मध्य प्रदेश जहरीली शराब कांड: जहरीली शराब पीने से अब तक 28 से 29 लोगों की मौत,46 मरीज अभी भी भर्ती
इंडिया प्राइम टीवी स्टेट डेस्क । मध्य प्रदेश जहरीली शराब कांड। मध्य प्रदेश के सागर जिले में नकली और जहरीली शराब पीने से अब तक 28 से 29 लोगों की मौत हो चुकी है (हालांकि प्रशासनिक स्तर पर 15 से 24 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की जा रही है, जबकि विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है कि मौतें 50 से अधिक हुई हैं)। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) सहित अन्य अस्पतालों में करीब 46 मरीज अभी भी भर्ती हैं, जबकि 60 से अधिक लोगों को ठीक होने के बाद छुट्टी दी जा चुकी है।
जहरीली शराब कांड कब और कैसे हुई घटना
यह जानलेवा घटना 5 सितंबर और 6 सितंबर 2026 की दरमियानी रात को शुरू हुई। शनिवार रात को शराब पीने के बाद, रविवार (6 सितंबर) की सुबह से लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, उन्हें उल्टी, घबराहट और धुंधला दिखने जैसी शिकायतें होने लगीं और मौतों का सिलसिला शुरू हो गया।
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ तहसील क्षेत्रों के विभिन्न गांवों (जैसे बरज, ततरवारा आदि) में सामने आया है। पीड़ितों का इलाज मुख्य रूप से सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में चल रहा है। [
मजदूरों और ग्रामीणों ने ठेके से मिलने वाली शराब से करीब 50 रुपये सस्ती मिलने वाली अवैध नकली शराब खरीदी थी। यह शराब जहरीली (Spurious Liquor) निकली, जिसमें मिथाइल अल्कोहल या अत्यधिक मात्रा में स्पिरिट मौजूद थी। इसे पीने से लोगों के शरीर नीले पड़ने लगे, मल्टीपल ऑर्गन फेलियर हुआ और बड़े पैमाने पर मौतें हुईं।
पुलिस और प्रशासन की जांच
- खेत में नकली फैक्ट्री: आरोपियों ने ततरवारा गांव के एक मक्के के खेत में अवैध शराब बनाने का अड्डा खोल रखा था। वहां भारी मात्रा में स्पिरिट लाकर नकली शराब तैयार की जाती थी।
- मुख्य साजिशकर्ता: पुलिस पूछताछ में सामने आया कि स्थानीय करणी सेना के पदाधिकारी चंद्रभान सिंह (सरपंच चंदू राजपूत), मनीष लोधी और शिवंजय ने मिलकर इसकी साजिश रची थी। मनीष लोधी ने रवि लखेड़ा नाम के एक नामी तस्कर के साथ मिलकर स्पिरिट की व्यवस्था की थी।
- अब तक की कार्रवाई: पुलिस ने मामले में कुल 30 आरोपियों की पहचान कर 16 को गिरफ्तार कर लिया है।
- बुलडोजर एक्शन: घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मुख्य आरोपी मनीष लोधी और चंदू राजपूत के अवैध निर्माणों और घरों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त करना शुरू कर दिया है।
- सरकारी गाज: मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर लापरवाही बरतने के आरोप में 3 आबकारी (Excise) अधिकारियों और 2 पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने खुद अस्पताल पहुंचकर मरीजों से मुलाकात की और दोषियों को उम्रकैद या फांसी की सजा दिलाने की बात कही है







