जल आत्मनिर्भर राजस्थान की ओर बड़ा कदम, सीएम ने बताया भविष्य का रोडमैप

इंडिया प्राइम जयपुर A major step towards a water self-reliant Rajasthan : राजस्थान को जल संकट से स्थायी राहत दिलाने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने जल संरक्षण और जल प्रबंधन को विकास की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में आयोजित राजस्थान वाटर कॉन्क्लेव में कहा कि सरकार की योजनाएं और समाज की सक्रिय भागीदारी मिलकर प्रदेश को जल आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह जनभागीदारी से जुड़ा अभियान बनना चाहिए। उन्होंने लोगों से वर्षा जल संचयन को जीवनशैली का हिस्सा बनाने और जल स्रोतों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि आज किए गए प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करेंगे।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में रामजल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौता जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। यमुना जल परियोजना के तहत लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए शेखावाटी क्षेत्र तक पानी पहुंचाने की योजना है, जिससे सीकर, झुंझुनूं और चूरू के लाखों लोगों को स्थायी पेयजल सुविधा मिलेगी। वहीं, रामजल सेतु लिंक परियोजना से 17 जिलों में पेयजल उपलब्धता मजबूत होगी और लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उदयपुर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए देवास तृतीय और चतुर्थ परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इसके अलावा पश्चिमी राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के क्षेत्रों को मजबूत किया जा रहा है। नर्मदा और ब्राह्मणी नदी के जल को विभिन्न इलाकों तक पहुंचाने की योजनाओं पर भी सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि अमृत 2.0, जल जीवन मिशन और अटल भू-जल योजना जैसी परियोजनाओं के जरिए शहरों और गांवों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत लाखों ग्रामीण परिवारों तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाया गया है, जबकि अटल भू-जल योजना के तहत जल संरक्षण के अनेक कार्य पूरे किए गए हैं। किसानों की सुविधा के लिए सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी और किसान साथी ऐप जैसी तकनीकी पहल भी शुरू की गई हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं और विशेषज्ञों से संवाद करते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा का मजबूत आधार तभी बनेगा, जब सरकार, विशेषज्ञ, सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर काम करेंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास से जुड़े अन्य विषयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने, रोजगार सृजन, निवेश परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसे क्षेत्रों में भी लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि विकसित राजस्थान का सपना तभी साकार होगा, जब जल संसाधनों का संरक्षण और उनका विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने भी जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच पानी बचाना केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।






