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Tree House School विवाद: प्राइवेट स्कूलों की रेगुलेशन व्यवस्था पर बड़े सवाल

Tejasvi Singh Jaipur Indiaprime Desk जयपुर के श्याम नगर में स्थित ट्री हाउस हाई स्कूल Tree House High School का अचानक बंद होना सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि यह प्राइवेट स्कूल रेगुलेशन की बड़ी कमी को उजागर करता है। बिना नोटिस स्कूल बंद करना सीधे तौर पर बच्चों के शिक्षा अधिकार और उपभोक्ता अधिकार दोनों का उल्लंघन है। स्कूल प्रबंधन द्वारा अचानक स्कूल बंद करने के फैसले ने सैकड़ों अभिभावकों और लगभग 180-200 बच्चों के भविष्य को संकट में डाल दिया है।

Tree House High School मुख्य घटनाक्रम (अप्रैल 2026)

परिजनों ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि स्कूल ह्वाट्सऐप ग्रुप में स्कूल प्रशासन की ओर से मीटिंग के तौर पर बुलाया गया था. सुबह जब बच्चे और परिजन स्कूल पहुंचे तो स्कूल के गेट पर ताला लटका मिला. यह नजारा देख अभिभावकों ने स्कूल के बाहर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया।
अचानक तालाबंदी: स्कूल प्रबंधन ने रातों-रात मुख्य द्वार पर स्कूल बंद करने का नोटिस चस्पा कर दिया और संचालक मौके से गायब हो गए।
फीस और किताबों का मामला: अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने पूरे साल की फीस और हजारों रुपये की किताबें-कॉपियां बेचने के बाद बिना किसी पूर्व सूचना के स्कूल बंद कर दिया।अभिभावकों का विरोध: स्कूल बंद होने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा किया और प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप लगाए।

वर्तमान स्थिति और समाधान
फीस रिफंड और टीसी: परिजनो के विरोध के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से सरकारी कमेटी बनाकर स्कूल प्रबंधन से बच्चों की फीस वापस करने और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) देने की प्रक्रिया के साथ साथ स्कूल बंद होने की स्थिति में नौकरी से निकाले टीचर्स की तीन महीने की सैलरी, आईटीई में पढ़ रहे बच्चों को पास के स्कूल में ट्रास्फर करने जैसी जरुरी प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन सवाल ये है कि शिक्षा को व्यापार समझ कर अचानक बंद करने वाले ऐसे स्कूल प्रबंधको और मुम्बई स्थित Tree House High School) प्रबंधन के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए।

Tree House High School बंद होने के कारण

सरकारी आदेश के बाद स्कूल विजिट करने गई शिक्षा विभाग की समिति से मिली जानकारी के अनुसार, यह स्कूल Vinay Chordia की जमीन पर संचालित किया जा रहा था, जबकि इसका संचालन Rajeev Bhatia के पास था।सूत्रों के मुताबिक, जमीन मालिक और स्कूल संचालक के बीच लंबे समय से बिल्डिंग किराए को लेकर विवाद चल रहा था। यह मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।बताया जा रहा है कि Rajeev Bhatia के खिलाफ जमीन से जुड़े कुछ अन्य कानूनी मामले भी पहले से लंबित हैं। इसी बीच, हाल ही में स्कूल को एक कानूनी नोटिस भी प्राप्त हुआ था, जिसे स्कूल की अचानक तालाबंदी का मुख्य कारण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किराया विवाद और कानूनी दबाव के चलते स्कूल प्रबंधन ने बिना पूर्व सूचना के यह कदम उठाया, जिससे सैकड़ों छात्रों और अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में स्कूलों के अचानक बंद होने या विवादों में घिरने के कई मामले सामने आ चुके हैं, जो प्राइवेट स्कूल सिस्टम में कमजोर रेगुलेशन और निगरानी की कमी को उजागर करते हैं।

गुरुग्राम में Ryan International School का मामला हो या अलग-अलग शहरों में Delhi Public School और Amity International School से जुड़े विवाद, कई जगह सुरक्षा चूक, फीस विवाद, मैनेजमेंट झगड़े और कानूनी मुद्दों के कारण स्कूलों का संचालन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, कई राज्यों में छोटे प्राइवेट स्कूल मान्यता रद्द होने, किराया विवाद या आर्थिक समस्याओं के चलते अचानक बंद हो जाते हैं।

इन सभी मामलों में एक समान पैटर्न देखने को मिलता है, जिसमें कानूनी विवाद, वित्तीय अनियमितताएं, लाइसेंस संबंधी समस्याएं और प्रशासनिक निगरानी की कमी शामिल हैं। ऐसे हालात में सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों और अभिभावकों को उठाना पड़ता है, जिससे यह साफ होता है कि प्राइवेट स्कूलों के लिए सख्त नियम और बेहतर निगरानी व्यवस्था की सख्त जरूरत है।

ऐसी स्थिति से बचने के लिए (Prevention Tips)

Parents के लिए स्कूल की:
Affiliation check करें (CBSE/State Board)
Past reputation देखें
Full-year fees advance देने से बचें

Government के लिए

Private schools का Financial audit
Emergency fund requirement

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