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AI Healthcare : स्वास्थ्य क्षेत्र में आ रही है एक नई क्रांति

 देवेन्द्र सिंह इंडिया प्राइम जयपुर AI Healthcare : स्वास्थ्य क्षेत्र में आ रही है एक नई क्रांति से वैश्विक स्वास्थ्य सेवा का चेहरा बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल भविष्य की बात नहीं है, बल्कि आज की हकीकत बन चुका है। यह डॉक्टरों की क्षमता को बढ़ा रहा है और मरीजों के इलाज को बेहतर बना रहा है।
 वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में AI का योगदान
  • बाजार में बड़ा उछाल: दुनिया भर में हेल्थकेयर AI का बाजार आने वाले समय में अरबों डॉलर का होने वाला है।
  • सटीक जांच (Diagnosis): AI कंप्यूटर सिस्टम की मदद से एक्स-रे (X-ray) और एमआरआई (MRI) जैसी मेडिकल तस्वीरों को इंसानों से भी तेजी से स्कैन कर सकता है। इससे कैंसर और आंखों की बीमारियों का शुरुआती दौर में ही पता चल जाता है।
  • पर्सनलाइज्ड दवाइयां: AI मरीज के जीन (Genes) की जांच करके उसके शरीर के हिसाब से सटीक दवा तय करता है। इससे नई दवाइयों को खोजने का समय और खर्च दोनों कम हो गए हैं।
  • AI Healthcare भारत में AI का बढ़ता इस्तेमाल

भारत जैसे विशाल देश में, जहां डॉक्टरों की कमी है, AI एक वरदान साबित हो रहा है:
    1. गांवों तक पहुंच: भारत के ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञों की कमी है। AI-संचालित टेलीमेडिसिन के जरिए दूर-दराज के गांवों के लोग भी बड़े डॉक्टरों से सलाह ले पा रहे हैं।
    2. गंभीर बीमारियों से लड़ाई: भारतीय डॉक्टर टीबी (Tuberculosis) की पहचान के लिए चेस्ट एक्स-रे और डायबिटीज से होने वाले अंधेपन को रोकने के लिए रेटिना स्कैन में AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
    3. सरकारी योजनाएं: भारत सरकार “AI for All” जैसी योजनाओं के जरिए इस तकनीक को बढ़ावा दे रही है, ताकि आम जनता को सस्ता और अच्छा इलाज मिल सके।

 आम जनता को मिलने वाले मुख्य फायदे
    • सस्ता इलाज: अस्पतालों में कागजी काम ऑटोमेटिक होने से खर्च घटता है, जिससे मरीजों का बिल भी कम होता है।
    • सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता: AI भारत की आयुष्मान भारत (PM-JAY) जैसी बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में डेटा की जांच करता है, जिससे धोखाधड़ी (Fraud) को रोका जा सके।

भारतीय अस्पतालों में एआई की सफलता (Success Rates)

भारत के अस्पतालों में एआई का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है:
    • तपेदिक (TB) की पहचान: गांवों और छोटे कस्बों में छाती के एक्स-रे स्कैन से टीबी का पता लगाने में एआई तकनीक काफी सफल साबित हुई है। इससे डॉक्टरों की कमी वाले क्षेत्रों में भी समय पर इलाज संभव हो सका है।
    • अंधापन रोकने में कामयाबी: MadhuNetrAI जैसे एआई प्रोग्राम की मदद से ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी’ (मधुमेह से होने वाला अंधापन) की जांच आसानी से की जा रही है। भारत में इस कम्युनिटी स्क्रीनिंग प्रोग्राम के जरिए 7,100 से अधिक मरीजों को सीधे फायदा पहुंचा है।
    • आईवीएफ (IVF) में सटीकता: लैब में भ्रूण की सही पहचान करने के लिए एआई का इस्तेमाल हो रहा है, जिसका सक्सेस रेट कई क्लीनिकों में 93% तक दर्ज किया गया है 

 मान्यता प्राप्त मेडिकल ऐप्स (CDSCO Approved Apps)
भारत में मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए, केवल CDSCO द्वारा पास किए गए मेडिकल एआई ऐप्स का ही इस्तेमाल किया जाता है:
    • Qure.ai: यह ऐप फेफड़ों की बीमारी और ब्रेन स्ट्रोक की पहचान करने के लिए एक्स-रे और सीटी स्कैन को कुछ ही मिनटों में जांच लेता है。
    • Niramai: यह बिना छुए और बिना दर्द के थर्मल इमेजिंग तकनीक से ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती जांच करने में मदद करता है।
    • Garbha.ai: आईवीएफ (IVF) उपचार के दौरान सबसे अच्छे भ्रूण को चुनने के लिए इसे भारत में मंजूरी मिली है। 

 मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का नया तरीका (Medical College Training)
नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) और ICMR अब नए डॉक्टरों को कॉलेज के दिनों से ही एआई का सही इस्तेमाल सिखा रहे हैं: 
    • एआई और रिसर्च: मेडिकल छात्रों को सिखाया जा रहा है कि कैसे एआई टूल्स का उपयोग करके क्लिनिकल रिसर्च और मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया जाए।
    • EdMedAI सॉफ्टवेयर: आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के 38 से अधिक मेडिकल कॉलेजों में एआई-पावर्ड EdMedAI प्लेटफॉर्म लागू किया जा रहा है। यह छात्रों के डिजिटल लॉगबुक बनाने, हाजिरी लगाने और क्लिनिकल सिमुलेशन (कंप्यूटर पर नकली मरीज का इलाज) सीखने में मदद करता है। 
    • डॉक्टरों की मदद, विकल्प नहीं: NMC प्रमुख ने साफ किया है कि एआई का मकसद डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाना और इलाज को बेहतर करना है।

 

IndiaPrime Hindi

Devender Singh is a senior journalist and media professional with over two decades of experience in television, digital, and Hindi-language journalism. He began his career with ETV Hindi in 2000 and has since served as Bureau Chief for several prominent news networks, including India News, Sahara Samay, and Bharat Express. Throughout his career, he has reported on several high-impact stories, including tribal starvation deaths, the Asaram case, the Jaipur serial bomb blasts, and numerous crime, political, and social issues that earned him recognition as a credible and influential journalist across India. Beyond television journalism, Devender Singh has contributed significantly to digital media transformation, Hindi journalism innovation, and AI-driven Hindi language initiatives. He has also served as a media and communication advisor to several prominent individuals, organizations, and institutions. Holding a postgraduate degree in Journalism along with a degree in Law, he continues to write and analyze issues related to governance, public policy, technology, politics, and social development, delivering insightful and fact-based content to readers.

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