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ऑपरेशन सिंदूर और अभ्यास: क्या मॉक ड्रिल मज़ाक है?

इंडिया प्राइम | जयपुर  | देवेन्द्र सिंह | 8 May 2025 | ऑपरेशन सिंदूर और अभ्यास |  भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल में देश के 244 जिलों में अभ्यास किया गया, जिसमें राजस्थान के 28 शहर समेत पाकिस्तान सीमा से सटे अन्य तीन राज्यों—जम्मू-कश्मीर, पंजाब, गुजरात में विशेष रूप से सघन अभ्यास किए गए। जिलों में मॉक ड्रिल नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 के तहत आयोजित किए जाते हैं, 7 मई को हुआ मॉक ड्रिल 1971 के बाद पहला ऐसा व्यापक अभ्यास था। इन ड्रिल्स के दौरान आदेशों का पालन करना अनिवार्य है। मॉक ड्रिल के अभ्यास से ज़मीन पर रोशनी बंद करने पर दुश्मन पायलट को नेविगेशन में कठिनाई होती है। उसे लक्ष्य (Target) की पहचान मुश्किल हो जाती है और टारगेटिंग सिस्टम को धोखा दिया जा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर और अभ्यास

आइए तकनिकी रुप से समझते है युद्द के समय दुश्मन देश के फाइटर प्लेन 30,000 से 40,000 फीट (9-12 किमी) की ऊँचाई पर उड़ रहा होता है उसे ज़मीन पर सर्चलाइट या मोबाइल टॉर्च, यदि ऊपर की ओर मोड़ी जाए, तो वे दुश्मन का ध्यान खींच सकती हैं। इसके अलावा बड़ी रोशनी या फ्लडलाइट्स 80-120 किमी दूर से दिख सकती हैं। शहरों की ओर से निकलने वाली रोशनी (urban light pollution) बादलों या धुंध के बिना साफ मौसम में पायलट को दूर से दिखाई देती है। आधुनिक लड़ाकू विमानों में थर्मल इमेजिंग और नाईट विज़न सिस्टम होते हैं, जो बहुत हल्की रोशनी या गर्मी (heat signatures) को भी पहचान सकते हैं। ऐसे में एक व्यक्ति की गलती कितने इलाके को नुकसान पहुचा सकती है इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है।

बम गिरने से कितने क्षेत्र में नुकसान हो सकता है?

  1. बम का प्रकार विस्फोट क्षमता (TNT समतुल्य) प्रभाव क्षेत्र स्रोत
    MK-82 (सामान्य बम) 227 किलोग्राम (500 पाउंड) ~200 मीटर तक GICHD
    JDAM (स्मार्ट बम) 900 किलोग्राम तक (2,000 पाउंड) ~500 मीटर तक AF.mil
    क्लस्टर बम (CBU-87) अनेक छोटे विस्फोटक (BLU-97) 500-1,000 मीटर Wikipedia
    परमाणु बम (10-20 किलोटन) 10,000-20,000 टन TNT समतुल्य कई किलोमीटर REMM

अगर हम भारत के पाकिस्तान और चीन के बीच हुए युद्धों में हुए नुकसान का सदर्भ ले तो पता लगता है कि दुश्मन देशों के विमानों द्वारा भारत में किए गए हमलों से कई बार जानमाल का नुकसान हुआ है। नीचे इन युद्धों में हुए हवाई हमलों की जानकारी और उससे हुए नुकसान का संक्षिप्त ऐतिहासिक विवरण दिया गया है:

युद्ध हवाई हमले नागरिक हताहत (अनुमान) सैन्य हताहत
1965 (पाक) हाँ दर्जनों ~3,000
1971 (पाक) हाँ ~200+ ~3,800
1962 (चीन) ~1,383
1999 (पाक) सीमित बहुत कम ~527 (भारतीय सैनिक)

स्रोत: Indo-Pakistani war of 1971 – Wikipedia  1971 India-Pakistan War | Britannica

ऑपरेशन सिंदूर और अभ्यास
ऑपरेशन सिंदूर और अभ्यास

इन आकड़ो को देखने के बाद मॉक ड्रिल का महत्व कितना मुहत्वपुर्ण है यह आप आसानी से लगा सकते है। यह अभ्यास युद्ध, आतंकी हमले, या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों के लिए नागरिकों और अधिकारियों को तैयार करने के लिए आयोजित किए जाते हैं। देश और दुनिया के आमजन इससे पहले भी कई बार मॉक ड्रिल से रुबरु हुई है । भूकंप, कोविड वैक्सीन ड्राइ रन आंतकी हमलों की मॉक ड्रिल अक्सर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन में देखते सुनते रहते है। इसके अलावा फायर ड्रिल भी कई बार स्थानीय निकाय स्कुलों,हॉस्पिटल में आयोजति करवाती रही है।

मॉक ड्रिल कितने प्रकार की होती है?

