Child marriage in Bangladesh: खेलने की उम्र में मां और हिंसा का शिकार? जानिए बांग्लादेश की बेटियों का दर्द।

इंडिया प्राइम इंटरनेशनल डेस्क नई दिल्ली Child marriage in Bangladesh, Exclusive खेलने की उम्र में मां और हिंसा का शिकार? जानिए बांग्लादेश की बेटियों का दर्द। पडौसी देश बांग्लादेश में बाल विवाह (Child Marriage) बाल विवाह का एक दर्दनाक मामले ने सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर कम उम्र में शादी और घरेलू हिंसा कब रुकेगी। आईए जाने इस सामाजिक संकट के पीछे की मुख्य वजहें क्या हैं।
मासूम कंधे, बड़ा बोझ: बांग्लादेश में 11 की उम्र में शादी और मां बनने का खौफनाक सच
यह कहानी काल्पनिक नाम निसार की है जो सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया में शुरु हुई बहस का मुख्य हिस्सा है। पिडिता की 11 साल की उम्र में शादी और 13 साल में मां बनने और घरेलू हिंसा से लडी और कानूनी लडाई लड अपने दूधमुहे बच्चों की कस्टडी हासिल की।
11 वर्ष की उम्र में बाल विवाह
निसार जब मात्र 11 वर्ष की थी, तब उसकी पहचान फेसबुक के जरिए 20 वर्षीय युवक शकील उर्फ शाकिब मिया (Shakil alias Shakib Mia) से हुई। एक नाबालिग की नासमझी के बावजूद परिवार वालो ने उसका विवाह इस वयस्क युवक गैर-कानूनी बाल विवाह करवा दिया गया ।
निसार जब मात्र 11 वर्ष की थी, तब उसकी पहचान फेसबुक के जरिए 20 वर्षीय युवक शकील उर्फ शाकिब मिया (Shakil alias Shakib Mia) से हुई। एक नाबालिग की नासमझी के बावजूद परिवार वालो ने उसका विवाह इस वयस्क युवक गैर-कानूनी बाल विवाह करवा दिया गया ।
13 वर्ष की उम्र में मातृत्व और प्रताड़ना
विवाह के केवल दो साल के दौरान ही जब वह 3 वर्ष थी, एक बच्चे की मां बन गई । इतनी कम उम्र में मातृत्व के शारीरिक और मानसिक बोझ के साथ साथ उसने ससुराल में गंभीर घरेलू हिंसा को भी सहन करना पड़ा । पिडिता और उसके परिवार का आरोप है कि बच्चे के जन्म के कुछ वक्त बाद उसके पति और सास अक्सर उसके साथ मारपीट करती लेकिन हद तो तब हुई जब उसका बच्चा जो केवल 7 महीने का था उसे छीनकर अनामिका को घर से बाहर निकाल दिए
विवाह के केवल दो साल के दौरान ही जब वह 3 वर्ष थी, एक बच्चे की मां बन गई । इतनी कम उम्र में मातृत्व के शारीरिक और मानसिक बोझ के साथ साथ उसने ससुराल में गंभीर घरेलू हिंसा को भी सहन करना पड़ा । पिडिता और उसके परिवार का आरोप है कि बच्चे के जन्म के कुछ वक्त बाद उसके पति और सास अक्सर उसके साथ मारपीट करती लेकिन हद तो तब हुई जब उसका बच्चा जो केवल 7 महीने का था उसे छीनकर अनामिका को घर से बाहर निकाल दिए
कानूनी लड़ाई और बच्चे की कस्टडी
बेघर और बेबस होने के बावजूद 13 वर्षीय नाबालिग मां ने अपने बच्चे के लिए हार नहीं मानी। उसने न्याय के लिए ‘ढाका लीगल एड ऑफिस’ (Dhaka Legal Aid Office) का दरवाजा खटखटाया । मामले की संजीदगी को देखते हुए लीगल एड ऑफिसर मोहम्मद सायेम खान ने तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू की। अदालत ने एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि 7 महीने के दूधमुंहे बच्चे को तुरंत उसकी मां को सौंपा जाए, जिसके बाद उसका बेटा वापस मिल सका।
बेघर और बेबस होने के बावजूद 13 वर्षीय नाबालिग मां ने अपने बच्चे के लिए हार नहीं मानी। उसने न्याय के लिए ‘ढाका लीगल एड ऑफिस’ (Dhaka Legal Aid Office) का दरवाजा खटखटाया । मामले की संजीदगी को देखते हुए लीगल एड ऑफिसर मोहम्मद सायेम खान ने तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू की। अदालत ने एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि 7 महीने के दूधमुंहे बच्चे को तुरंत उसकी मां को सौंपा जाए, जिसके बाद उसका बेटा वापस मिल सका।
बाल विवाह के खिलाफ बने दंडात्मक कानून
