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Monsoon 2026: अल नीनो की आहट के बीच कैसा रहेगा मानसून, किस राज्य में कब पहुंचेगी बारिश और महंगाई पर क्या होगा असर? indiaprimetv.com

Monsoon 2026: How El Niño Could Shape India's Rainfall, Agriculture and Food Prices

तेजस्वी सिंह | इंडियाप्राइम टीवी भारत में मानसून सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। देश की करीब आधी कृषि भूमि आज भी बारिश पर निर्भर है और खाद्य कीमतों से लेकर ग्रामीण रोजगार, बिजली उत्पादन और जीडीपी तक पर मानसून का सीधा असर पड़ता है।

इस बार 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून कई मायनों में अलग और चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून से सितंबर के बीच मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस वर्ष देश में कुल मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90-92 प्रतिशत रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो (El Niño) परिस्थितियां मानसून की रफ्तार और तीव्रता को प्रभावित कर सकती हैं।

अल नीनो क्या है और भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

अल नीनो एक मौसमी घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण पर पड़ता है, जिससे भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर हो सकती हैं।

इतिहास बताता है कि 2002, 2009 और 2015 जैसे कई कमजोर मानसून वाले वर्षों में अल नीनो की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल अल नीनो के आधार पर पूरे मानसून का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD), अरब सागर का तापमान और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दबाव क्षेत्र भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अभी तक कैसा रहा मानसून का सफर?

जून 2026 के पहले पखवाड़े में मानसून की रफ्तार अपेक्षा से धीमी रही है। महाराष्ट्र, मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

मुंबई में जून के शुरुआती दिनों में पिछले 12 वर्षों का सबसे कम वर्षा स्तर दर्ज किया गया, जबकि विदर्भ क्षेत्र में 70 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी देखी गई।

किस राज्य में कब पहुंचेगा मानसून?

मौजूदा मौसम पैटर्न और IMD के अनुमानों के आधार पर अगले कुछ दिनों में मानसून की संभावित प्रगति इस प्रकार रह सकती है:

20-25 जून

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश
  • बिहार के शेष हिस्से
  • झारखंड
  • पश्चिम बंगाल के उत्तरी क्षेत्र
  • मध्य प्रदेश के पूर्वी जिले

25-30 जून

  • दिल्ली-एनसीआर
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • राजस्थान का पूर्वी हिस्सा
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश

जून के अंत तक

  • राजस्थान के पश्चिमी जिले
  • जम्मू-कश्मीर के मैदानी क्षेत्र
  • हिमाचल प्रदेश
  • उत्तराखंड

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बंगाल की खाड़ी में मजबूत निम्न दबाव क्षेत्र बनता है, तो मानसून की गति तेज हो सकती है।

किन राज्यों में कम बारिश का खतरा?

IMD के मौसमी पूर्वानुमान के अनुसार इन क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है:

  • महाराष्ट्र के आंतरिक हिस्से
  • गुजरात
  • मध्य प्रदेश
  • कर्नाटक के कुछ भाग
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश के आंतरिक क्षेत्र
  • राजस्थान
  • उत्तर-पश्चिम भारत

वहीं पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है।

कृषि पर क्या होगा असर?

भारत की लगभग 52 प्रतिशत कृषि भूमि वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में कमजोर मानसून का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है।

सबसे अधिक प्रभावित होने वाली फसलें

  • धान
  • दालें
  • तिलहन
  • मक्का
  • कपास
  • गन्ना

यदि जून और जुलाई में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो किसानों को बुवाई टालनी पड़ सकती है।

विशेष रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और कर्नाटक के वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

हालांकि जिन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं बेहतर हैं, वहां जोखिम अपेक्षाकृत कम रहेगा।

महंगाई पर क्या पड़ेगा असर?

मानसून कमजोर रहने का सीधा असर खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इन वस्तुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है:

  • दालें
  • खाद्य तेल
  • सब्जियां
  • फल
  • दूध
  • चीनी

कम बारिश के कारण पशुओं के चारे की लागत बढ़ने से डेयरी उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।

यदि जलाशयों में पानी का स्तर कम रहता है, तो बिजली उत्पादन और सिंचाई लागत बढ़ने की आशंका भी रहेगी।

इसका असर ग्रामीण आय और उपभोक्ता खर्च पर पड़ सकता है।

क्या पानी का संकट बढ़ेगा?

कमजोर मानसून का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा।

मुंबई समेत कई बड़े शहरों में जलाशयों का जलस्तर सामान्य से कम है। जून में कम बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में पहले से ही पानी की कटौती शुरू हो चुकी है।

यदि जुलाई में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो कई राज्यों में जल संकट गहरा सकता है।

क्या पूरी तरह कमजोर रहेगा मानसून?

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जून की धीमी शुरुआत का मतलब यह नहीं है कि पूरा मानसून कमजोर ही रहेगा।

भारत में जुलाई और अगस्त मानसून के सबसे महत्वपूर्ण महीने माने जाते हैं। कई बार शुरुआती कमी बाद के महीनों में पूरी हो जाती है।

इसके अलावा हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की सकारात्मक स्थिति अल नीनो के प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकती है।

इसलिए किसानों और आम लोगों को घबराने के बजाय मौसम विभाग के नियमित अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

सरकार और किसानों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों की सलाह है कि:

  • किसान कम अवधि वाली फसलों का चयन करें।
  • जल संरक्षण तकनीकों को अपनाएं।
  • माइक्रो इरिगेशन और ड्रिप सिंचाई का उपयोग बढ़ाएं।
  • राज्य सरकारें बीज और उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
  • जलाशयों और भूजल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए।

निष्कर्ष

मानसून 2026 भारत के लिए चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया है। अल नीनो की वजह से बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका जरूर है, लेकिन मौसम की स्थिति अभी भी बदल सकती है।

अगले 30 से 45 दिन खरीफ फसलों, खाद्य महंगाई और जल संसाधनों के लिए निर्णायक साबित होंगे।

देश की अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और आम लोगों की रसोई—तीनों की नजर अब आसमान पर टिकी है।

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