  1. फायर ड्रिल (Fire Drill): आग लगने की स्थिति में बचाव

  2. भूकंप मॉक ड्रिल: इमारतों से सुरक्षित बाहर निकलने का अभ्यास

  3. रासायनिक/परमाणु आपदा ड्रिल

  4. बम धमाका/आतंकी हमले की ड्रिल

  5. स्वास्थ्य ड्रिल (Pandemic Drill): जैसे कोविड वैक्सीन ड्राई रन

  6. साइबर सुरक्षा ड्रिल

  7. सैन्य युद्ध अभ्यास (War Simulations)

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मॉक ड्रिल आदेशों का पालन न करने के परिणाम

मॉक ड्रिल को नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 के तहत नागरिक सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करता है और आदेशों का पालन न करने के लिए दंड का प्रावधान करता है। धारा 11 विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए दंड निर्धारित करती है जो आदेशों का पालन करने में विफल रहते हैं। हाल ही में, 7 मई 2025 को भारत में 244 और इसका उल्लंघन करने वालों को नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 के तहत दंड का सामना करना पड़ सकता है नीचे मॉक ड्रिल आदेशों का पालन न करने के परिणामों को विभिन्न हैडिंग्स के तहत प्रस्तुत किया गया है, जैसा कि उपयोगकर्ता ने अनुरोध किया है। ये दंड दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित हैं: नागरिक सुरक्षा कॉर्प्स के सदस्यों के लिए और सामान्य जनता के लिए।

1. नागरिक सुरक्षा कॉर्प्स के सदस्यों द्वारा आदेशों का उल्लंघन

  • दंड: 500 रुपये तक का जुर्माना

  • अतिरिक्त दंड: पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए 50 रुपये का जुर्माना
    नागरिक सुरक्षा कॉर्प्स के सदस्य, जो मॉक ड्रिल के दौरान अपने कर्तव्यों को निभाने या आदेशों का पालन करने में विफल रहते हैं, उन्हें नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 की धारा 11(1) के तहत दंडित किया जा सकता है। यह दंड उन लोगों पर लागू होता है जो जानबूझकर आदेशों की अवहेलना करते हैं या अपने कार्यों को करने में लापरवाही बरतते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई कॉर्प्स सदस्य मॉक ड्रिल के दौरान निकासी प्रक्रिया में भाग नहीं लेता, तो उसे यह जुर्माना देना पड़ सकता है।

2. सामान्य जनता द्वारा आदेशों का उल्लंघन

  • दंड: 500 रुपये तक का जुर्माना

  • अतिरिक्त दंड: पहले दिन के बाद प्रत्येक दिन के लिए 50 रुपये का जुर्माना
    सामान्य जनता, जिसमें नागरिक, छात्र, और स्वयंसेवक शामिल हैं, को मॉक ड्रिल के दौरान दिए गए आदेशों या निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 की धारा 11(2) के तहत, यदि कोई व्यक्ति इन आदेशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे 500 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। यदि उल्लंघन पहले दिन के बाद भी जारी रहता है, तो प्रत्येक अतिरिक्त दिन के लिए 50 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई नागरिक हवाई सायरन के बाद आश्रय लेने से इनकार करता है, तो उसे यह दंड भुगतना पड़ सकता है।

दंड की प्रकृति

दंड की प्रकृति को निम्नलिखित तालिका में संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है:

श्रेणी

प्रारंभिक जुर्माना

अतिरिक्त जुर्माना (प्रति दिन)

नागरिक सुरक्षा कॉर्प्स के सदस्य

500 रुपये तक

50 रुपये

सामान्य जनता

500 रुपये तक

50 रुपये

दंड लागू करने की प्रक्रिया

  • कानूनी प्रक्रिया: दंड लागू करने की प्रक्रिया स्थानीय अधिकारियों, जैसे जिला मजिस्ट्रेट या नागरिक सुरक्षा अधिकारियों, द्वारा संचालित की जाती है। उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर, जुर्माना तुरंत लागू किया जा सकता है।

