024 में भाजपा सरकार बनने के बाद भी किरोड़ी लाल मीणा ने पेपर लीक मामलों को छोड़ने के बजाय और आक्रामक तरीके से उठाना जारी रखा। उन्होंने कई बार कहा कि अभी भी “बड़े मगरमच्छ” कानून के शिकंजे से बाहर हैं।

सत्ता बदलने के बाद बदला समीकरण

दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद किरोड़ी लाल मीणा मंत्री बने। इसके बाद कांग्रेस और विशेष रूप से डोटासरा ने पलटवार शुरू किया।

कांग्रेस का आरोप था कि जो नेता विपक्ष में रहते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का दावा करते थे, वे सत्ता में आने के बाद उन्हीं विभागों में अनियमितताओं को रोकने में विफल रहे हैं।

इसी दौरान कई बार डोटासरा ने सार्वजनिक मंचों से किरोड़ी लाल मीणा के बयानों और कार्यशैली पर सवाल उठाए।

2025-26 में संघर्ष हुआ और तीखा

वास्तविक राजनीतिक विस्फोट 2026 में कृषि विभाग से जुड़े विवादों के बाद हुआ।

कृषि मंत्री के रूप में किरोड़ी लाल मीणा ने नकली बीज, नकली खाद और कृषि इनपुट कारोबार के खिलाफ कई छापेमार अभियान चलाए। उन्होंने दावा किया कि किसानों को लंबे समय से ठगा जा रहा था और उनकी कार्रवाई से बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है।

लेकिन इसी दौरान राजस्थान एसीबी ने बीज निगम और बीज कंपनियों से जुड़े कथित रिश्वत कांड का खुलासा किया। जांच के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

डोटासरा का सबसे बड़ा आरोप

7 जून 2026 के आसपास डोटासरा ने आरोप लगाया कि कृषि मंत्री द्वारा चलाए जा रहे छापों की आड़ में उगाही का नेटवर्क काम कर रहा है। कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

यहीं से दोनों नेताओं के बीच सीधा संघर्ष शुरू हो गया।

डोटासरा ने कहा कि यदि कृषि विभाग में सब कुछ पारदर्शी है तो फिर रिश्वतखोरी और दलाली के आरोप क्यों सामने आ रहे हैं।

किरोड़ी लाल की खुली चुनौती

इन आरोपों के जवाब में किरोड़ी लाल मीणा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया।

उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि उन पर “तिल बराबर” भी भ्रष्टाचार साबित हो जाए तो वे तुरंत मंत्री पद छोड़ देंगे। उन्होंने कांग्रेस और डोटासरा को सबूत पेश करने की चुनौती दी।

यह बयान राजस्थान की राजनीति में काफी चर्चित रहा क्योंकि पहली बार दोनों नेता व्यक्तिगत स्तर पर आमने-सामने दिखाई दिए।

एसीबी विवाद ने आग में घी डाला

जून 2026 में एसीबी की एफआईआर में “डॉक्टर और मंत्री” शब्द का उल्लेख होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया।

किरोड़ी लाल मीणा स्वयं एसीबी मुख्यालय पहुंच गए और पूछा कि आखिर एफआईआर में जिस डॉक्टर और मंत्री का जिक्र है वह कौन है। उन्होंने कहा कि यदि वे दोषी हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए, लेकिन यदि नहीं हैं तो एजेंसी को स्पष्ट करना चाहिए।

इस घटना के बाद कांग्रेस ने फिर हमला तेज कर दिया।

डोटासरा का ‘साढ़ू’ वाला बयान

जून 2026 के मध्य में डोटासरा ने किरोड़ी लाल मीणा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “मैंने तो थोड़े दिन के लिए साढ़ू बनाया था।”

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कृषि घोटाला दबाया गया तो फिर ईमानदारी के दावे का कोई अर्थ नहीं रह जाता। यह बयान राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बना।

24 जून 2026: विवाद का सबसे व्यक्तिगत हमला

24 जून को जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोविंद सिंह डोटासरा ने अब तक का सबसे बड़ा और व्यक्तिगत हमला किया।

उन्होंने दावा किया कि एक समय किरोड़ी लाल मीणा तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास जाकर अपने खिलाफ मामलों को वापस लेने की गुहार लगा रहे थे और रो पड़े थे।

डोटासरा ने कहा कि जो व्यक्ति कभी अपने मामलों से बचने के लिए मदद मांगता था, वह आज दूसरों पर आरोप लगा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि “किसी को इतना मत छेड़ो कि तुम्हारा बुढ़ापा खराब हो जाए।”

यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजस्थान की राजनीति में नई बहस छिड़ गई।

क्या यह केवल व्यक्तिगत लड़ाई है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल दो नेताओं की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है।

इसके पीछे तीन बड़े राजनीतिक मुद्दे हैं—

  1. पेपर लीक मामलों की राजनीतिक जिम्मेदारी।
  2. कृषि विभाग और बीज-खाद कारोबार में कथित भ्रष्टाचार।
  3. 2028 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई।

किरोड़ी लाल मीणा भाजपा में किसान और आंदोलनकारी चेहरे के रूप में अपनी पहचान बनाए रखना चाहते हैं, जबकि डोटासरा कांग्रेस के सबसे आक्रामक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

आगे क्या?

फिलहाल दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी थमने के कोई संकेत नहीं हैं।

कांग्रेस कृषि विभाग और एसीबी जांच को मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रही है, जबकि किरोड़ी लाल मीणा पेपर लीक और कांग्रेस शासनकाल के कथित भ्रष्टाचार को लगातार उठाकर जवाबी हमला कर रहे हैं।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले महीनों में यह टकराव और तेज होगा, क्योंकि दोनों नेता पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। राजस्थान की राजनीति में डोटासरा बनाम किरोड़ी अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।

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