सोजत मेहंदी में मिलावट का बड़ा खुलासा: जांच के घेरे में कई उत्पाद, स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका, सरकार ने शुरू की सख्त कार्रवाई
Tejasvi Singh India Prime Special Report | मेहंदी में मिलावट पाली/जयपुर राजस्थान के पाली जिले का सोजत दशकों से देश-विदेश में अपनी प्राकृतिक मेहंदी के लिए प्रसिद्ध रहा है। “सोजत मेहंदी” को भारत सरकार द्वारा भौगोलिक संकेतक (GI Tag) का दर्जा भी दिया जा चुका है, जिससे इसकी गुणवत्ता और विशिष्ट पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली।
भारत से निर्यात होने वाली प्राकृतिक मेहंदी का बड़ा हिस्सा सोजत क्षेत्र से आता है और हजारों किसान, श्रमिक तथा छोटे-बड़े उद्योग इस कारोबार पर निर्भर हैं। लेकिन हाल ही में स्वास्थ्य विभाग और औषधि नियंत्रण विभाग की जांच के बाद सामने आए तथ्यों ने इस प्रतिष्ठित उद्योग को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कुछ मेहंदी उत्पादों के नमूनों में गुणवत्ता संबंधी गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद सरकार ने व्यापक जांच अभियान शुरू किया है। अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य पूरे उद्योग को बदनाम करना नहीं, बल्कि मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर असली सोजत मेहंदी की प्रतिष्ठा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
मेहंदी में मिलावट
राजस्थान स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न बाजारों से मेहंदी पाउडर और मेहंदी कोन के नमूने एकत्र कर सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे गए। जांच रिपोर्टों में कुछ उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कुछ नमूनों में प्राकृतिक मेहंदी का प्रमुख रंगद्रव्य लॉसोन (Lawsone) अपेक्षित स्तर पर नहीं पाया गया, जबकि कुछ मामलों में ऐसे रासायनिक तत्वों की मौजूदगी की बात सामने आई जो प्राकृतिक मेहंदी का हिस्सा नहीं माने जाते। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर संबंधित बैचों और कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई है। हालांकि अंतिम कानूनी निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होंगे।
विशेषज्ञ बताते हैं कि लॉसोन वह प्राकृतिक तत्व है जो मेहंदी की पत्तियों में पाया जाता है और त्वचा या बालों पर प्राकृतिक लाल-भूरा रंग विकसित करता है। यदि किसी उत्पाद में इसकी मात्रा बहुत कम हो या अनुपस्थित मिले, तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी कारण प्रयोगशाला परीक्षणों को मेहंदी की शुद्धता जांचने का सबसे विश्वसनीय तरीका माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पैकेट पर “हर्बल”, “नेचुरल” या “100 प्रतिशत प्योर” लिखा होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पाद का निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना भी जरूरी है।
जांच के दौरान जिन उत्पादों या ब्रांडों के नमूने लिए गए, उनमें मीडिया रिपोर्टों के अनुसार Pushp Henna, Prem Dulhan Fast Color, Nazia Gold Mehndi Cone और Shringar Mehndi Cone सहित कुछ अन्य उत्पाद भी शामिल हैं। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इन मामलों में संबंधित बैचों की जांच और नियामकीय कार्रवाई जारी है। किसी भी कंपनी के संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाएगा। इसलिए केवल जांच के आधार पर किसी ब्रांड को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी मेहंदी उत्पाद में अनुचित रासायनिक रंग, प्रतिबंधित तत्व या गुणवत्ता मानकों से अलग सामग्री मौजूद हो तो इससे उपयोगकर्ताओं को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इनमें त्वचा पर एलर्जी, तेज जलन, लाल चकत्ते, फफोले, खुजली, आंखों में जलन, बाल झड़ना तथा संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में गंभीर रिएक्शन शामिल हो सकते हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि किसी भी नए मेहंदी उत्पाद का उपयोग करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट अवश्य करें। यदि लगाने के बाद जलन, सूजन या खुजली महसूस हो तो तुरंत उसका उपयोग बंद कर चिकित्सक से संपर्क करें।
सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्यभर में जांच अभियान तेज कर दिया है। औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा विभिन्न निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया जा रहा है, संदिग्ध उत्पादों के नमूने लैब में भेजे जा रहे हैं और जिन मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया जा रहा है, वहां Drugs and Cosmetics Act, 1940 तथा Cosmetics Rules, 2020 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। आवश्यक होने पर संबंधित बैचों को बाजार से वापस मंगाने (रिकॉल), लाइसेंस संबंधी कार्रवाई और न्यायालय में मामला प्रस्तुत करने जैसी प्रक्रियाएं भी अपनाई जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और असली सोजत मेहंदी की वैश्विक प्रतिष्ठा को बनाए रखना है।
सोजत मेहंदी उद्योग राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। हजारों किसान मेहंदी की खेती करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय श्रमिक इसकी प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात से जुड़े हुए हैं। भारत से मध्य पूर्व, यूरोप, अमेरिका और एशिया के कई देशों में सोजत की मेहंदी निर्यात की जाती है। ऐसे में यदि कुछ उत्पादों में गुणवत्ता संबंधी अनियमितताएं सामने आती हैं तो उसका प्रभाव पूरे उद्योग की साख पर पड़ सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावट करने वाले सीमित निर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई ही पूरे उद्योग के हित में है, ताकि ईमानदार निर्माता और किसान प्रभावित न हों।
उपभोक्ताओं को भी खरीदारी के समय सतर्क रहने की आवश्यकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मेहंदी खरीदते समय पैकेट पर निर्माता का नाम, पता, बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और लाइसेंस संबंधी जानकारी अवश्य देखें। केवल विश्वसनीय विक्रेताओं से ही उत्पाद खरीदें और ऐसे उत्पादों से सावधान रहें जो कुछ ही मिनटों में गहरा काला रंग देने का दावा करते हैं। प्राकृतिक मेहंदी का रंग धीरे-धीरे विकसित होता है और सामान्यतः लाल-भूरे रंग में बदलता है। अत्यधिक तेज रासायनिक गंध वाले उत्पादों से भी बचना चाहिए।
यदि किसी उपभोक्ता को मेहंदी लगाने के बाद गंभीर एलर्जी, जलन, फफोले या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है तो वह उत्पाद का पैकेट और खरीद का बिल सुरक्षित रखे तथा अपने राज्य के औषधि नियंत्रण विभाग, स्वास्थ्य विभाग या उपभोक्ता संरक्षण तंत्र में शिकायत दर्ज कराए। इससे संबंधित उत्पाद की जांच में सहायता मिलती है और यदि वास्तव में गुणवत्ता संबंधी समस्या है तो अन्य उपभोक्ताओं को भी उससे बचाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोजत मेहंदी भारत की पारंपरिक विरासत और वैश्विक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुछ मामलों में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर पूरे उद्योग पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि नियमित गुणवत्ता परीक्षण, आधुनिक प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने, पारदर्शी लेबलिंग, सख्त नियामकीय निगरानी और उपभोक्ता जागरूकता के माध्यम से इस उद्योग की विश्वसनीयता को और मजबूत किया जाए। यदि सरकार, उद्योग और उपभोक्ता मिलकर गुणवत्ता पर ध्यान दें तो सोजत मेहंदी अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान और भरोसे को पहले से भी अधिक मजबूत बना सकती है।
(नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित ब्रांडों और उत्पादों का उल्लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जांच रिपोर्टों और मीडिया स्रोतों के आधार पर किया गया है। संबंधित मामलों में नियामकीय एवं कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी अथवा न्यायालय द्वारा लिया जाएगा।)
