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डूबता जहाज, रेनकोट रिएक्शन और दोस्तों को खाने वाली डायन… महाराष्ट्र में 'महामर्जर' की चर्चा – AajTak

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पश्चिम के चुनावी नतीजे भारत की राजनीति पर चौतरफा असर डाल रहे हैं. इन नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस में टूट हो रही तो TMC के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं को भी हवा मिल रही है. लेकिन विलय की ये चर्चाएं सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं हैं. ये चर्चाएं महाराष्ट्र की राजनीति में भी हो रही हैं. 
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने गुरुवार को कहा कि NCP (SP) अध्यक्ष शरद पवार को उन छोटी पार्टियों को ‘ग्रैंड ओल्ड पार्टी’ (कांग्रेस) में वापस मिलाने की पहल करनी चाहिए, जो कांग्रेस से अलग होकर बनी थीं.
उन्होंने कहा कि ऐसे कई नेता हैं जो कांग्रेस और कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों का हिस्सा रहे हैं और वे आज भी उसी विचारधारा को मानते हैं. उन्होंने कहा कि अगर यह विचारधारा एक साथ आ जाती है, तो यह नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. पवार को इस बारे में पहल करनी चाहिए. 
मर्जर के ऑफर पर नाना पटोले का ग्रीन सिग्नल
बता दें कि NCP और TMC दोनों ही पार्टियां कांग्रेस से अलग होकर बनी हैं. संजय राउत ने बुधवार को भी कहा था कि कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले नेताओं को वापस कांग्रेस में लौटना चाहिए. 
संजय राउत ने विलय का शिगुफा छोड़ा तो इस पर प्रतिक्रिया आई महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता नाना पटोले की ओर से. 
TMC और NCP (SP) के विलय का काम चल रहा है
पूर्व महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष पटोले ने कहा कि ऐसी सोच बढ़ रही है जो TMC और NCP (SP) जैसी सेक्युलर पार्टियों के कांग्रेस में विलय के पक्ष में है, और राष्ट्रीय स्तर पर इस दिशा में प्रक्रिया शुरू हो गई है. 
उन्होंने यह भी दावा किया कि शरद पवार की पार्टी ने पहले कांग्रेस के साथ विलय का प्रस्ताव दिया था, लेकिन किसी वजह से यह हो नहीं पाया. 
जब नाना पटोले से NCP (SP) के कांग्रेस में संभावित विलय की चर्चाओं के बारे में पूछा गया, तो पटोले ने दावा किया कि शरद पवार की पार्टी की ओर से विलय का प्रस्ताव पहले ही दिया जा चुका था, लेकिन किसी वजह से इसमें देरी हो गई.
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि देश की राजनीति में जो हो रहा है, उससे देश का संवैधानिक ढांचा कमजोर हो रहा है. ऐसे समय में जब वोट बुरी तरह बंट रहे हैं. इसे रोकने और देश व उसके संविधान को बचाने के लिए, सेक्युलर सोच वाली सभी पार्टियों को एक साथ आना चाहिए. राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की प्रक्रिया अब शुरू हो गई है.”
पटोले ने कहा कि चाहे तृणमूल कांग्रेस हो या पवार साहब अब ऐसी सोच और नजरिया दिख रहा है कि उन्हें कांग्रेस के साथ आना चाहिए और उसमें विलय कर लेना चाहिए.
डूबती नाव की सवारी कौन करेगा?
कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) के साथ आने की खबरों पर राज्य के सीएम की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी. महाराष्ट्र सीएम और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस को ‘डूबता हुआ जहाज’ करार दिया कहा कि, “न तो यह पार्टी ऐसा कह रही है और न ही वह पार्टी. कोई तीसरा व्यक्ति ही इस बारे में बात कर रहा है. कोई समझदार व्यक्ति कांग्रेस जैसे डूबते हुए जहाज़ पर सवार नहीं होगा.”
फडणवीस ने कहा कि विपक्षी दलों के बीच किसी भी तरह के एकजुट होने से BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन को कोई चिंता नहीं होगी. उन्होंने कहा, “अगर वे एकजुट होते हैं, तो हमारे लिए और ज़्यादा राजनीतिक जगह बनेगी. इसलिए, हमें चिंता करने की कोई वजह नहीं है.”
‘डायन’ से बीजेपी की तुलना
कांग्रेस को ‘डूबता जहाज’ कहने पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बीजेपी पर तीखा पलटवार करते हुए उसकी तुलना एक ऐसी ‘डायन’ से की जो अपने ही सहयोगियों/दोस्तों को खत्म कर देती है. उन्होंने कहा कि बीजेपी की असल फितरत छोटे क्षेत्रीय सहयोगियों को निगल जाना और उनके राजनीतिक वूजद को पूरी तरह मिटा देना है. 
छाता लेना है या रेनकोट…
वहीं, एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने विलय के प्रस्तावों पर कूटनीतिक रुख अपनाया. एक रूपक का इस्तेमाल करते हुए सीधे जवाब देने से बचते हुए उन्होंने कहा कि छाता लेना है या रेनकोट, इसका फैसला वह बारिश शुरू होने के बाद ही करेंगी; हालांकि उन्होंने विपक्ष को मजबूत करने के लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के सुझावों का स्वागत किया. 
महाराष्ट्र में विलय की ये बातचीत बीजेपी के खिलाफ अपनी ताकत एकजुट करने की विपक्षी दलों की एक गहरी रणनीति को दर्शाती है. जहां कांग्रेस खुद को सत्ताधारी सरकार को चुनौती देने के लिए जरूरी मुख्य स्तंभ मानती है, वहीं क्षेत्रीय दल बीजेपी-विरोधी एकजुट मोर्चा बनाने की तत्काल जरूरत और अपनी पहचान बनाए रखने के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बना रहे हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति ने सुदूर पश्चिम भारत पर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. 
 
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IndiaPrime Hindi

Devender Singh is a senior journalist and media professional with over two decades of experience in television, digital, and Hindi-language journalism. He began his career with ETV Hindi in 2000 and has since served as Bureau Chief for several prominent news networks, including India News, Sahara Samay, and Bharat Express. Throughout his career, he has reported on several high-impact stories, including tribal starvation deaths, the Asaram case, the Jaipur serial bomb blasts, and numerous crime, political, and social issues that earned him recognition as a credible and influential journalist across India. Beyond television journalism, Devender Singh has contributed significantly to digital media transformation, Hindi journalism innovation, and AI-driven Hindi language initiatives. He has also served as a media and communication advisor to several prominent individuals, organizations, and institutions. Holding a postgraduate degree in Journalism along with a degree in Law, he continues to write and analyze issues related to governance, public policy, technology, politics, and social development, delivering insightful and fact-based content to readers.

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