“हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस हैं”: G7 में मोदी से मेलोनी की मुलाकात चर्चा में, ट्रम्प संग ट्रेड डील पर टिकी नजर
देवेंद्र सिंह | IndiaPrimeTV.com फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात चर्चा का केंद्र बन गई। जैसे ही दोनों नेता आमने-सामने आए, मेलोनी मुस्कुराते हुए बोलीं, “दोबारा मिलकर अच्छा लगा… हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस हैं।”
कुछ सेकंड की यह हल्की-फुल्की बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इसकी वजह सिर्फ दोनों नेताओं की लोकप्रियता नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में बने उनके सहज और दोस्ताना रिश्ते भी हैं।
‘मेलोडी’ से फिर चर्चा में मोदी- मेलोनी की केमिस्ट्री
पिछले साल G20 सम्मेलन के दौरान मेलोनी और मोदी की सेल्फी ने सोशल मीडिया पर “मेलोडी” ट्रेंड शुरू कर दिया था। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पांच देशों के दौरे के दौरान रोम में मेलोनी से मुलाकात की थी, जहां उन्होंने उन्हें भारतीय मिठाई और एक विशेष उपहार भेंट किया था।
दोनों नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारत-इटली संबंधों के नए दौर का संकेत भी मानी जा रही है। रक्षा, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देश तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं।
सिर्फ मेलोनी ही नहीं, दुनिया की कई महिला नेताओं के साथ मोदी की बनी खास केमिस्ट्री
पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री मोदी ने कई महिला नेताओं के साथ मजबूत व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंध बनाए हैं।
- यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत को यूरोप का “विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार” बताया है।
- बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कई बार कहा कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते “सिर्फ पड़ोसी देशों के नहीं, बल्कि परिवार जैसे हैं।”
- तंजानिया की राष्ट्रपति सामिया सुलुहू हसन ने भारत को अफ्रीका के विकास का महत्वपूर्ण भागीदार बताया।
- बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली ने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर भारत की भूमिका की खुलकर सराहना की है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत संवाद शैली और अनौपचारिक कूटनीति भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
G7 में मोदी-ट्रम्प की मुलाकात पर दुनिया की नजर
G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संक्षिप्त मुलाकात भी सुर्खियों में रही। दोनों नेता आउटरीच सेशन में एक-दूसरे के साथ बैठे नजर आए और करीब पांच मिनट तक बातचीत की।
फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के बाद यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की बातचीत है।
अब सभी की नजर 17 जून को होने वाली द्विपक्षीय बैठक पर टिकी है, जिसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है।
किन मुद्दों पर हो सकती है बातचीत?
सूत्रों के अनुसार, मोदी और ट्रम्प के बीच इन अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है—
- भारत-अमेरिका के बीच लंबित व्यापार समझौता
- टैरिफ और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे
- रक्षा सहयोग और उन्नत तकनीक साझेदारी
- सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग
दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
ईरान-इजराइल तनाव और यूक्रेन युद्ध भी एजेंडे में
इस बार G7 सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है।
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव, गाजा संकट, यूक्रेन युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा जैसे मुद्दे नेताओं के बीच चर्चा के केंद्र में हैं।
भारत ने लगातार संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी कहा है कि “यह युद्ध का नहीं, संवाद और कूटनीति का समय है।”
फ्रांस के साथ 13 अहम समझौते
G7 सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों देशों ने रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा और व्यापार सहित 13 क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत और फ्रांस हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
G7 में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के कारण उसे लगातार विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जा रहा है।
यह 13वीं बार है जब भारत G7 शिखर सम्मेलन में शामिल हुआ है और प्रधानमंत्री मोदी सातवीं बार इस वैश्विक मंच का हिस्सा बने हैं।
एक दशक पहले तक भारत G7 के एजेंडे का हिस्सा होता था, लेकिन अब भारत कई वैश्विक मुद्दों पर एजेंडा तय करने वाले देशों में शामिल हो चुका है।