बांग्लादेश और भारत दोनों देशों में लड़कियों की विवाह योग्य न्यूनतम आयु कानूनी तौर पर 18 वर्ष निर्धारित है, इसके उल्लंघन करने पर बेहद कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू होते हैं। लेकिन आकडों की हकीकत कुछ अलग है। यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा साझा किए गए बांग्लादेश के ‘बाल विवाह निरोधक अधिनियम 2017’ के तहत यदि कोई बालिग पुरुष किसी नाबालिग से शादी करता है, या जो माता-पिता और काजी इस विवाह को आयोजित कराते हैं, तो उन्हें 2 साल तक की जेल, 1 लाख टका तक का जुर्माना, या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। वहीं, भारत में मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006’ के तहत यह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें दोषी पुरुष को 2 साल का सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का सख्त नियम है।
बांग्लादेश और भारत दोनों देशों में लड़कियों की विवाह योग्य न्यूनतम आयु कानूनी तौर पर 18 वर्ष निर्धारित है, इसके उल्लंघन करने पर बेहद कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू होते हैं। लेकिन आकडों की हकीकत कुछ अलग है। यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा साझा किए गए बांग्लादेश के ‘बाल विवाह निरोधक अधिनियम 2017’ के तहत यदि कोई बालिग पुरुष किसी नाबालिग से शादी करता है, या जो माता-पिता और काजी इस विवाह को आयोजित कराते हैं, तो उन्हें 2 साल तक की जेल, 1 लाख टका तक का जुर्माना, या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। वहीं, भारत में मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006’ के तहत यह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें दोषी पुरुष को 2 साल का सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का सख्त नियम है।
बाल विवाह और कम उम्र में मां बनने का सरकारी डेटा
सख्त कानूनों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर बाल विवाह और नाबालिग मातृत्व के आधिकारिक आंकड़े बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाते हैं। यूनाइटेड नेशंस (UN Women/UNICEF) की नवीनतम वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश पूरे एशिया में बाल विवाह के मामले में शीर्ष पर है, जहाँ आज भी 51% लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले और 17% लड़कियों की शादी 15 वर्ष से भी कम उम्र में हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप 24% से 31% लड़कियां अपनी वयस्कता से पहले ही मां बन जाती हैं।
सख्त कानूनों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर बाल विवाह और नाबालिग मातृत्व के आधिकारिक आंकड़े बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाते हैं। यूनाइटेड नेशंस (UN Women/UNICEF) की नवीनतम वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश पूरे एशिया में बाल विवाह के मामले में शीर्ष पर है, जहाँ आज भी 51% लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले और 17% लड़कियों की शादी 15 वर्ष से भी कम उम्र में हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप 24% से 31% लड़कियां अपनी वयस्कता से पहले ही मां बन जाती हैं।
दूसरी तरफ, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 23.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में हुआ है, जिसमें पश्चिम बंगाल (41.6%) और बिहार (40.8%) सबसे आगे हैं, जबकि देश में 15 से 19 वर्ष की करीब 6.8% किशोरियां नाबालिग उम्र में ही मां बन चुकी हैं या गर्भवती हैं।
इस लेख के बाद देश और दुनियां में यह बहस और जरुरी पुख्ता उपाय होने चाहिए ताकी एशिया और अन्य गरीब देशों में बालिकाओ की वास्तविक स्थिति के सुधार की ओर सरकारो की सोच और प्रयास तेज हो।
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