Live Blog Breaking गाजियाबाद कौशांबी गैस सिलेंडर हादसा: बालिका की मौत ,पिता जख्मी
इंडिया प्राइम टीवी ब्रेकिंग डेस्क । Updated 03.15 PM IST शनिवार 13 अगस्त 2026
अलवर में भीषण हादसा, बाइक सवार 3 युवकों की मौत…
राजस्थान के अलवर जिले के अरावली विहार थाना क्षेत्र में शनिवार (12 सितंबर 2026) देर रात एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें मोटरसाइकिल सवार तीन दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई. यह दर्दनाक घटना काली मोरी के पास मोती नगर नाले के मोड़ पर हुई. मृतकों की पहचान काला कुआं इलाके के रहने वाले जितेंद्र सिंह उर्फ छोटू (22), युवराज उर्फ युवी (21) और हिमांशु (22) के रूप में की गई है. तीनों बचपन के गहरे दोस्त थे, जिनमें से जितेंद्र और युवराज होटल में काम करते थे और हिमांशु एक पेशेवर भजन गायक था.
हादसा उस वक्त हुआ जब तीनों दोस्त रात करीब 10:15 से 11:00 बजे के बीच बाइक पर सवार होकर किसी रिश्तेदार से मिलने जा रहे थे. इसी दौरान पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार बेकाबू कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी भयानक थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और कार व बाइक दोनों सीधे जाकर नाले की दीवार से टकराए, जिससे नाले की करीब 5 फीट ऊंची पक्की दीवार ढह गई. इस जोरदार भिड़ंत के कारण कार के दोनों एयरबैग खुल गए और एक युवक उछलकर सीधे नाले में जा गिरा. सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर तीनों शवों को कब्जे में लिया और अलवर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया.
इस घटना ने अब एक नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि मृतकों के परिजनों ने इसे सामान्य सड़क दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया है और पुरानी रंजिश के तहत जानबूझकर हत्या (मर्डर) करने का गंभीर आरोप लगाया है. परिजनों का दावा है कि मृतक युवराज का उनके ही मोहल्ले के सचिन मीणा नाम के युवक और कुछ अन्य लोगों के साथ पुराना विवाद चल रहा था, और जिस कार से टक्कर मारी गई वह सचिन मीणा के नाम पर ही रजिस्टर्ड है. घटना के बाद कार में सवार 4-5 युवक गाड़ी को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गए. आक्रोशित परिजनों ने रविवार सुबह अस्पताल के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने हत्या की एफआईआर (FIR) दर्ज कर मामले की हर एंगल से गहनता से जांच शुरू कर दी है
दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी इलाके स्वरूप नगर में रविवार (13 सितंबर 2026) को एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई. यह आग गली नंबर 2 स्थित एक फैक्ट्री-कम-गोदाम में लगी, जहां जूडो ड्रेस, बॉक्सिंग ग्लव्स और रेक्सीन व रबर का सामान बनाया और रखा जाता था। इस दर्दनाक हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई है।
आग की भयावहता को देखकर आसपास की इमारत में रहने वाले लोगों में भारी दहशत फैल गई। खुद को सुरक्षित करने के लिए इमारत की छत और खिड़कियों से कूदने के कारण बच्चों और महिलाओं समेत कम से कम 6 लोग घायल हो गए। घायलों की पहचान प्रियंका (28), वंशिका (8), वाणी (5), संतोष (33), तन्वी (8) और विजय के रूप में हुई है, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत की बात यह है कि ये सभी लोग सीधे तौर पर आग से नहीं झुलसे हैं और फिलहाल खतरे से बाहर हैं।
दिल्ली फायर सर्विस (DFS) को सुबह करीब 11:00 से 11:30 बजे के बीच इस आग की सूचना मिली थी। संकरी गलियों और गोदाम में रबर व रेक्सीन जैसे अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आईं, लेकिन दमकल की 15 गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। फिलहाल पुलिस और प्रशासन आग लगने के सही कारणों की जांच कर रहे हैं और बिल्डिंग के मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
झारखंड धनबाद अवैध रूप से कोयला निकालने के दौरान बड़ा हादसा
झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा (कतरास) क्षेत्र में रविवार, 13 सितंबर 2026 की सुबह अवैध रूप से कोयला निकालने के दौरान एक बहुत बड़ा हादसा हो गया. यहाँ रामकनाली ओपी (आउटपोस्ट) क्षेत्र के अंतर्गत केशलपुर कुम्हार पट्टी (बट्टू बाबू बंगला के पास) के समीप अचानक खदान की चाल धंस गई. इस मलबे में दबने से दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है.
