'सही समय आने पर बोलूंगी', ममता के साथ बगावत के सवाल पर सायोनी का जवाब

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच जादवपुर से लोकसभा सांसद सयानी घोष रविवार को नई दिल्ली पहुंचीं. पार्टी के असंतुष्ट सांसदों के गुट में शामिल होने की अटकलों के बीच उन्होंने फिलहाल किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. दिल्ली एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में सयानी घोष ने कहा, ‘अभी मैं कुछ नहीं कहूंगी, सही समय आने पर अपनी बात रखूंगी.’
भूपेंद्र यादव के घर पर जमा हुए TMC सांसद
बताया जा रहा है कि TMC के कई बड़े सांसद रविवार को दिल्ली में BJP के केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर जमा हुए. ये सभी बागी सांसद हैं. सबसे पहले TMC सांसद सेयानी घोष वहां पहुंचीं. उनके बाद एक के बाद एक कई और सांसद भी आ गए. जिनमें माला रॉय, पारसुन बनर्जी, सुदीप बंद्योपाध्याय, अरूप चक्रवर्ती, शताब्दी रॉय, सुदिप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष के नाम शामिल हैं. इनके अलावा टीएमसी नेता, पार्थ भौमिक, जगदीश बसुनिया, मेटाली बाग, जून मालिया, बापी हलधर भी पहुंचे हैं.
इसी बीच टीएमसी सांसद माला रॉय भी रविवार को दिल्ली पहुंचीं. उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. बताया जा रहा है कि सोमवार को असंतुष्ट सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकता है. इस दौरान वे लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग रख सकते हैं.
महुआ मोइत्रा ने क्या कहा?
शनिवार को टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और सांसद शताब्दी रॉय ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की. इस मुलाकात को लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठने लगे. कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर सुदीप बंद्योपाध्याय पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उन्होंने पार्टी को बताया था कि वह कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन बाद में उन्हें दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के आवास पर देखा गया.
टीएमसी के लोकसभा में कुल 28 सांसद
सूत्रों के अनुसार, यदि सुदीप बंद्योपाध्याय भी असंतुष्ट गुट के साथ जाते हैं तो बागी सांसदों की संख्या बढ़कर 20 हो सकती है. टीएमसी के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं. असंतुष्ट गुट का दावा है कि उनके पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन है, जिससे वे सदन में अलग समूह के रूप में मान्यता की मांग कर सकते हैं. हालांकि पार्टी नेतृत्व इस दावे को स्वीकार नहीं कर रहा है.
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और कई विधायक भी असंतुष्ट गुट के संपर्क में हैं. विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर यह राजनीतिक संकट और गहरा गया है. फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से स्थिति को संभालने की कोशिशें जारी हैं, जबकि सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली संभावित बैठकों पर टिकी हुई हैं.
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