चंद्र मनोहर बटवाड़ा की सक्रियता देख बीजेपी का कार्यकर्ता निकाला घरो से , जयपुर चारदीवारी में हजारो बाइक काफिलो के साथ निकली तिरंगा रैली
इंडिया प्राइम जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर एक बार फिर चारदिवारी क्षेत्र की आम युवा में जोश दिखाई दिया। मौका था स्वतंत्रता दिवस पर पीएम के आह्ववान पर तिरंगा यात्रा के आयोजन का जिसने शहर भाजपा कार्यकर्ताओ में जोश भर दिया है।
बीजेपी की जयपुर शहर और पार्टी की राजनीति में चंद्र मनोहर बटवाड़ा को स्थानीय कार्यकर्ता के रूप में लंबे समय से संगठन से जुड़े रहने और आम आदमी के बीच रहने वाले सक्रिय नेता के रुप में देखा जाता है। बटवाड़ा की राजनीति का केंद्र जमीनी संगठन और स्थानीय कार्यकर्ता नेटवर्क रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बाइक रैली ने दिया राजनीतिक सक्रियता का संदेश
चारदिवारी और किशनपोल में बटवाड़ा के नेतृत्व में निकली वाहन रैली में आयोजकों के अनुसार 1,000 से अधिक बाइक शामिल हुईं। बड़ी संख्या में युवाओं और भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने जैसे पार्टी नेताओ में जोश भर दिया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यह केवल एक रैली नहीं, बल्कि पार्टी के स्थानीय संगठन के भीतर कार्यकर्ता mobilisation की क्षमता दिखाने का प्रयास भी माना जा सकता है।
चंद्र मनोहर बटवाड़ा संगठन के कार्यकर्ता की पहचान
चंद्र मनोहर बटवाड़ा किशनपोल विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। उनकी राजनीतिक शैली में बड़े नेताओं की मौजूदगी से ज्यादा स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संपर्क को महत्व देने की छवि दिखाई देती है।
उनके समर्थकों के बीच उन्हें “डाउन-टू-अर्थ” और आसानी से उपलब्ध रहने वाले स्थानीय नेता के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है। खासकर पार्टी के बूथ और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ उनका संपर्क उनकी राजनीतिक ताकत माना जाता है।

जयपुर शहर को बीजेपी का गढ़ बनाने में संघी बटवाड़ा की महत्वपुर्ण भूमिका
- संघ (RSS) से शुरुआत: छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे, जिसने उनकी राजनीतिक और सामाजिक विचारधारा की नींव रखी। [1]
- चार दशकों का सफर: वे 1980 के दशक से ही भाजपा संगठन के विभिन्न पदों और स्थानीय स्तर पर निरंतर सक्रिय रहे हैं।
- जयपुर नगर निगम में भूमिका: संगठन में लंबे समय तक काम करने के अनुभव के बाद वे जयपुर नगर निगम में पार्षद भी रहे, जहां उन्होंने स्थानीय निकाय स्तर पर पार्टी को मजबूत किया।
- वकालत और संगठन समन्वय: पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता होने के कारण वे लंबे समय तक भाजपा के कानूनी और संगठनात्मक मामलों में भी पर्दे के पीछे रहकर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
- 2023 में मुख्यधारा का टिकट: सालों की जमीनी और निष्ठावान सक्रियता को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें वर्ष 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में किशनपोल सीट से अपना आधिकारिक प्रत्याशी बनाया।
किशनपोल में क्यों महत्वपूर्ण है कार्यकर्ता नेटवर्क?
किशनपोल जयपुर का ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां चुनावी राजनीति केवल बड़े राजनीतिक मुद्दों से तय नहीं होती। पुराने शहर के सामाजिक-सामुदायिक समीकरण, व्यापारिक वर्ग, स्थानीय समस्याएं और बूथ स्तर का संगठन चुनावी मुकाबले को प्रभावित करते हैं।
ऐसे क्षेत्र में किसी नेता की वास्तविक ताकत का एक पैमाना यह भी होता है कि वह पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं को कितनी मजबूती से mobilise कर सकता है।
बटवाड़ा और बीजेपी के लिए चारदिवारी में निकाय चुनाव बड़ी चुनौती








