शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा टीमों की बड़ी कार्रवाई
इंडिया प्राइम जयपुर, 22 अगस्त 2026 राजस्थान में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे “शुद्ध आहार–मिलावट पर वार” अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग की टीमों ने प्रदेशभर में व्यापक निरीक्षण और कार्रवाई की। अधिकारियों की निगरानी में जयपुर में 6,900 लीटर संदिग्ध मूंगफली तेल सीज किया गया, जबकि अलग-अलग जिलों में करीब 1,150 किलो/लीटर अमानक और संदिग्ध खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई।
राजस्थान में खाद्य सुरक्षा टीमों की बड़ी कार्रवाई
60 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 101 खाद्य नमूने लिए गए
अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा टीमों ने प्रदेश के 60 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कुल 101 नमूने लिए गए, जिनमें 54 प्रवर्तन नमूने और 47 निगरानी नमूने शामिल हैं। अधिकारियों ने संदिग्ध खाद्य पदार्थों को मौके पर जांच के लिए चिन्हित करने के साथ आवश्यक कार्रवाई भी की।
जयपुर में 6,900 लीटर संदिग्ध मूंगफली तेल सीज
जयपुर के गोविंद नगर स्थित मैसर्स श्री श्याम वेजिटेबल का केंद्रीय टीम ने औचक निरीक्षण किया। यहां ‘कुंदन पोस्टमैन’ ब्रांड के रिफाइंड और फिल्टर मूंगफली तेल के नमूने लिए गए।
अधिकारियों को तेल की बिक्री बाजार कीमत की तुलना में काफी कम दर पर होने के कारण गुणवत्ता और मिलावट को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद टीम ने करीब 6,900 लीटर तेल सीज कर दिया। लिए गए नमूनों को जांच के लिए राज्य केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
उदयपुर में 600 लीटर संदिग्ध दूध नष्ट
उदयपुर में खाद्य सुरक्षा टीम ने करीब 600 लीटर संदिग्ध और दूषित दूध नष्ट कराया। अधिकारियों के अनुसार ऐसी सामग्री को बाजार में पहुंचने से रोकना अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, ताकि उपभोक्ताओं तक असुरक्षित खाद्य पदार्थ न पहुंच सकें।
कई जिलों में खराब मिठाइयों पर कार्रवाई
जयपुर द्वितीय, सिरोही, सीकर, करौली, पाली, अजमेर, हनुमानगढ़ और अलवर में खाद्य सुरक्षा टीमों ने दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच की। कार्रवाई के दौरान करीब 265 किलो दूषित और बासी मिठाइयां नष्ट कराई गईं।
यह कार्रवाई विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मिठाइयों में लंबे समय तक रखे जाने, खराब सामग्री के इस्तेमाल और अनुचित भंडारण से खाद्य सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकता है।
मावा और दुग्ध उत्पादों की भी जांच
पाली, खैरथल-तिजारा, भीलवाड़ा और अजमेर में जांच के दौरान करीब 148 किलो संदिग्ध दुग्ध उत्पाद और मावा नष्ट कराया गया। टीमों ने खाद्य प्रतिष्ठानों में उत्पादों की गुणवत्ता, रख-रखाव और बिक्री से जुड़े मानकों की भी जांच की।
बीकानेर में संदिग्ध घी और खाद्य तेल नष्ट
बीकानेर में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने करीब 65 किलो संदिग्ध घी और खाद्य तेल नष्ट कराया। अधिकारियों की कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही हटाना रहा।
अजमेर, बाड़मेर, हनुमानगढ़ और जोधपुर में भी कार्रवाई
अजमेर, बाड़मेर, हनुमानगढ़ और जोधपुर में भी खाद्य सुरक्षा टीमों ने विभिन्न प्रतिष्ठानों की जांच की। इन जिलों में करीब 72 किलो अन्य संदिग्ध खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई।
अधिकारियों की निगरानी में लगातार जारी है अभियान
प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने अधिकारियों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में लगातार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देशन में अतिरिक्त आयुक्त भगवत सिंह और संयुक्त आयुक्त डॉ. विजय प्रकाश शर्मा की निगरानी में विभागीय टीमें प्रदेश के विभिन्न जिलों में निरीक्षण कर रही हैं।
अधिकारियों का फोकस केवल नमूने लेने तक सीमित नहीं है। संदिग्ध खाद्य सामग्री को सीज करना, खराब या अमानक सामग्री को नष्ट कराना और प्रयोगशाला जांच के आधार पर जिम्मेदार कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करना अभियान का प्रमुख हिस्सा है।
प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद होगी कानूनी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार जिन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है, उनकी रिपोर्ट आने के बाद यदि खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों के विपरीत पाए जाते हैं तो संबंधित व्यापारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
अभियान का बड़ा संदेश: बाजार में पहुंचने से पहले रोकथाम
इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग संदिग्ध उत्पादों की पहचान कर उन्हें बाजार से हटाने पर जोर दे रहा है। 6,900 लीटर तेल को सीज करने और 1,150 किलो/लीटर से अधिक खाद्य सामग्री नष्ट कराने की कार्रवाई बताती है कि विभाग की टीमें खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी को लगातार बढ़ा रही हैं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के लिए चुनौती केवल मिलावट पकड़ना नहीं, बल्कि सप्लाई चेन में उस बिंदु की पहचान करना भी है जहां से असुरक्षित खाद्य सामग्री बाजार तक पहुंच रही है। इसलिए आगे की प्रयोगशाला जांच और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई इस अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता तय करेगी।





