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Breaking News: लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे अगले सेना प्रमुख, जानिए उनका सैन्य सफर, उपलब्धियां और भारत के यादगार आर्मी चीफ

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देवेंद्र सिंह | IndiaprimeTV.com | अपडेटेड: 19 जून 2026 केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को नया सेनाध्यक्ष नियुक्त किया है। जानिए उनके सैन्य करियर, प्रमुख नियुक्तियों, उपलब्धियों और भारत के पूर्व सेनाध्यक्षों के बारे में। केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना का अगला चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) नियुक्त किया है।

वर्तमान में उप सेना प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) के पद पर कार्यरत लेफ्टिनेंट जनरल सेठ 30 जून 2026 की दोपहर से पदभार संभालेंगे। वे मौजूदा सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे, जो 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। (Press Information Bureau) लगभग चार दशक के सैन्य अनुभव वाले लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को रणनीतिक सोच, सैन्य आधुनिकीकरण और परिचालन नेतृत्व के लिए जाना जाता है। (

कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ?

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला के पूर्व छात्र हैं। उन्हें दिसंबर 1986 में भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था। अपने लगभग 40 वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने विभिन्न परिचालन, रणनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। (Press Information Bureau)वे सैन्य परंपरा वाले परिवार से आते हैं और भारत के उन चुनिंदा दूसरे पीढ़ी के सैन्य अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने सेना के सर्वोच्च पद तक पहुंच बनाई है।

धीरज सेठ की प्रमुख नियुक्तियां

अपने सैन्य करियर के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।

  • आर्मर्ड रेजिमेंट की कमान
  • आर्मर्ड ब्रिगेड का नेतृत्व
  • सुदर्शन चक्र कोर की कमान
  • जनरल ऑफिसर कमांडिंग, दिल्ली एरिया
  • दक्षिण-पश्चिमी कमान में वरिष्ठ जिम्मेदारियां
  • दक्षिणी कमान का नेतृत्व
  • उप सेना प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) (On Record India)

उन्होंने जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में काउंटर-इंसर्जेंसी अभियानों का भी अनुभव हासिल किया है। (@theweek)

सैन्य आधुनिकीकरण के समर्थक

उप सेना प्रमुख के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया है। उन्हें “मेक इन इंडिया” रक्षा पहल के समर्थक अधिकारियों में गिना जाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना निम्नलिखित क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दे सकती है:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित युद्ध प्रणालियां
  • ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक
  • नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता
  • सीमा क्षेत्रों में निगरानी प्रणाली
  • स्वदेशी हथियार और रक्षा उपकरण

जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह लेंगे, जिन्होंने जून 2024 में भारतीय सेना के 30वें सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था। उनका कार्यकाल दो वर्षों का रहा। अपने कार्यकाल के दौरान जनरल द्विवेदी ने उत्तरी सीमाओं पर परिचालन तैयारियों को मजबूत करने, थिएटर कमांड की दिशा में समन्वय बढ़ाने और आधुनिक युद्ध तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।

भारत के यादगार सेनाध्यक्ष

भारतीय सेना के इतिहास में कई सेनाध्यक्षों ने अपने नेतृत्व से अमिट छाप छोड़ी है।

Field Marshal Sam Manekshaw

भारत के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य नेताओं में शामिल सैम मानेकशॉ ने 1969 से 1973 तक सेनाध्यक्ष के रूप में सेवा दी। उनके नेतृत्व में भारत ने 1971 का युद्ध जीता और बांग्लादेश का गठन हुआ। उन्हें भारत का पहला फील्ड मार्शल बनाया गया।

General K. Sundarji

जनरल सुंदरजी को भारतीय सेना में तकनीकी और सामरिक बदलावों का अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

General Bipin Rawat

जनरल बिपिन रावत ने 2016 से 2019 तक सेनाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। बाद में वे भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बने। उन्होंने सैन्य सुधारों और थिएटर कमांड की अवधारणा को आगे बढ़ाया।

General Manoj Pande

जनरल मनोज पांडे भारतीय सेना के पहले इंजीनियर अधिकारी थे, जो सेनाध्यक्ष बने। उन्होंने स्वदेशी सैन्य तकनीक और सीमा अवसंरचना को प्राथमिकता दी।

भारत के सेनाध्यक्ष का कार्यकाल कितना होता है?

भारतीय सेना प्रमुख का कार्यकाल तीन वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक होता है, जो भी पहले हो। सेनाध्यक्ष की नियुक्ति भारत सरकार द्वारा वरिष्ठता, अनुभव और परिचालन क्षमता के आधार पर की जाती है।

नई चुनौतियां और धीरज सेठ की भूमिका

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ऐसे समय में सेना की कमान संभाल रहे हैं, जब भारत को उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर जटिल सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

उनके सामने प्रमुख चुनौतियां होंगी:

  • चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सुरक्षा
  • पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से निपटना
  • साइबर और ड्रोन युद्ध की तैयारी
  • सेना का आधुनिकीकरण
  • स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना

निष्कर्ष

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति भारतीय सेना के नेतृत्व में निरंतरता और आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आर्मर्ड कोर से आने वाले इस वरिष्ठ अधिकारी का व्यापक परिचालन अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण आने वाले वर्षों में भारतीय सेना की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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