25KV हाई-टेंशन रेलवे तार चोरी: सबसे बड़ा सवाल—आखिर इतनी बड़ी वारदात हुई कैसे?

25KV हाई-टेंशन रेलवे तार चोरी: सबसे बड़ा सवाल—आखिर इतनी बड़ी वारदात हुई कैसे?

इंडिया प्राइम बिहार डेस्क | जहानाबाद/पटना 25KV हाई-टेंशन रेलवे तार चोरी: बिहार में चोरी की घटनाएं अब सामान्य अपराध की सीमा पार करती दिखाई दे रही हैं। ताजा मामला जहानाबाद का है, जहां चोरों ने भारतीय रेलवे की 25,000 वोल्ट (25 KV) क्षमता वाली ओवरहेड हाई-टेंशन बिजली लाइन ही काटकर चुरा ली। इस वारदात के कारण पटना-गया रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन तीन घंटे से अधिक समय तक प्रभावित रहा और सैकड़ों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

घटना 9 जुलाई 2026 की तड़के लगभग 3:05 बजे तेहता और जहानाबाद स्टेशनों के बीच मदारपुर रेलवे गुमटी के पास हुई। चोर करीब 100 मीटर लंबा ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) तार काटकर ले गए। इसके बाद डाउन लाइन की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई।

कई प्रमुख ट्रेनें बीच रास्ते रुकीं

बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण कई महत्वपूर्ण ट्रेनें निर्धारित समय पर आगे नहीं बढ़ सकीं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • गंगा दामोदर एक्सप्रेस
  • पलामू एक्सप्रेस
  • हटिया-पटना एक्सप्रेस

सहित कई अन्य ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों और बीच रास्ते पर खड़ी रहीं।रेलवे ने आपात व्यवस्था के तहत सिंगल लाइन वर्किंग लागू कर सीमित परिचालन शुरू किया ताकि रेल यातायात पूरी तरह बंद न हो।

रेलवे ने युद्धस्तर पर कराया मरम्मत कार्य

घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी तथा रेलवे इंजीनियरिंग टीम मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने लगातार मरम्मत कार्य करते हुए सुबह 6:26 बजे ट्रैक को दोबारा परिचालन योग्य घोषित कर दिया।

तलाशी अभियान के दौरान आरपीएफ ने घटनास्थल के पास से चोरी किए गए तार का कुछ हिस्सा बरामद भी कर लिया, हालांकि आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।

इस मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि चोरों ने वारदात वास्तव में कैसे अंजाम दी। जब तक जांच पूरी न हो, किसी निश्चित तरीके का दावा नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संभावित परिदृश्यों का विश्लेषण किया जा सकता है।

संभावित तरीका: कैसे हुई होगी इतनी बड़ी चोरी?

रेलवे का 25KV ओवरहेड तार सामान्य केबल नहीं होता। इसे काटने के लिए तकनीकी जानकारी, विशेष उपकरण और पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। ऐसे में यह घटना रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि इतनी संवेदनशील रेलवे लाइन पर अपराधी बिना पकड़े कैसे वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।रेलवे सुरक्षा एजेंसियां अब आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, स्क्रैप कारोबारियों और स्थानीय नेटवर्क की जांच कर रही हैं

1. पहले विद्युत आपूर्ति बंद होने का इंतजार या जानकारी
25 KV ओवरहेड लाइन सामान्य स्थिति में अत्यंत खतरनाक होती है। इसलिए सबसे अधिक संभावना है कि अपराधियों ने ऐसे समय का चयन किया हो जब उस सेक्शन में बिजली पहले से बंद (Power Block) हो, या उन्हें इसकी जानकारी रही हो। यदि लाइन चालू होती, तो सीधे तार काटना जानलेवा होता।

2. पहले से रेकी (Reconnaissance)
घटनास्थल सुनसान था और वारदात तड़के लगभग 3 बजे हुई। इससे संकेत मिलता है कि अपराधियों ने पहले से इलाके की निगरानी की होगी और गश्त के समय का अंदाजा लगाया होगा।

3. संगठित गिरोह
करीब 100 मीटर OHE तार काटना, उसे नीचे उतारना और ले जाना एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है। इसमें कई लोगों, औजारों और संभवतः किसी वाहन की जरूरत पड़ी होगी।

4. स्क्रैप के लिए चोरी
कॉपर युक्त या धातु वाले रेलवे केबल स्क्रैप बाजार में ऊंची कीमत पर बिक सकते हैं। ऐसी घटनाओं के पीछे अक्सर संगठित स्क्रैप नेटवर्क की जांच की जाती है।

5. तेजी से फरार होने की योजना
RPF के कुछ तार बरामद करने से संकेत मिलता है कि अपराधी जल्दबाजी में भागे या उन्हें बीच में व्यवधान का सामना करना पड़ा।

जांच के बड़े सवाल

  • क्या घटना के समय उस सेक्शन की बिजली पहले से बंद थी?
  • क्या किसी ने पावर ब्लॉक की जानकारी लीक की?
  • क्या आसपास के सीसीटीवी या ड्रोन निगरानी पर्याप्त थी?
  • क्या स्थानीय स्क्रैप कारोबारियों से पूछताछ हो रही है?
  • क्या यह पहले हुई रेलवे केबल चोरी की घटनाओं से जुड़ा संगठित गिरोह है?

यह खबर केवल “100 मीटर तार चोरी” की नहीं है। असली सवाल है कि भारत के सबसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोरों में से एक पर 25 KV ओवरहेड लाइन तक अपराधी पहुंचे कैसे? यदि यह बिना किसी अंदरूनी जानकारी के हुआ, तो रेलवे की रात्रि सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यदि अंदरूनी सूचना का कोण सामने आता है, तो मामला साधारण चोरी से कहीं अधिक गंभीर हो सकता

बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर चोरी का बढ़ता ट्रेंड

बिहार में सरकारी संपत्तियों की चोरी के कई चौंकाने वाले मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।

1. पूरा मोबाइल टावर गायब

जून 2026 में बक्सर जिले के डुमरांव में बदमाश दूरसंचार अधिकारी बनकर पहुंचे और गैस कटर की मदद से 132 फीट ऊंचा मोबाइल टावर तथा जनरेटर तक खोलकर ले गए।

2. 60 फीट का लोहे का पुल चोरी

रोहतास जिले में सिंचाई विभाग के अधिकारी बनकर आए गिरोह ने दिनदहाड़े 60 फीट लंबा लोहे का पुल ही उखाड़कर गायब कर दिया था।

3. रेलवे सिग्नल केबल चोरी

मई 2026 में दानापुर स्टेशन के पास रेलवे सिग्नल केबल चोरी होने से दर्जनों ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ था।

जांच जारी

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी आरोपियों की पहचान के लिए लगातार छापेमारी कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में स्क्रैप माफिया और संगठित चोरी गिरोहों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।


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यह घटना केवल चोरी का मामला नहीं बल्कि क्रिटिकल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। यदि 25KV जैसी उच्च वोल्टेज लाइन को अपराधी काटकर ले जा सकते हैं, तो यह रेलवे की निगरानी व्यवस्था, रात्रि गश्त, तकनीकी सर्विलांस और स्क्रैप बाजार की निगरानी—चारों मोर्चों पर गंभीर कमजोरी की ओर संकेत करता है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर चोरी अब संगठित अपराध का रूप ले चुकी है।

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