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हर मामले में हो गए है आश्रित – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar – nayaindia.com

सरकार के 12 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी देश तब तक विकसित नहीं हो सकता है, जब तक वह दूसरों पर आश्रित रहेगा। इसके बाद उन्होंने पिछली सरकारों को जम कर कोसा और कहा कि कांग्रेस ने भारत को आश्रित बनाए रखा। उनका दावा है कि वे भारत को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत की वास्तविकता कई तरह से पता चलती है। लेकिन हाल के दो आंकड़े हैं। दुनिया के हथियार उद्योग पर नजर रखने और उसके आंकड़े जारी करने वाली संस्था सिपरी ने बताया है कि युद्धग्रस्त यूक्रेन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक है। सिपरी ईयरबुक की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरी दुनिया के हथियार बिक्री का 8.2 फीसदी अकेले भारत खरीदता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश नहीं करता है। सोचें, चीन का रक्षा बजट भारत से कई गुना बड़ा है उसका वह 15 फीसदी आरएंडडी में निवेश करता है, जबकि भारत चार फीसदी आरएंडडी में खर्च करता है। इसलिए हथियार की जरुरत के लिए भारत दुनिया पर निर्भर है।
अभी 114 राफेल खरीदने का चार सौ अरब डॉलर का ऑर्डर भारत ने दिया है। दूसरा आंकड़ा चीन पर निर्भरता का। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा एक सौ अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। पहली बार ऐसा हुआ है कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। मोटे तौर पर कहें तो चीन को भारत 15 रुपए का सामान बेचता है और 85 रुपए का सामान उससे खरीदता है। यह भारत की आत्मनिर्भरता है!
मामला सिर्फ ऊर्जा या हथियार या चीन से खरीद का ही नहीं है। शिक्षा और स्वास्थ्य में भी समस्याएं बुनियादी हैं। शिक्षा की समस्या यह है कि देश में स्कूल कम हैं और गुणवत्ता वाले शिक्षकों की घनघोर कमी है। रिसर्च तो है ही नहीं। लेकिन समाधान मिड डे मील और एक देश, एक परीक्षा या ऑनस्क्रीन मार्किंग है। इसी तरह देश में अस्पताल, डॉक्टर और नर्स सबकी कमी है लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र में समाधान आयुष्मान भारत योजना है। पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज के लिए बीमा होता है और देश के हर हिस्से से खबर है कि अस्पताल और बीमा कंपनियों की मिलीभगत से पैसे की बंटरबांट हो रही है। लोग इलाज के बगैर मर रहे हैं। स्कूल, कॉलेज खोलने, रिसर्च सेंटर बनाने, अच्छे शिक्षक तैयार करने या अस्पताल व मेडिकल कॉलेज खोल कर सस्ती व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की बजाय सरकार दिखावटी उपायों में लगी है।
वास्तविकता यह है कि बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी इस रूप में दी गई हैं, जिनसे समस्या और बढ़ती गई है। भारत में स्वच्छ ऊर्जा की सिर्फ चर्चा हुई है और लगभग सारा देश कोयले से बनी बिजली पर चल रहा है। उससे इतना प्रदूषण और तापमान दोनों बढ़ रहा है। इस साल गर्मियां शुरू हुईं तो दुनिया के एक सौ सबसे ज्यादा गर्म शहरों में से 97 भारत के थे। प्रदूषित शहरों की श्रेणी में भी भारत के ही ज्यादातर शहर होते हैं। सिर्फ सड़क, बिजली और पानी की बात करें तो भारत ने ये बुनियादी जरुरतें पूरी कीं तो हालात यह बने कि सड़क पर आम लोगों का चलना मुश्किल है। महंगे परिवहन की वजह से सारी चीजें महंगी हुई हैं। बिजली न सिर्फ महंगी है, बल्कि अनुपलब्ध है और प्रदूषण फैलाने वाली है। पानी का हाल ऐसा है कि राजधानी दिल्ली में तक में आरओ से पानी को दो बार फिल्टर नहीं किया जाए तो पानी पीने लायक नहीं होता है। पानी में यूरेनियम और लोहे से लेकर दूसरी तमाम तरह की गंदगी है, जिससे लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति –
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IndiaPrime Hindi

Devender Singh is a senior journalist and media professional with over two decades of experience in television, digital, and Hindi-language journalism. He began his career with ETV Hindi in 2000 and has since served as Bureau Chief for several prominent news networks, including India News, Sahara Samay, and Bharat Express. Throughout his career, he has reported on several high-impact stories, including tribal starvation deaths, the Asaram case, the Jaipur serial bomb blasts, and numerous crime, political, and social issues that earned him recognition as a credible and influential journalist across India. Beyond television journalism, Devender Singh has contributed significantly to digital media transformation, Hindi journalism innovation, and AI-driven Hindi language initiatives. He has also served as a media and communication advisor to several prominent individuals, organizations, and institutions. Holding a postgraduate degree in Journalism along with a degree in Law, he continues to write and analyze issues related to governance, public policy, technology, politics, and social development, delivering insightful and fact-based content to readers.

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