विश्व जनसंख्या दिवस: जनसंख्या नहीं ,मानव संसाधन बनाएं’- गायत्री राठौड़ प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग

जनसंख्या नहीं ,मानव संसाधन बनाएं'- ias गायत्री राठौड़

इंडिया प्राइम हेल्थ डेस्क | जयपुर जनसंख्या नहीं ,मानव संसाधन बनाएं’- गायत्री राठौड़, विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर राजस्थान सरकार ने परिवार कल्याण कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों, पंचायत समितियों, ग्राम पंचायतों, स्वास्थ्य संस्थानों और स्वास्थ्य कर्मियों को राज्यस्तरीय परिवार कल्याण पुरस्कार प्रदान किए। स्वास्थ्य भवन में आयोजित समारोह की अध्यक्षता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने की। विजेताओं को वर्चुअल माध्यम से पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों का परिणाम है कि राजस्थान की कुल प्रजनन दर (TFR) 2.1 पर पहुंच गई है, जो जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग में भी राजस्थान राष्ट्रीय औसत से आगे है। जहां देश का औसत 52.7 प्रतिशत है, वहीं राजस्थान में यह 57.1 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

यदि 2026 के SRS (Sample Registration System) और NFHS-5 के उपलब्ध आंकड़ों की तुलना करें, तो राजस्थान ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अभी भी देश के कुछ बड़े राज्यों की तुलना में इसकी प्रजनन दर अपेक्षाकृत अधिक है।

राज्य कुल प्रजनन दर (TFR) राजस्थान से तुलना
बिहार 2.8 राजस्थान से अधिक
उत्तर प्रदेश 2.6 अधिक
मध्य प्रदेश 2.4 थोड़ा अधिक
राजस्थान 2.3
छत्तीसगढ़ 2.2 थोड़ा कम
झारखंड 2.1 कम
गुजरात 1.8 काफी कम
हरियाणा 1.9 कम
महाराष्ट्र 1.4 काफी कम
पंजाब 1.5 काफी कम
तमिलनाडु 1.3 काफी कम
केरल 1.5 काफी कम
दिल्ली 1.2 सबसे कम में शामिल

हालांकि राजस्थान ने कुल प्रजनन दर को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, फिर भी यह महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, केरल और दिल्ली जैसे राज्यों से पीछे है। सकारात्मक पक्ष यह है कि कभी 3 से अधिक रहने वाली प्रजनन दर अब लगभग प्रतिस्थापन स्तर के करीब पहुंच चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य में परिवार नियोजन, महिला शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभाव बढ़ा है, हालांकि अगले चरण की चुनौती इसे 2.1 या उससे नीचे स्थिर बनाए रखना होगी।

स्वास्थ्य सेवाओं को समयबद्ध बनाने के निर्देश

गायत्री राठौड़ ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिए कि प्रत्येक नागरिक तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, समय पर टीकाकरण, परिवार कल्याण साधनों की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य संस्थानों में उपकरणों की समयबद्ध मरम्मत जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही मौसमी बीमारियों के प्रभावी प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया।

चित्तौड़गढ़ बना सर्वश्रेष्ठ जिला

संस्थागत पुरस्कार योजना के तहत परिवार कल्याण कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए:

  • चित्तौड़गढ़ – प्रथम पुरस्कार (18 लाख रुपये)
  • सीकर – द्वितीय (11 लाख रुपये)
  • कोटा – तृतीय (9 लाख रुपये)
  • करौली – चतुर्थ (5 लाख रुपये)

पूर्व में सम्मानित हो चुके बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, झालावाड़, बारां, अजमेर, ब्यावर और बूंदी जिलों को इस बार प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

पीपीआईयूसीडी सेवाओं में बांसवाड़ा अव्वल

  • बांसवाड़ा – प्रथम (4 लाख रुपये)
  • प्रतापगढ़ – द्वितीय (3 लाख रुपये)
  • नागौर – तृतीय (2 लाख रुपये)

पंचायतों और ग्राम पंचायतों को भी सम्मान

सर्वश्रेष्ठ पंचायत समिति

  • इटावा (कोटा) – प्रथम
  • बालोतरा – द्वितीय
  • फलौदी – तृतीय
  • धौलपुर – चतुर्थ

सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत

  • हरराजपुरा (ब्यावर) – प्रथम
  • खेड़की वीरभान (कोटपूतली-बहरोड़) – द्वितीय
  • ठीकरिया कलां (बूंदी) – तृतीय
  • भोजासर (हनुमानगढ़) – चतुर्थ

स्वास्थ्य संस्थान और स्वास्थ्यकर्मी भी सम्मानित

सर्वश्रेष्ठ राजकीय स्वास्थ्य संस्थान श्रेणी में पीएचसी गेंता (कोटा), सीएचसी नीमराणा (कोटपूतली-बहरोड़) और उप जिला चिकित्सालय रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) को सम्मानित किया गया। निजी संस्थान श्रेणी में राज अस्पताल, जोधपुर तथा गैर-सरकारी संगठन श्रेणी में अनशेड पैरामेडिकल फाउंडेशन, झालावाड़ और एफआरएचएस इंडिया, जयपुर को पुरस्कार मिला।

व्यक्तिगत श्रेणी में एलएचवी आशा वर्मा (भवानीमंडी), एएनएम मधु श्रीवास्तव (बीकानेर), सरिता कुमारी (जयपुर), आशा सहयोगिनी कौशल्या देवी, आशा शर्मा, संतोष देवी तथा सर्वाधिक नसबंदी ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक डॉ. साहब सिंह मीणा को सम्मानित किया गया।

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राजस्थान सरकार ने इस बार पुरस्कार वितरण को केवल सम्मान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक प्रदर्शन आधारित जवाबदेही मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। कुल प्रजनन दर 2.1 तक पहुंचना और आधुनिक गर्भनिरोधक उपयोग में राष्ट्रीय औसत से आगे निकलना दर्शाता है कि परिवार कल्याण कार्यक्रम अब केवल जनसंख्या नियंत्रण नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से भी जुड़ चुका है।

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