150 पाकिस्तानी दुल्हनें आखिर क्यों अलग अलग रास्तों से पहुंची भारत
इंडिया प्राइम टीवी बाड़मेर । भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कारण पिछले डेढ़ साल से अधर में लटकी शादियों को आखिरकार नई उम्मीद मिल गई है, क्योंकि 150 पाकिस्तानी दुल्हनें सुरक्षित भारत पहुंच चुकी हैं। इन युवतियों और उनके परिवारों के वीजा आवेदन दोनों देशों के बीच उपजे कूटनीतिक गतिरोध के चलते ठंडे बस्ते में चले गए थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा विशेष मानवीय आधार पर दी गई मंजूरी के बाद, इन दुल्हनों ने तीसरे देशों के हवाई मार्गों का सहारा लेकर भारत की धरती पर कदम रखा है, जिससे दोनों तरफ के परिवारों में खुशी का माहौल है।
‘ऑपरेशन सिंदूर‘ और जमीनी सीमा का पूरी तरह सील होना
इस वैवाहिक संकट की शुरुआत मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकवादी हमले के बाद हुई थी, जिसमें 26 भारतीय नागरिकों की जान चली गई थी। इस कायराना हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने सीमा पार सक्रिय आतंकी ठिकानों के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया। इस अभियान के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर पहुंच गया, जिसके परिणामस्वरूप भारत सरकार ने पंजाब की वाघा-अटारी जमीनी सीमा को अनिश्चित काल के लिए पूरी तरह सील कर दिया और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए नियमित वीजा सेवाओं को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया। सीमाएं बंद होने से उन पाकिस्तानी युवतियों की शादियां रुक गईं, जिनकी सगाई भारत के पुरुषों से हो चुकी थी।
‘शदाणी दरबार’ की मध्यस्थता और मानवीय प्रयास
इन शादियों को दोबारा मुमकिन बनाने में ‘शदाणी दरबार’ ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो रायपुर (छत्तीसगढ़) और घोटकी (सिंध, पाकिस्तान) में स्थित सिंधी समुदाय का एक बेहद पूजनीय वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र है। सरहद के दोनों तरफ बिखरे परिवारों की बेबसी को देखते हुए, शदाणी दरबार के नौवें पीठाधीश्वर संत युधिष्ठिरलाल शदाणी और सिंधी प्रवासियों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर उन युवतियों की एक सूची तैयार की, जिनकी शादियां भारत में तय हो चुकी थीं। इस विस्तृत दस्तावेज को केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के समक्ष प्रस्तुत किया गया और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना केवल मानवीय और सहानुभूति के आधार पर इन दुल्हनों को विशेष वीजा देने की गुहार लगाई गई।
सख्त सुरक्षा शर्तें और तीसरे देशों के जरिए हवाई यात्रा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सिंधी समाज की इस भावुक अपील को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक सख्त शर्त (Air-Travel-Only Mandate) रखी। इस शर्त के तहत किसी भी यात्री को वाघा बॉर्डर जैसे जमीनी रास्तों से भारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई और केवल हवाई मार्ग से आने को कहा गया। चूंकि भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे कमर्शियल विमानों की आवाजाही पर कड़ा प्रतिबंध है, इसलिए इन 150 दुल्हनों और उनके साथ आए करीब 450 रिश्तेदारों को बहुत लंबा और खर्चीला रास्ता अपनाना पड़ा। इन परिवारों ने पहले पाकिस्तान से दुबई, मस्कट (ओमान), कोलंबो (श्रीलंका) या ढाका (बांग्लादेश) जैसे न्यूट्रल (तटस्थ) देशों के लिए उड़ान भरी और फिर वहां से कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेकर भारत के अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पहुंचे।
भारत के प्रमुख शहरों में गूंजेगी शहनाई, सैकड़ों लड़कियां अब भी कतार में
इन पाकिस्तानी दुल्हनों के भारत आगमन के साथ ही देश के कई राज्यों में विवाह उत्सव की तैयारियां बेहद सादगीपूर्ण और पारंपरिक तरीके से शुरू हो गई हैं। इनमें से अधिकांश दुल्हनों की शादियां भारत के सिंधी सांस्कृतिक गढ़ माने जाने वाले शहरों जैसे नागपुर, रायपुर, जोधपुर और पुणे में रहने वाले युवकों से हो रही हैं, जिसमें अकेले नागपुर शहर में 15 ऐसी शादियां शामिल हैं। हालांकि, सामाजिक संस्थाओं के अनुसार यह मिशन अभी आधा ही पूरा हुआ है; पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ऐसी लगभग 300 और युवतियां मौजूद हैं, जिनकी शादियां भारत में तय हैं और वे भी इसी तरह की विशेष मानवीय वीजा मंजूरी मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं ताकि वे अपने होने वाले जीवनसाथी से मिल सकें।







