NEET पेपर लीक : सरकार का बड़ा एक्शन, IAS नरेश पाल गंगवार संभालेंगे उच्च शिक्षा विभाग की कमान

इंडिया प्राइम दिल्ली डेस्क NEET पेपर लीक : सरकार का बड़ा एक्शन, IAS नरेश पाल गंगवार संभालेंगे उच्च शिक्षा विभाग की कमान .केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा गुरुवार देर रात जारी आधिकारिक आदेश के तहत तत्कालीन सचिव विनीत जोशी को पद से हटा दिया गया और 1994 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग (DoHE) का नया सचिव नियुक्त किया गया। इसके साथ ही, टी.के. अनिल कुमार को स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग का नया सचिव बनाया गया है.
कौन है IAS नरेश पाल गंगवार
1994 बैच के राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग (DoHE) का नया सचिव नियुक्त किया गया है नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और देशव्यापी छात्र आंदोलनों के बीच इस महत्वपूर्ण पद को संभालने वाले गंगवार के पास 30 से अधिक वर्षों का व्यापक प्रशासनिक अनुभव है ।
वे बेहद उच्च शिक्षित हैं; उन्होंने आईआईटी रुड़की से बी.टेक, आईआईटी दिल्ली से एम.टेक, राजस्थान विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए और नालसार (NALSAR) विश्वविद्यालय से वित्तीय सेवा कानून में डिप्लोमा किया है । अपने शानदार करियर में वे राजस्थान के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव रह चुके हैं [BKS], राज्य की शुरुआती सौर ऊर्जा नीतियों का नेतृत्व कर चुके हैं , तथा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में संयुक्त व अतिरिक्त सचिव और हाल ही में पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं
एक परिणाम-उन्मुख और तकनीकी रूप से सक्षम नौकरशाह के रूप में पहचाने जाने वाले गंगवार को अब परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बहाल करने, डिजिटल लॉकिंग सिस्टम लागू करने और ‘लोक परीक्षा अधिनियम, 2024’ को कड़ाई से लागू करने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है
नवनियुक्त उच्च शिक्षा सचिव आईएएस नरेश पाल गंगवार के कार्यभार संभालते ही शिक्षा मंत्रालय और उच्च शिक्षा विभाग (DoHE) ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए पहले कड़े नीतिगत दिशा-निर्देश (Guidelines) तैयार कर लिए हैं। पेपर लीक रोकने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज में सुधार के लिए विभाग द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं:
परीक्षा सुधारों की 4 बड़ी गाइडलाइंस:
फुल-प्रूफ डिजिटल लॉकिंग सिस्टम: भविष्य की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को केवल एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रारूप में परीक्षा केंद्रों पर भेजा जाएगा, जो परीक्षा शुरू होने से ठीक 30 मिनट पहले एक विशेष वन-टाइम पासवर्ड (OTP) के जरिए ही खुल सकेंगे।
सरकारी केंद्रों को प्राथमिकता: परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने के लिए निजी कॉलेजों या कंप्यूटर सेंटरों के बजाय केवल केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों और प्रतिष्ठित सरकारी विश्वविद्यालयों को ही मुख्य परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से निगरानी: परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, संदिग्ध गतिविधियों और बायोमेट्रिक विसंगतियों को तुरंत पकड़ने के लिए सभी केंद्रों पर AI-आधारित लाइव सीसीटीवी सर्विलांस अनिवार्य किया जा रहा है।
आंतरिक ऑडिट और जवाबदेही: पेपर सेट करने वाले पैनल से लेकर प्रिंटिंग प्रेस और कूरियर एजेंसियों की सुरक्षा का थर्ड-पार्टी फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही को पहले ही रोका जा सके।
नया कानून और आगामी आदेश:
गंगवार के नेतृत्व में विभाग का पहला आधिकारिक आदेश देश में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ के कड़े नियमों को अधिसूचित करना है। इसके तहत पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या सेवा प्रदाता (Service Provider) को 10 साल तक की जेल और ₹1 करोड़ तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, संसद के इसी सत्र में प्रस्तावित ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ के जरिए पूरी परीक्षा नियामक प्रणाली की जवाबदेही नए सिरे से तय की जाएगी।
उच्च शिक्षा विभाग (DoHE) द्वारा तैयार की गई ये नई गाइडलाइंस और सख्त नियम आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया को बदलने जा रहे हैं। पेपर लीक विरोधी सख्त ड्राफ्ट को शुक्रवार को ही केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चर्चा के लिए रखा जा रहा है, जिसके बाद इसे संसद के वर्तमान मानसून सत्र में सोमवार तक पेश किया जा सकता है।
अधिसूचना (Notification): नया बिल संसद से पारित होने के तुरंत बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ अगस्त 2026 के पहले या दूसरे सप्ताह तक देश भर में पूरी तरह प्रभावी (लागू) हो जाएगा।आगामी JEE और NEET परीक्षाओं पर पड़ने वाले 4 बड़े असर:परीक्षा केंद्रों में बड़ा बदलाव: आगामी JEE Main (जनवरी 2027) और NEET 2027 परीक्षाओं के लिए किसी भी प्राइवेट संस्थान या कंप्यूटर सेंटर को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। परीक्षा केवल पूरी तरह सुरक्षित केंद्रीय विद्यालयों और सरकारी यूनिवर्सिटीज में आयोजित होगी।
हाइब्रिड या पूरी तरह ऑनलाइन मोड: पेपर लीक की गुंजाइश खत्म करने के लिए NEET परीक्षा को भी पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) या हाइब्रिड मॉडल पर शिफ्ट करने पर विचार चल रहा है, जहां प्रश्नपत्र सीधे स्क्रीन पर डिजिटल रूप से लॉक होकर आएंगे।
कड़ी सुरक्षा और बायोमेट्रिक चेकिंग: परीक्षा केंद्रों पर एंट्री के वक्त मल्टी-लेयर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और एआई-फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे डमी कैंडिडेट (मुन्नाभाई) बैठकर परीक्षा नहीं दे पाएंगे।
कड़े कानून का डर: इन परीक्षाओं में शामिल होने वाली सभी बाहरी आउटसोर्सिंग एजेन्सियों, प्रिंटिंग प्रेस और लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स को नए कानून के तहत लाया जाएगा। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी होने पर सीधे 10 साल की कैद और ₹1 करोड़ का जुर्माना लगेगा, जिससे सुरक्षा व्यवस्था अचूक बनेगी।






