क्या ओवैसी अखिलेश का गंठबंधन होगा ? क्या है मनसुबे इस सियासी समीकरणो के जानिए विस्तार से इंडिया प्राइम टीवी की इस रिपोर्ट में

इंडिया प्राइम पॉलिटिकल डेस्क / ओवैसी अखिलेश का गंठबंधन / उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव की तरफ गठबंधन का हाथ बढ़ाया है। मुरादाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने सीधे अखिलेश यादव को संदेश दिया और कहा कि वह भाजपा को हराने के लिए हाथ मिलाने को तैयार हैं
- ओवैसी ने मंच से कहा, “मैं पहले भी कह चुका हूँ और आज फिर कह रहा हूँ कि मजलिस नहीं चाहती कि उत्तर प्रदेश में दोबारा भाजपा की सरकार बने। मैं हाथ मिलाने को तैयार हूँ, मैं गठबंधन करने को तैयार हूँ। बात करनी है तो आज ही करिए, चुनाव खत्म होने के बाद बाद में रोने से कुछ नहीं होगा।”
- उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी गठबंधन बराबरी और आपसी सम्मान के आधार पर होना चाहिए, जहाँ अल्पसंख्यक नेताओं को केवल वोट बैंक न समझा जाए।
- अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष दलों ने हमेशा मुसलमानों के वोटों का इस्तेमाल किया है लेकिन उन्हें सही प्रतिनिधित्व नहीं दिया।
- ओवैसी ने चेतावनी दी कि यदि विपक्षी दलों ने उनकी पार्टी को नजरअंदाज किया, तो इससे वोटों का बिखराव होगा और इसके जिम्मेदार वह खुद होंगे।
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम जनसंख्या का गणित
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की जनसांख्यिकी बेहद निर्णायक भूमिका निभाती है। अधिकारिक आंकड़ों और वर्तमान अनुमानों के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 19.26% है, जो संख्या के लिहाज से करीब 4.7 करोड़ से 5 करोड़ के बीच बैठती है। हालिया मतदाता सूचियों के विश्लेषण के आधार पर कुल सक्रिय वोटर्स में मुस्लिम मतदाताओं का शेयर लगभग 18.6% से 19.5% के आसपास आंका गया है। यही कारण है कि सूबे की सियासत में किसी भी दल के लिए इस बड़े और एकजुट वोट बैंक को नजरअंदाज करना नामुमकिन होता है।
विधानसभा सीटों पर प्रभाव और राजनीतिक समीकरण
उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 143 सीटें ऐसी हैं जहाँ मुस्लिम मतदाता सीधे तौर पर चुनाव परिणाम तय करते हैं। इनमें से करीब 73 सीटों पर मुस्लिम आबादी 30% से लेकर 50% से भी अधिक है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, रुहेलखंड और तराई के इलाकों में केंद्रित हैं; जबकि बाकी बची 70 सीटों पर यह आबादी 20% से 30% के बीच है जहाँ ये किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं। इसी रणनीतिक समीकरण को देखते हुए असदुद्दीन ओवैसी इन प्रभावी सीटों पर मुस्लिम और ‘पीडीए’ वोटों के बिखराव को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी के सामने गठबंधन का पासा फेंक रहे हैं ताकि पारंपरिक रूप से जीतने वाली 36 से 46 सीटों पर विपक्ष को मजबूत किया जा सके।