जलावन का कोयला चुनते समय हुआ हादसा
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह कुछ स्थानीय ग्रामीण (जिनमें पुरुष और महिलाएं शामिल थे) कुम्हार पट्टी रोड के समीप स्थित इस अवैध उत्खनन स्थल पर अपने घरों के चूल्हे/जलावन के लिए कोयला निकालने और चुनने गए थे. लोग जब खदान के अंदर कोयला काट रहे थे, तभी अचानक ऊपर से मिट्टी और कोयले की भारी-भरकम चाल (छत) भरभराकर नीचे गिर गई. इसके चलते वहां मौजूद लोग भारी मलबे के ढेर के नीचे दब गए. [1, 4]
दो लोगों की मौत और राहत-बचाव कार्य
चाल धंसने की इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई. मलबे से निकाले जाने के बाद अस्पताल ले जाने के दौरान दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. इस हादसे में एक महिला गंभीर रूप से घायल भी हुई है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने अपने स्तर पर उपकरणों की मदद से मिट्टी हटाकर मलबे में दबे अन्य लोगों को बाहर निकालने का प्रयास और रेस्क्यू शुरू किया. [1, 3, 4]
दर्जनों लोगों के दबे होने की आशंका और गुस्सा
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के वक्त वहां काफी संख्या में लोग मौजूद थे, इसलिए मलबे के नीचे अब भी कई लोगों के दबे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है और मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है. इस हादसे के बाद इलाके में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल है. कतरास और बाघमारा कोयलांचल क्षेत्र को अवैध कोयला उत्खनन का गढ़ माना जाता है, जहाँ सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी के कारण पहले भी ऐसे कई जानलेवा हादसे सामने आ चुके हैं. [2, 4, 5, 6]
यदि इस हादसे के संबंध में पुलिस-प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया, राहत कार्य (Rescue Updates) या मृतकों की पहचान के बारे में कोई और नई जानकारी आती है, तो क्या आप उसे जानना चाहेंगे?
गाजियाबाद कौशांबी गैस सिलेंडर हादसा
गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भौवापुर गांव (बालक राम कॉलोनी, गली नंबर 3) में शनिवार, 12 सितंबर 2026 की रात को एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ। यहाँ एक बहुमंजिला इमारत की चौथी मंजिल पर स्थित किराए के मकान में खाना बनाते समय एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर में भीषण आग लग गई। इस हादसे में 15 वर्षीय किशोरी आंचल की झुलसकर मौत हो गई, जबकि उसे बचाने की कोशिश में पिता गुड्डू महतो (45 वर्ष) गंभीर रूप से झुलस गए। इस दुर्घटना से जुड़ी पूरी विस्तृत जानकारी नीचे शीर्षकों (headings) के साथ दी गई है:
गैस रिसाव और कमरे में फंसी बेटी
शनिवार रात करीब 8:30 बजे जब यह परिवार अपने घर में रात्रि का भोजन तैयार कर रहा था, तभी अचानक सिलेंडर में गैस लीक होने के कारण भीषण आग लग गई। आग की लपटें तेजी से फैलने पर गुड्डू महतो, उनकी पत्नी और उनका बेटा किसी तरह भागकर बालकनी की ओर सुरक्षित निकल आए। हालांकि, उनकी 15 साल की बेटी आंचल कमरे के अंदर ही पीछे छूट गई और लपटों के बीच फंस गई। दमकल अधिकारियों के अनुसार, आंचल ने शायद खुद को बचाने के लिए एक चादर लपेट ली थी, जिसने आग पकड़ ली और वह बुरी तरह झुलस गई।
बेटी को बचाने लपटों में कूदे पिता
अपनी लाडली को आग से घिरा देखकर पिता गुड्डू महतो ने अपनी जान की परवाह नहीं की और उसे बचाने के लिए सीधे धधकते हुए कमरे के अंदर कूद पड़े। बेटी को बाहर निकालने के प्रयास में वह खुद भी आग की चपेट में आ गए, जिससे उनका चेहरा और हाथ गंभीर रूप से झुलस गए। इसी बीच, घटना की जानकारी आपातकालीन सेवा (112) के माध्यम से पुलिस और दमकल विभाग को दी गई।
संकरी गली में पैदल पहुंची फायर टीम
सूचना मिलते ही वैशाली से फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हुई। लेकिन बालक राम कॉलोनी की वह गली इतनी संकरी (तंग) थी कि दमकल की बड़ी गाड़ियां सीधे मकान तक नहीं पहुंच सकती थीं। समय की गंभीरता को देखते हुए मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) राहुल पाल की अगुवाई में दमकल कर्मियों ने सूझबूझ दिखाई। वे पानी की बाल्टियाँ और प्राथमिक अग्निशमन उपकरण (firefighting equipment) हाथों में लेकर पैदल ही तंग गलियों से होते हुए चौथी मंजिल तक पहुंचे। अग्निशामकों ने तत्परता से आग पर काबू पाया और उसे आसपास फैलने से रोका, हालांकि आग बुझाने के दौरान सिलेंडर में एक धमाका भी हुआ।
अस्पताल में दम तोड़ा, परिवार सुल्तानपुर का निवासी
हादसे के तुरंत बाद गंभीर रूप से झुलसे पिता और बेटी को तत्काल कौशांबी स्थित यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहाँ इलाज के दौरान डॉक्टरों ने आंचल को मृत घोषित कर दिया, जबकि पिता गुड्डू महतो का उपचार जारी है और फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है। पुलिस जांच के मुताबिक, यह पीड़ित परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले का रहने वाला है और आजीविका के लिए यहाँ किराए पर रह रहा था। एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य ने बताया कि पुलिस द्वारा इस मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।







