भारत-यूके FTA 2026 : ब्रिटेन से 15 वर्षों में 3.78 लाख कारें आएंगी भारत, आयात पर टैक्स दरें होंगी कम, जानिए किसे होगा फायदा और किसे नुकसान
लेखक: Devender Singh | indiaprimetv.com Biz Updates: ब्रिटेन से 15 वर्षों में 3.78 लाख कारें आएंगी भारत, आयात पर टैक्स दरें होंगी कम भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement-CETA) भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इस समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में ब्रिटेन में बनी 3.78 लाख कारों को भारत में रियायती आयात शुल्क पर लाने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही कई श्रेणियों में आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत तक आ जाएगा।
हालांकि यह छूट सभी कारों पर नहीं मिलेगी। सरकार ने घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए कोटा प्रणाली लागू की है, जिसके तहत तय संख्या से अधिक आयात पर सामान्य शुल्क ही लागू रहेगा।
भारत में कौन-कौन सी ब्रिटिश कार कंपनियां होंगी शामिल?
इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ ब्रिटेन में निर्मित प्रीमियम और लग्जरी कार कंपनियों को मिलेगा। इनमें प्रमुख नाम हैं:
- Jaguar Land Rover
- Rolls-Royce Motor Cars
- Bentley Motors
- Aston Martin
- McLaren Automotive
- MINI
विशेषज्ञों के अनुसार, इन कंपनियों की कई गाड़ियां भारत में पहले भी आयात होती थीं, लेकिन ऊंचे आयात शुल्क के कारण उनकी कीमतें काफी अधिक थीं। अब इनमें लाखों रुपये तक की कमी देखने को मिल सकती है। हाल ही में कुछ प्रीमियम मॉडलों की कीमतों में 75 लाख रुपये तक की कटौती देखने को मिली है।
आयात शुल्क में कितना बदलाव होगा?
वर्तमान में पूरी तरह से आयात की जाने वाली कई लग्जरी कारों पर 100 से 110 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगाया जाता है। नए समझौते के तहत यह शुल्क चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
समझौते के तहत:
- पहले वर्ष में सीमित संख्या में लगभग 20,000 वाहन रियायती शुल्क पर आयात किए जा सकेंगे।
- पांचवें वर्ष तक यह संख्या बढ़कर 37,000 वार्षिक हो सकती है।
- पूरे 15 वर्षों में कुल 3.78 लाख वाहनों को रियायती शुल्क का लाभ मिलेगा।
भारतीय कार कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
भारतीय ऑटो उद्योग लंबे समय से ऊंचे आयात शुल्क के कारण संरक्षित रहा है। इस समझौते से सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में बढ़ेगी।
संभावित असर:
- घरेलू कंपनियों को गुणवत्ता और तकनीक में निवेश बढ़ाना होगा।
- लग्जरी सेगमेंट में कीमतों का दबाव बढ़ेगा।
- प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहनों की प्रतिस्पर्धा तेज होगी।
- ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलेंगे।
हालांकि बड़े पैमाने पर असर की आशंका कम है क्योंकि भारत का अधिकांश ऑटो बाजार 10 लाख से 25 लाख रुपये के बीच की कारों पर आधारित है, जबकि ब्रिटिश कारें मुख्य रूप से प्रीमियम और लग्जरी श्रेणी में आती हैं।
इन भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है:
- Tata Motors (विशेष रूप से प्रीमियम ईवी और एसयूवी सेगमेंट)
- Mahindra & Mahindra
- Maruti Suzuki (प्रीमियम श्रेणी में सीमित प्रभाव)
ध्यान देने वाली बात यह है कि टाटा मोटर्स खुद जगुआर लैंड रोवर की मालिक है, इसलिए उसे इस समझौते से दोहरा लाभ भी मिल सकता है।
भारत को बदले में क्या मिला?
कारों पर शुल्क कम करना इस समझौते का सिर्फ एक हिस्सा है। इसके बदले भारत को ब्रिटेन के बाजार में बड़ा निर्यात अवसर मिला है।
समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन में शून्य या बेहद कम शुल्क पर प्रवेश मिलेगा।
इन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा:
- वस्त्र एवं परिधान उद्योग
- फार्मास्यूटिकल्स
- इंजीनियरिंग उत्पाद
- ऑटो कंपोनेंट्स
- रत्न एवं आभूषण
- चमड़ा और फुटवियर
- समुद्री उत्पाद
- मसाले, चाय और कॉफी
विशेष रूप से भारतीय परिधान उद्योग को ब्रिटेन के बाजार में बांग्लादेश और कंबोडिया जैसी प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के बराबर अवसर मिलेगा।
अन्य उद्योगों पर क्या होगा असर?
जिन क्षेत्रों को फायदा होगा:
- ऑटो कंपोनेंट उद्योग
- आईटी और प्रोफेशनल सेवाएं
- फार्मा उद्योग
- टेक्सटाइल उद्योग
- इंजीनियरिंग सामान
जिन क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी:
- लग्जरी कार बाजार
- प्रीमियम अल्कोहल उद्योग
- चिकित्सा उपकरण
- कॉस्मेटिक्स और प्रीमियम उपभोक्ता उत्पाद
ब्रिटिश व्हिस्की और जिन पर शुल्क भी चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा।
भारत के निर्यात और आयात पर कितना असर पड़ेगा?
भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार में अरबों डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।
प्रमुख आंकड़े:
- 15 वर्षों में 3.78 लाख ब्रिटिश कारों का आयात
- कार आयात शुल्क 110% से घटकर 10%
- भारत के 99% निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन में शुल्क राहत
- भारत के 85% स्टील निर्यात को ब्रिटिश प्रतिबंधों से सुरक्षा मिली।
क्या भारतीय उपभोक्ताओं को फायदा होगा?
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा।
- लग्जरी कारें सस्ती होंगी।
- विकल्प बढ़ेंगे।
- नई तकनीक और सुरक्षा सुविधाएं तेजी से उपलब्ध होंगी।
- प्रीमियम ईवी बाजार को गति मिलेगी।
हालांकि आम उपभोक्ताओं के लिए सस्ती हैचबैक और एंट्री-लेवल कारों की कीमतों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वे इस समझौते के दायरे में नहीं हैं।
निष्कर्ष
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता केवल कारों को सस्ता करने का समझौता नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। सरकार ने एक तरफ घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए कोटा और चरणबद्ध शुल्क कटौती की व्यवस्था की है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन का बड़ा बाजार खोल दिया है।
आने वाले वर्षों में यह समझौता भारतीय ऑटो उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, निर्यात बढ़ाने और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा सकता है।
