ओवैसी की पार्टी से गठबंधन करने के सवाल पर बोले अखिलेश यादव
देवेंद्र सिंह | IndiaPrimeTV.com | लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है।
लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि “जो INDIA गठबंधन था, वही INDIA गठबंधन रहेगा। इसी गठबंधन ने हाल के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को चुनौती दी है।”
उन्होंने बिना किसी दल का नाम लिए कहा, “चुनाव नजदीक आते ही कई लोग सामने आएंगे और कई तरह की रुकावटें भी पैदा होंगी। ऐसे प्रयासों का उद्देश्य बीजेपी को फायदा पहुंचाना है।”
अखिलेश यादव के इस बयान को एआईएमआईएम के साथ संभावित गठबंधन की अटकलों पर विराम के तौर पर देखा जा रहा है।
ओवैसी ने दिया था गठबंधन का प्रस्ताव
इससे पहले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए गठबंधन की इच्छा जताई थी।
ओवैसी ने कहा था, “हम उत्तर प्रदेश में गठबंधन के लिए तैयार हैं, लेकिन हमें सम्मान और बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए। हमारा उद्देश्य बीजेपी को दोबारा सत्ता में आने से रोकना है।”
हालांकि, अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि समाजवादी पार्टी फिलहाल INDIA गठबंधन के मौजूदा सहयोगियों के साथ ही आगे बढ़ना चाहती है।
यूपी 2027: क्यों अहम है मुस्लिम वोट बैंक?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। राज्य की लगभग 19 प्रतिशत आबादी मुस्लिम समुदाय से जुड़ी है, जिसका प्रभाव कई विधानसभा सीटों पर सीधा पड़ता है।
पिछले विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम और यादव (MY) समीकरण के आधार पर अपनी रणनीति तैयार की थी। वहीं, एआईएमआईएम ने पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर सहमति बनाना 2027 के चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती होगी।
INDIA गठबंधन की रणनीति पर नजर
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी INDIA गठबंधन अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तालमेल को लेकर भी लगातार चर्चा जारी है।
ऐसे में अखिलेश यादव का बयान यह संकेत देता है कि सपा फिलहाल अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ ही चुनावी रणनीति तैयार कर रही है।
हालांकि, चुनाव में अभी काफी समय बाकी है और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार गठबंधन समीकरणों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बीजेपी की क्या है रणनीति?
भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी संगठन स्तर पर बूथ प्रबंधन, लाभार्थी संपर्क अभियान और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने पर फोकस कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 का चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसके नतीजों का असर 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा भी तय कर सकता है।
फिलहाल, ओवैसी के प्रस्ताव और अखिलेश यादव के जवाब ने यह साफ कर दिया है कि यूपी की सियासत में गठबंधन की चर्चा अभी और तेज होने वाली है।
