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Gold का खेल… टेंशन में डोनाल्ड ट्रंप, अब US ट्रेजरी से ज्यादा सेंट्रल बैंकों के पास सोना! – AajTak

डोनाल्ड ट्रंप की टेंशन (Donald Trump Tension) बढ़ाने वाली खबर आई है. दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों के पास अब अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड से ज्यादा सोना हो गया है. जेफरीज की एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है और कहा गया है कि ये निवेशकों के डॉलर से दूर होते रुझान को दर्शाता है. ये रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है, जबकि निवेशक अमेरिकी सरकार के फाइनेंस की स्थिरता पर लगातार सवाल उठाते हुए नजर आ रहे हैं. 
डॉलर को लेकर चिंता में निवेशक
Jefferies के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के पास अब अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों की तुलना में ज्यादा सोना हो चुका है. यह अमेरिका की वित्तीय स्थिति, बढ़ते कर्ज के बोझ (US Debt) और यूएस डॉलर के लॉन्गटर्म आउटलुक पर बढ़ती चिंताओं के बीच वास्तविक गोल्ड स्टैंडर्ड की ओर धीरे-धीरे बदलाव का इशारा करता है. 
जेफरीज के इक्विटी स्ट्रेटजी के ग्लोबल चीफ क्रिस्टोफर वुड ने अपनी नई ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में तर्क देते हुए कहा कि सोने की कीमतों को बढ़ते बॉन्ड यील्ड और सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों से शॉर्ट टर्म दबाव का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इस कीमती धातु के लिए संरचनात्मक आधार बरकरार है.
Donald Trump
हर साल इतना ब्याज चुका रहा अमेरिका 
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब निवेशक US Govt की फाइनेंशियल हेल्थ को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं. जेफरीज की मानें, तो अमेरिका पर कर्ज का बोझ इस कदर बढ़ चुका है कि  सालाना शुद्ध ब्याज भुगतान बढ़कर रिकॉर्ड 1.03 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, जो संघीय सरकार की प्राप्तियों का 19% है. ब्याज लागत और सरकारी योजनाओं पर होने वाला खर्च अब सरकारी राजस्व का 93% से अधिक हिस्सा ले रहा है.
US बॉन्ड में निवेशकों ने घटाई हिस्सेदारी
गोल्ड के खेल की यह प्रवृत्ति केंद्रीय बैंकों, खासतौर पर उभरते बाजारों में, रिजर्व मैंनेजमेंट में व्यापक बदलाव का उदाहरण है. बीते कई सालों में तमाम देशों ने अपने रिजर्व में विविधता लाने और डॉलर-मूल्य वाले एसेट्स पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से अपने सोने के भंडार (Gold Reserve) में तेजी से बढ़ोतरी की है. इस बीच लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव, प्रतिबंधों के जोखिम और फिएट करेंसियों को लेकर चिंताओं ने सोने के आकर्षण को मजबूत किया है.
इस बीच अमेरिका को लगातार झटका लगा है और अमेरिकी सरकारी कर्ज की विदेशी डिमांड कमजोर होती नजर आ रही है. जेफरीज के मुतताबिक, विदेशी निवेशकों ने मार्च में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी 138.4 अरब डॉलर कम कर दी, जो सितंबर 2022 के बाद से सबसे बड़ी मंथली गिरावट है.
Central Banks Purchasing Gold
टॉप-10 Gold रिजर्व वाले देश
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) और आईएमएफ के 2026 की पहली तिमाही रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों से साफ पता चलता है कि अमेरिका 8,134 टन Gold Reserve के साथ लिस्ट में पहले पायदान पर बना हुई है. इसके बाद जर्मनी के पास 3,350 टन, इटली के पास 2,452 टन और फ्रांस के पास 2,437 टन गोल्ड का भंडार है. 
रूस और चीन दोनों के पास 2,300 टन से अधिक सोने का भंडार मौजूद है, जबकि भारत लगभग 880 टन सोने के भंडार (India’s Gold Reserve) के साथ वैश्विक स्तर पर 8वें स्थान पर है, जो उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 11% है. स्विट्जरलैंड, जापान और नीदरलैंड भी टॉप-10 लिस्ट में शामिल हैं. 
दुनिया के फाइनेंशियल सिस्टम में बदलाव
जेफरीज का कहना है कि केंद्रीय बैंक सोने की कमीतों में हालिया गिरावट के बावजूद ट्रेजरी बॉन्ड की तुलना में अधिक सोना रखते हैं. रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में एक गहरा और बड़ा बदलाव पहले से ही शुरू हो चुका है. हालांकि डॉलर दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा (World’s Reserve Currency Dollar) बनी हुई है, लेकिन केंद्रीय बैंक मूल्य के भंडार के रूप में सोने की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं.
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IndiaPrime Hindi

Devender Singh is a senior journalist and media professional with over two decades of experience in television, digital, and Hindi-language journalism. He began his career with ETV Hindi in 2000 and has since served as Bureau Chief for several prominent news networks, including India News, Sahara Samay, and Bharat Express. Throughout his career, he has reported on several high-impact stories, including tribal starvation deaths, the Asaram case, the Jaipur serial bomb blasts, and numerous crime, political, and social issues that earned him recognition as a credible and influential journalist across India. Beyond television journalism, Devender Singh has contributed significantly to digital media transformation, Hindi journalism innovation, and AI-driven Hindi language initiatives. He has also served as a media and communication advisor to several prominent individuals, organizations, and institutions. Holding a postgraduate degree in Journalism along with a degree in Law, he continues to write and analyze issues related to governance, public policy, technology, politics, and social development, delivering insightful and fact-based content to readers.

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