राजस्थान एनर्जी समिट 2026 : स्वच्छ ऊर्जा में राज्य ने बढ़ाया बड़ा कदम

इंडिया प्राइम जयपुर कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) राजस्थान की ओर से आयोजित राजस्थान एनर्जी समिट 2026 के सातवें संस्करण में भविष्य की ऊर्जा जरूरतों, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक ऊर्जा ढांचे को लेकर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार साझा किए। ‘एक्सीलरेटिंग द नेक्स्ट फेज ऑफ एनर्जी ट्रांजिशन’ थीम पर आयोजित इस समिट में देश-विदेश के नीति विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से नई पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रांसमिशन, वितरण, ऊर्जा भंडारण और मजबूत ग्रिड नेटवर्क विकसित करने पर भी समान रूप से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान देश का पहला राज्य है जिसने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लिए औपचारिक एक्शन फ्रेमवर्क अपनाया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 42 गीगावॉट से अधिक स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता है, जबकि कुल स्वच्छ ऊर्जा क्षमता लगभग 48 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है। राज्य सरकार का लक्ष्य ‘विकसित राजस्थान @2047’ के विजन के अनुरूप आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा तंत्र तैयार करना है।
मुख्य सचिव ने पीएम-कुसुम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना किसानों को केवल अन्न उत्पादन तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें बिजली उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर भी दे रही है। इससे किसान ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भागीदार बन रहे हैं।
ब्रिटिश हाई कमिशन के डिप्टी हाई कमिश्नर स्टीव हिकलिंग ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और कम कार्बन आधारित ऊर्जा प्रणाली को दोनों देशों की साझा प्राथमिकता बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में तकनीक, निवेश और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग और बढ़ेगा।
राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. रोहित गुप्ता ने कहा कि भारत आज स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि में निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका रही है और राजस्थान देश की सौर ऊर्जा क्षमता में अग्रणी योगदान दे रहा है। राज्य न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि अन्य राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करा रहा है।
जीई वर्नोवा के बिजनेस लीडर पुनीत भाटला ने कहा कि तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए आधुनिक बिजली व्यवस्था, मजबूत ग्रिड, ऊर्जा दक्षता और ग्रीन फाइनेंस पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तकनीक आधारित समाधान अपनाना समय की जरूरत है।
समिट के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, एआई आधारित स्मार्ट ग्रिड, डिजिटल तकनीक और ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एससीएडीए सिस्टम, ऑटोमेटेड फॉल्ट डिटेक्शन और स्मार्ट ट्रांसमिशन नेटवर्क भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और प्रभावी बनाएंगे।
ऊर्जा विशेषज्ञों ने यह भी माना कि आने वाले वर्षों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए ऊर्जा दक्षता बढ़ाना, मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार करना और स्वच्छ ऊर्जा को बिजली प्रणाली में बेहतर तरीके से शामिल करना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में रहेगा।समिट में 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार, निवेश तथा भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की।






