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'370 रुपये ब‍िरयानी' वीड‍ियो पर गई जॉब, क्या ऑफ‍िस के बाहर भी लागू होते हैं कार्पोरेट रूल्स? जान‍ें कानूनी पक्ष – AajTak

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गुरुग्राम के एक टेक प्रोफेशनल का स्टैंडअप शो में दिया गया शर्मनाक बयान वायरल हो गया. जहां उसने ‘370 रुपये की बिरयानी वसूलने’ के नाम पर सहमति (Consent) का मजाक उड़ाया और महिलाओं के खिलाफ बेहद घटिया, महिला विरोधी टिप्पणी की. वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर थू-थू हुई और कंपनी ने कुछ ही घंटों में उसे नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
इस एक घटना से कॉर्पोरेट जगत के कर्मचारियों को कुछ रूल्स पता होने चाहिए. अक्सर लोग सोचते हैं कि दफ्तर के 9 से 5 के बाद मैं अपनी पर्सनल लाइफ में कुछ भी करूं, रील्स बनाऊं या कहीं भी कुछ भी बोलूंं  कंपनी को क्या फर्क पड़ता है? लेकिन सच्चाई एकदम अलग है. कॉर्पोरेट वर्क कल्चर में आपकी यह गलतफहमी आपकी नौकरी खा सकती है.
क्या हैं कॉर्पोरेट की ‘लक्ष्मण रेखाएं’ 
मोरल टर्पिच्यूड (नैतिक अधमता) और महिला विरोधी आचरण
आप दफ्तर के बाहर किसी क्लब, पब या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैं, लेकिन अगर आपका कोई भी बयान या हरकत महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, ‘रेप कल्चर’ को बढ़ावा देती है या लैंगिक भेदभाव (Gender Discrimination) को दर्शाती है, तो कंपनियां ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ अपनाती हैं. कोई भी ब्रांड अपनी छवि एक ऐसे कर्मचारी के साथ नहीं जोड़ना चाहता जिसकी सोच समाज के लिए घातक हो.
रेप्युटेशनल डैमेज (कंपनी की साख को नुकसान)
भले ही आप अपने वीडियो या पोस्ट में अपनी कंपनी का नाम न लें, लेकिन अगर आपकी किसी सार्वजनिक हरकत से इंटरनेट पर बवाल मचता है और लोग आपकी प्रोफाइल ढूंढकर आपकी कंपनी को टैग करना शुरू कर देते हैं, तो इसे ‘कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान’ माना जाता है. ऐसे में कंपनी मामले की अपने स्तर पर तहकीकात करके अपनी साख बचाने के लिए आपको तुरंत बर्खास्त कर सकती है.
सोशल मीडिया पर ‘विवादास्पद या नफरती’ कंटेंट
किसी भी धर्म, जाति, या समुदाय के खिलाफ हेट स्पीच देना, भद्दे मीम्स शेयर करना या किसी संवेदनशील मुद्दे पर हिंसक विचार रखना भी भारी पड़ सकता है. आज के समय में हर बड़ी कंपनी की एचआर (HR) टीमें बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और सोशल मीडिया स्क्रूटनी पर पैनी नजर रखती हैं.
नॉन-डिस्क्लोजर और प्राइवेसी ब्रीच (डेटा की चोरी)
ऑफिस के भीतर के किसी वाकये, क्लाइंट की जानकारी, या कलीग्स (सहकर्मियों) के साथ हुई किसी अनबन को फनी रील या वीडियो के जरिए सार्वजनिक करना सीधे तौर पर प्राइवेसी का उल्लंघन है.
क्या दफ्तर के बाहर के बर्ताव पर एक्शन लेना कानूनी रूप से सही है?
इस पूरे मामले के कानूनी और पेचीदा पहलुओं को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के वरिष्ठ वकील मनीष भदौरिया समझाते हुए कहते हें कि आजकल अधिकांश एम्प्लॉइज को यह गलतफहमी होती है कि उनका एग्रीमेंट सिर्फ ऑफिस के काम और वर्किंग आवर्स तक सीमित है. कानूनन ऐसा बिल्कुल नहीं है. जब आप किसी कंपनी का अपॉइंटमेंट लेटर साइन करते हैं, तो उसमें ‘कोड ऑफ़ कंडक्ट’ (आचरण नियमावली) और ‘एथिक्स पॉलिसी’ साफ तौर पर लिखी होती है.
अगर कोई कर्मचारी दफ्तर के बाहर भी किसी ऐसी गतिविधि या आपराधिक मानसिकता (जैसे महिलाओं के खिलाफ भद्दी टिप्पणी या उत्पीड़न) में संलिप्त पाया जाता है जो समाज की नजरों में अपराध या अनैतिक है, तो कंपनी के पास उसे बिना किसी नोटिस पीरियड या हर्जाने के ‘तत्काल प्रभाव से बर्खास्त’ करने का पूरा कानूनी अधिकार होता है. अदालतें भी ऐसे मामलों में कंपनी के फैसले को सही मानती हैं क्योंकि हर संस्थान को अपने कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाए रखने का अधिकार है.
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IndiaPrime Hindi

Devender Singh is a senior journalist and media professional with over two decades of experience in television, digital, and Hindi-language journalism. He began his career with ETV Hindi in 2000 and has since served as Bureau Chief for several prominent news networks, including India News, Sahara Samay, and Bharat Express. Throughout his career, he has reported on several high-impact stories, including tribal starvation deaths, the Asaram case, the Jaipur serial bomb blasts, and numerous crime, political, and social issues that earned him recognition as a credible and influential journalist across India. Beyond television journalism, Devender Singh has contributed significantly to digital media transformation, Hindi journalism innovation, and AI-driven Hindi language initiatives. He has also served as a media and communication advisor to several prominent individuals, organizations, and institutions. Holding a postgraduate degree in Journalism along with a degree in Law, he continues to write and analyze issues related to governance, public policy, technology, politics, and social development, delivering insightful and fact-based content to readers.

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