कोटा में आवारा कुत्तों का आतंक: 5 साल की नमरा पर हमला, लगातार घटनाओं से लोगों में आक्रोश
इंडिया प्राइम टीवी कोटा, राजस्थान। कोटा के छावनी इलाके की बंगाली कॉलोनी में 5 साल की बच्ची पर आवारा कुत्ते के हमले ने शहर में एक बार फिर stray dog menace को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 22 अगस्त 2026 की शाम करीब 7:15 बजे हुई इस घटना का CCTV फुटेज 23 अगस्त को सामने आया।
फुटेज में कुत्ता बच्ची को सड़क पर गिराकर घसीटता और काटता दिखाई दे रहा है। आसपास के लोगों के पहुंचने के बाद बच्ची को बचाया गया।बच्ची की पहचान नमरा के रूप में हुई है। रिपोर्टों के अनुसार उसके सिर, पीठ और हाथों पर गंभीर चोटें आई हैं और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
कोटा में आवारा कुत्तों का आतंक
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घटना के CCTV वीडियो में दिखाई देता है कि बच्ची घर के बाहर गली में खेल रही थी। तभी एक आवारा कुत्ता अचानक उसकी ओर दौड़ता है और उसे जमीन पर गिराकर घसीटने लगता है।
बच्ची की चीख सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और कुत्ते को भगाकर उसकी जान बचाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में इससे पहले भी कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
नगर निगम ने बताया—बांदा धरमपुरा में बन रहा डॉग शेल्टर
घटना के बाद कोटा नगर निगम ने आवारा और आक्रामक कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी दी है।
नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा के अनुसार, शहर में Animal Birth Control यानी ABC कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत पकड़े गए आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ा जाता है, जबकि आक्रामक कुत्तों के लिए बांदा धरमपुरा क्षेत्र में एक स्थायी डॉग शेल्टर बनाया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक इस शेल्टर की क्षमता करीब 600 से 700 कुत्तों की होगी।
नगर निगम के अनुसार यह सुविधा आक्रामक और लोगों के लिए खतरा पैदा करने वाले कुत्तों को स्थायी रूप से रखने में मदद करेगी।
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एक महीने पहले रामपुरा में 18 महीने की बच्ची पर हमला
कोटा में नमरा पर हुए हमले ने पिछले कुछ समय में सामने आई ऐसी घटनाओं की याद फिर ताजा कर दी है।
24 जुलाई 2026 को रामपुरा इलाके में एक छोटी बच्ची पर आवारा कुत्तों के हमले की बात स्थानीय स्तर पर सामने आई थी। हालांकि, इस विशेष घटना के बारे में हमें अभी स्वतंत्र और पर्याप्त विश्वसनीय ऑनलाइन स्रोत नहीं मिला है। इसलिए इसके विवरण को प्रकाशित करते समय स्थानीय पुलिस, अस्पताल या प्रशासनिक रिकॉर्ड से पुष्टि करना जरूरी होगा।
बूंदी में रिंकू भील की मौत ने भी उठाए थे गंभीर सवाल
कोटा संभाग में आवारा कुत्तों के हमले का सबसे दर्दनाक मामला मई 2026 में बूंदी जिले के अलकोदिया गांव से सामने आया था।
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 9 वर्षीय रिंकू भील पर खेतों की ओर जाते समय आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला किया था। बच्ची की मौत हो गई थी। घटना के बाद लोकसभा अध्यक्ष और कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना जताई और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही थी।
सवाल: आखिर कब खत्म होगा आवारा कुत्तों का आतंक?
कोटा की ताजा घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आवारा कुत्तों की आबादी और आक्रामक कुत्तों से लोगों की सुरक्षा के लिए नगर निगम की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
सरकार के मौजूदा नियमों के तहत आवारा कुत्तों के प्रबंधन में Animal Birth Control Rules, 2023 महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन नियमों के तहत स्थानीय निकायों द्वारा नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी 2025 में आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों में स्थानीय निकायों को नसबंदी, टीकाकरण और आक्रामक/रेबीज संदिग्ध कुत्तों के संबंध में विशेष दिशा-निर्देश दिए थे।
Animal Welfare Board of India ने भी जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और Animal Birth Control Rules, 2023 के सख्ती से पालन की सलाह जारी की है।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने में प्रशासन के सामने एक तरफ आम लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ पशु कल्याण से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन करना भी जरूरी है।
ऐसे में बांदा धरमपुरा का प्रस्तावित डॉग शेल्टर कितना प्रभावी साबित होता है और आक्रामक कुत्तों की पहचान, नसबंदी, टीकाकरण तथा निगरानी की व्यवस्था कितनी मजबूत होती है—यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।