  • जागरूकता की कमी: कई नागरिकों को इन दंडों के बारे में जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वे अनजाने में आदेशों का उल्लंघन कर सकते हैं। इसलिए, मॉक ड्रिल से पहले सार्वजनिक जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण हैं।

  • अन्य संभावित परिणाम हालांकि नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 में केवल जुर्माने का उल्लेख है, कुछ अन्य परिणाम भी हो सकते हैं, जो स्थानीय प्रशासन के विवेक पर निर्भर करते हैं:
  • चेतावनी या नोटिस: छोटे उल्लंघनों के लिए, अधिकारियों द्वारा मौखिक या लिखित चेतावनी दी जा सकती है।

  • सामाजिक प्रभाव: आदेशों का पालन न करने से सामुदायिक स्तर पर आलोचना हो सकती है, क्योंकि यह दूसरों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

  • प्रशासनिक कार्रवाई: बार-बार उल्लंघन करने वालों को भविष्य के ड्रिल्स में भाग लेने से रोका जा सकता है, हालांकि यह कानून में स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं है।

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देशभर में मॉक ड्रिल के उल्लघन पर की गई कारवाही

1. प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): अफवाह फैलाने पर एफआईआर दर्ज

कुंभ मेला क्षेत्र में आयोजित अग्निशमन मॉक ड्रिल के एक वीडियो को कुछ लोगों ने वास्तविक घटना बताकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिससे अफवाह फैल गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, उत्तर प्रदेश पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो मॉक ड्रिल का था और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

2. धुले (महाराष्ट्र): मॉक ड्रिल के दौरान पुलिसकर्मी पर हमला

धुले के स्वामीनारायण मंदिर में आतंकवादी हमले की मॉक ड्रिल के दौरान, एक श्रद्धालु ने नकली आतंकवादी की भूमिका निभा रहे पुलिसकर्मी को वास्तविक समझकर थप्पड़ मार दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। हालांकि, इस मामले में किसी कानूनी कार्रवाई की सूचना नहीं है।

3. सूरत (गुजरात): मॉक ड्रिल में गोली चलने की घटना

फरवरी 2025 में सूरत में आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) ने गलती से एटीएस पुलिस इंस्पेक्टर को गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद, पांच वकीलों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इस घटना की विस्तृत जानकारी मांगी है।

4. जालंधर (पंजाब): मॉक ड्रिल के दौरान चालान जारी

जालंधर में चुनाव तैयारियों की जांच के लिए आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान, पुलिस ने वाहनों की गहन जांच की और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान जारी किए। यह कार्रवाई मॉक ड्रिल के हिस्से के रूप में की गई थी।

मॉक ड्रिल के नियमों का पालन न करना सिर्फ कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है। सरकारी कार्रवाइयों के बावजूद, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी ही सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। एआई के युग में मॉक ड्रिल का महत्व बना रहता है, क्योंकि यह प्रशिक्षण को बेहतर और लागत-प्रभावी बनाता है। हालांकि, विश्वास, नैतिकता, और प्रशिक्षण से संबंधित चुनौतियों को संबोधित करना आवश्यक है ताकि ये अभ्यास पूरी तरह प्रभावी हो सकें।

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Devender Singh is a senior journalist and media professional with over two decades of experience in television, digital, and Hindi-language journalism. He began his career with ETV Hindi in 2000 and has since served as Bureau Chief for several prominent news networks, including India News, Sahara Samay, and Bharat Express. Throughout his career, he has reported on several high-impact stories, including tribal starvation deaths, the Asaram case, the Jaipur serial bomb blasts, and numerous crime, political, and social issues that earned him recognition as a credible and influential journalist across India. Beyond television journalism, Devender Singh has contributed significantly to digital media transformation, Hindi journalism innovation, and AI-driven Hindi language initiatives. He has also served as a media and communication advisor to several prominent individuals, organizations, and institutions. Holding a postgraduate degree in Journalism along with a degree in Law, he continues to write and analyze issues related to governance, public policy, technology, politics, and social development, delivering insightful and fact-based content to readers.