Google Trends: डीजल खरीद पर रोक से अस्पतालों उद्योगों में चिंता, 90 दिन की पाबंदी से बढ़ा संकट – Jansatta
Google Trends: पेट्रोल पंप से डीजल खरीद पर सरकार द्वारा लगाए गए नए अंकुश ने अस्पतालों, आईटी पार्कों, डेटा सेंटर्स और औद्योगिक इकाइयों में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। 11 जून को जारी आदेश के तहत औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंप से डीजल खरीद पर रोक लगा दी गई है, साथ ही प्रति ग्राहक या वाहन अधिकतम 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा तय की गई है।
इस फैसले का उद्देश्य ईंधन आपूर्ति को संरक्षित करना और खुदरा पंपों से डीजल के दुरुपयोग को रोकना बताया गया है। सरकारी आदेश के बाद अस्पतालों को सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र माना जा रहा है क्योंकि बड़े अस्पताल परिसरों में कई डीजल जनरेटर सेट निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए लगातार उपयोग होते हैं।
सर्जरी, आईसीयू और अन्य संवेदनशील प्रक्रियाओं के दौरान वोल्टेज उतार-चढ़ाव से बचने के लिए भी जनरेटर आवश्यक माने जाते हैं। डेटा सेंटर, आईटी पार्क और दूरसंचार सुविधाएं भी डीजल आधारित बैकअप सिस्टम पर निर्भर हैं ताकि सेवाएं बिना रुकावट जारी रह सकें।
उद्योग सूत्रों के अनुसार कई संस्थान पहले पेट्रोल पंप से नियमित डीजल भरवाते थे जिससे लागत नियंत्रण आसान रहता था। कुछ उद्योगों में पीक आवर के दौरान बिजली दरें इतनी अधिक हो जाती हैं कि डीजल जनरेटर से बिजली उत्पादन सस्ता पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध परिचालन लागत बढ़ा सकता है और संस्थानों की ऊर्जा रणनीति को प्रभावित करेगा।
सरकार का कहना है कि हाल के महीनों में पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है क्योंकि बड़े उपभोक्ता थोक आपूर्ति के बजाय खुदरा चैनल का उपयोग कर रहे थे। इससे कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी का जोखिम भी पैदा होने लगा था, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
Google Trends: भविष्य में सांस लेना हो सकता है और मुश्किल, जलवायु बदलाव से दुनिया भर में चेतावनी
इन अंकुशों की अवधि अधिकतम 90 दिन निर्धारित की गई है, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के बाद वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव आया और डीजल की कीमतों में असमानता बढ़ी है। दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर जबकि थोक दर 134.50 रुपये प्रति लीटर बताई गई है।
मई में बिक्री के आंकड़ों में भी वृद्धि दर्ज की गई, जहां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की संयुक्त पेट्रोल बिक्री में 4.8 प्रतिशत और डीजल बिक्री में 6.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। उद्योग प्रतिनिधियों ने अस्पतालों, दूरसंचार नेटवर्क और डेटा सेंटर जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए डीजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु छूट की मांग की है।
उनका कहना है कि इन महत्वपूर्ण ढांचों के बिना रुकावट संचालन के लिए ईंधन आपूर्ति पर स्पष्ट नीति और थोक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार खुदरा खरीद पर निर्भर संस्थानों को अब अपनी आपूर्ति श्रृंखला में तेजी से बदलाव करना होगा, जबकि थोक अनुबंध वाले संस्थान अपेक्षाकृत कम प्रभावित होंगे। अंततः यह नीति अधिकतम 90 दिनों के लिए लागू की गई है और इसके बाद समीक्षा की जाएगी। यह कदम आपूर्ति संतुलन और बाजार स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
दुनिया अब ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है जहां साफ हवा में सांस लेना भी एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम बन सकता है। ताजा अध्ययनों में यह चेतावनी सामने आई है कि आने वाले दशकों में वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां और समय से पहले मौतों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार वायु प्रदूषण को वैश्विक स्तर पर सबसे घातक पर्यावरणीय खतरा माना जाता है। यह फेफड़ों के कैंसर, अस्थमा, हृदय रोग, श्वसन संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।
