Vande Mataram Controversy 2026 : क्या वाकई कांग्रेस नेताओं ने तोड़ा नियम?
इंडिया प्राइम नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026 स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय दिल्ली में आयोजित झंडा रोहण कार्यक्रम के बाद देश में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण (Full Rendition) के गायन के दौरान राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच हुई बातचीत के एक वीडियो को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।
दोनों पक्षों के आधिकारिक बयान (Official Statements)
भाजपा का रुख: अमित मालवीय का तीखा हमला
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स (X) पर वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने अपने बयान में कहा:
“वंदे मातरम बजते ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी की असहजता साफ देखी जा सकती है। शुरुआती पंक्तियों के बाद सोनिया गांधी ने राष्ट्रगीत को बीच में ही रुकवाने का स्पष्ट इशारा किया और राहुल गांधी भी उनका समर्थन करते दिखे। यह देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति कांग्रेस की पुरानी मानसिकता और तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाता है। वे तो राष्ट्रगीत को बीच में ही बंद करवा देते, लेकिन देश का नया और कड़ा कानून आड़े आ गया। जेल जाने के डर से उन्हें न चाहते हुए भी खड़े रहना पड़ा।”
कांग्रेस का पलटवार: जयराम रमेश और पवन खेड़ा का बयान
भाजपा के इन आरोपों पर कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश और वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कड़ी आपत्ति जताई। कांग्रेस की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया:
“भाजपा की डर्टी ट्रिक्स सेल एक बार फिर बिना आवाज के वीडियो (Muted Video) फैलाकर देश को गुमराह कर रही है। कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत का अपमान नहीं हुआ, बल्कि पूरा छह अंतरों का वंदे मातरम आदरपूर्वक गाया गया। असलियत यह थी कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी (80+ वर्ष) वरिष्ठता और स्वास्थ्य कारणों से लंबे समय तक खड़े रहने में असमर्थ महसूस कर रहे थे। सोनिया जी और राहुल जी केवल उनके लिए कुर्सी मंगवाने की व्यवस्था कर रहे थे। एक बुजुर्ग नेता के स्वास्थ्य से जुड़े मानवीय मुद्दे पर भी इस तरह की घटिया राजनीति करना बेहद शर्मनाक है।”
क्या नए कानून (Act) में 2 अंतरे या 6 अंतरे गाने को लेकर कोई विशेष निर्देश हैं?
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 (Prevention of Insults to National Honour Act) को लेकर जनता में अक्सर यह भ्रम रहता है कि इसमें कितने अंतरे गाने का नियम है। इसकी कानूनी स्थिति इस प्रकार है:
- अंतरे (Stanzas) को लेकर कोई अनिवार्य बाध्यता नहीं: गृह मंत्रालय (MHA) के पारंपरिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, आधिकारिक तौर पर वंदे मातरम के पहले दो अंतरे (Stanzas) को ही गाने की परंपरा रही है, क्योंकि ये देश के स्वतंत्रता संग्राम से सीधे जुड़े हैं। नए कानून में यह कहीं भी अनिवार्य नहीं लिखा गया है कि आपको हर बार पूरा 6 अंतरों वाला गीत ही बजाना होगा।
- अपराध कब बनता है?: कानून के तहत यह अपराध नहीं है कि आपने 2 अंतरे बजाए या 6 अंतरे। अपराध तब माना जाता है जब एक बार गीत बजना शुरू हो जाए और कोई उसे बीच में जानबूझकर (Intentionally) रुकवा दे, या बज रहे गीत का अपमान करे।
- कांग्रेस मुख्यालय की स्थिति: कांग्रेस मुख्यालय में आयोजकों ने स्वयं पूरे 6 अंतरों वाले संस्करण को बजाने का निर्णय लिया था। चूंकि गीत एक बार शुरू हो चुका था, इसलिए उसे बीच में रोकना नए कानून के तहत “व्यवधान डालना” या “अपमान” माना जा सकता था। इसी कानूनी पेचीदगी को भाजपा ने अपना मुद्दा बनाया, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने गीत को रोकने की कोई कोशिश ही नहीं की थी
भाषा का पहलू
मूल रूप से वंदे मातरम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा संस्कृत और ‘साधु बांग्ला’ के मिश्रण में लिखा गया है। इसके पहले दो अंतरे संस्कृत प्रधान हैं, जबकि बाद के चार अंतरे शुद्ध बांग्ला में हैं। चूंकि वहाँ पूरा गीत बज रहा था, इसलिए बाद के अंतरों में बंगाली भाषा का प्रभाव स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहा था।
निष्कर्ष
यह पूरा मामला कानूनी उल्लंघन से ज्यादा एक राजनीतिक नैरेटिव (Political Narrative) की लड़ाई बन चुका है। जहां भाजपा इसे कांग्रेस की मजबूरी और राष्ट्रगीत के प्रति अनादर के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे एक बुजुर्ग नेता के प्रति शिष्टाचार और बैठने की लॉजिस्टिक व्यवस्था से जुड़ा मामला बता रही है।







