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NEET परीक्षा से पहले अस्थायी प्रतिबंध के फैसले के खिलाफ टेलीग्राम पहुंचा हाईकोर्ट

NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार के अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जानिए सरकार और टेलीग्राम के तर्क।

तेजस्वी सिंह | IndiaPrimeTV.com | नई दिल्ली डेस्क NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और केंद्र सरकार के बीच विवाद अब अदालत पहुंच गया है। टेलीग्राम ने केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले पर आज सुनवाई होने की संभावना है।

केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया था। सरकार का कहना है कि पिछले पेपर लीक मामले में टेलीग्राम चैनलों और ग्रुप्स का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया था।

सरकार ने क्यों लगाया प्रतिबंध?

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार, कुछ संगठित गिरोह टेलीग्राम के जरिए फर्जी प्रश्नपत्र, गलत जानकारी और परीक्षा से जुड़ी अफवाहें फैलाकर छात्रों को ठग रहे थे। एजेंसी का दावा है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने और दोबारा पेपर लीक रोकने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेलीग्राम पर अस्थायी रोक 22 जून तक लागू रहेगी, जबकि प्लेटफॉर्म के मैसेज एडिट फीचर पर 30 जून तक प्रतिबंध लगाया गया है।

टेलीग्राम ने अदालत में क्या कहा?

टेलीग्राम का तर्क है कि पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना लाखों वैध उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को प्रभावित करता है। कंपनी का कहना है कि किसी भी गलत गतिविधि में शामिल विशेष चैनलों या समूहों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद किया जाए।

टेलीग्राम के संस्थापक पावेल ड्यूरोव ने भी सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि प्रतिबंध से पेपर लीक नहीं रुका, बल्कि ऐसी गतिविधियां अन्य प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो गईं। उन्होंने दावा किया कि भारत में टेलीग्राम के करोड़ों उपयोगकर्ता इस फैसले से प्रभावित हुए हैं।

छात्रों और कोचिंग सेक्टर पर क्या असर?

टेलीग्राम सिर्फ चैटिंग ऐप नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के लिए स्टडी मटेरियल, नोट्स, टेस्ट सीरीज और चर्चा का प्रमुख माध्यम बन चुका है। कई कोचिंग संस्थान और शैक्षणिक चैनल भी इसी प्लेटफॉर्म के जरिए कंटेंट साझा करते हैं।

ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले लगाए गए प्रतिबंध ने छात्रों और शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग इसे परीक्षा की पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे डिजिटल अधिकारों पर असर डालने वाला फैसला मान रहे हैं।

आगे क्या?

दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई इस मामले में अहम साबित हो सकती है। अदालत को यह तय करना होगा कि परीक्षा की सुरक्षा और करोड़ों यूजर्स की डिजिटल स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

फिलहाल, NEET-UG 2026 की री-एग्जाम 21 जून को प्रस्तावित है और सरकार परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था लागू कर रही है।

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