धर्मेद्र प्रधान इस्तीफा : मोदी सरकार का बड़ा राजनीतिक बैकफुट है? जानिए असली वजह इंडिया प्राइम टीवी पर

तेजस्वी सिंह जयपुर इंडिया प्राइम । धर्मेद्र प्रधान इस्तीफा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार के आत्मसमर्पण से अधिक उसकी रणनीतिक बिसात का हिस्सा माना जा रहा है। नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा युवा आंदोलन इस इस्तीफे की मुख्य वजह बना। पीएम मोदी और अमित शाह के बेहद भरोसेमंद माने जाने वाले धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सरकार ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है।
मुख्य वजहें जिनसे झुकी मोदी सरकार
1. सोनम वांगचुक का अनशन और पुलिसिया बर्बरता: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को धार तब मिली जब प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक उनके समर्थन में 26 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठ गए। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती कराने और 20 जुलाई को संसद मार्च कर रहे निहत्थे छात्रों पर लाठीचार्ज के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से जनता में भारी गुस्सा फैल गया।
2. सोशल मीडिया पर ‘पॉलिटिकल कैपिटल’ का नुकसान: खुफिया इनपुट्स और सोशल मीडिया ट्रेंड्स के विश्लेषण से सरकार को पता चला कि पुलिसिया कार्रवाई के बाद इंटरनेट पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर नकारात्मक असर पड़ रहा था। सरकार अपनी राजनीतिक साख (Political Capital) को और अधिक नुकसान नहीं पहुंचाना चाहती थी।
3. संसद सत्र से पहले विपक्ष की तगड़ी घेराबंदी: संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर लामबंद हो गया था। राहुल गांधी अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सीधे प्रधानमंत्री आवास (7 LKM) के बाहर धरने पर बैठ गए थे, जिससे सरकार के लिए संसद चलाना मुश्किल होने वाला था।
4. ‘एंटी-नेशनल ताकतों’ के फायदे का डर: धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में खुद यह तर्क दिया कि जंतर-मंतर पर उपजे इस देशव्यापी जनाक्रोश का फायदा कुछ “राष्ट्रविरोधी ताकतें” उठाकर देश की अखंडता को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए छात्रों के हित में वह स्वेच्छा से पद छोड़ रहे हैं।
क्या संघ (RSS) ने कराया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा?
हा इस फैसले के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सीधा वैचारिक और रणनीतिक दबाव माना जा रहा है। इसे निम्नलिखित घटनाक्रमों से समझा जा सकता है:

मोहन भागवत का ‘संवाद’ वाला बयान: इस्तीफे से ठीक पहले आरएसएस प्रमुख ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा था कि “आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें उन्हें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत (संवाद) करनी चाहिए।” संघ प्रमुख के इस बयान को सीधे मोदी सरकार के अड़ियल रुख पर नसीहत माना गया, जिसके तुरंत बाद सरकार बैकफुट पर आई।
छात्रों के बीच साख बचाने की कोशिश: संघ की छात्र शाखा एबीवीपी (ABVP) भी आंतरिक रूप से इस पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों के बीच अपनी पकड़ कमजोर होने से चिंतित थी। संघ नेतृत्व का मानना था कि एक मंत्री की जिद के कारण भाजपा और संघ का पारंपरिक युवा वोटर उनसे छिटक रहा है।
अधिकारियों पर पहले ही गिर चुकी थी गाज: संघ के आंतरिक दबाव के बाद ही सरकार ने शुक्रवार रात को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया था और शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को बदला था, जिसके बाद अंतिम जिम्मेदारी तय करते हुए प्रधान का इस्तीफा लिया गया।
पूरा घटना क्रम कम सोनम वानचुग का घरना शुरु हुआ
पहले दिन क्या क्या हुआ जंतर-मंतर पर नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन को तब सबसे बड़ी ताकत मिली, जब प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Hunger Strike) शुरू की।
पूरा घटनाक्रम (The Full Timeline of Protest)28 जून 2026 (पहला दिन): सोनम वांगचुक लद्दाख से दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और सुबह करीब 10:00 बजे आधिकारिक रूप से अपना अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया।
4 जुलाई 2026 (7वां दिन): दिल्ली की भीषण गर्मी के कारण वांगचुक की सेहत बिगड़ने लगी। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर सरकार से तुरंत सख्त कदम उठाने की अपील की।
18 जुलाई 2026 (21वां दिन): डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि अत्यधिक कमजोरी के कारण उनके अंग (Organs) फेल हो सकते हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया。
20 जुलाई 2026: अस्पताल में रहते हुए भी वांगचुक ने अनशन जारी रखा। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे संसद की तरफ अपनी योजना के मुताबिक शांतिपूर्ण मार्च जारी रखें। इसी दिन पुलिस ने मार्च कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया।
23-24 जुलाई 2026 (26वां दिन – अनशन की समाप्ति): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त कार्रवाई के आश्वासन और सरकार के साथ लंबी वार्ताओं के बाद, 24 जुलाई की देर रात केंद्रीय मंत्रियों (जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह) की मौजूदगी में वांगचुक ने अपना 26 दिनों का ऐतिहासिक अनशन समाप्त किया।
25 जुलाई 2026 (अंतिम परिणाम): उनके अनशन के भारी दबाव और जनाक्रोश के कारण आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा
प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा सख्त [एंटी-पेपर लीक कानून को मंजूरी देने के बाद CJP ने अपना 36 दिनों का आंदोलन आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया है।






