भारत की 'तीसरी आंख' को 25 जून को मिलेगा फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस, बढ़ेगी वायु सेना ताकत – AajTak

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भारत की स्वदेशी हवाई निगरानी और टोही क्षमताओं के क्षेत्र में 25 जून को एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) आगामी 25 जून को बेंगलुरु स्थित ‘सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स’ में स्वदेशी हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली- ‘नेत्र’ (Netra AEW&C) के लिए ‘फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस’ की घोषणा करने के लिए पूरी तरह तैयार है. 
यह घोषणा भारतीय वायु सेना के लिए विकसित किए गए इस स्वदेशी रणनीतिक प्लेटफॉर्म के विकास, परीक्षण और परिचालन साइकिल की सफल समाप्ति का प्रतीक है. FOC मिलने का सीधा मतलब यह है कि यह सिस्टम अब युद्ध या किसी भी सैन्य संकट के दौरान पूर्ण पैमाने पर मोर्चे पर तैनात होने के लिए पूरी तरह तैयार और प्रमाणित हो चुका है. 
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DRDO Netra AEW&C
आसमान में भारत की ‘तीसरी आंख’ और इसकी मारक क्षमताएं
DRDO द्वारा विकसित ‘नेत्र’ सिस्टम को आसान भाषा में आसमान में उड़ता हुआ बेहद आधुनिक रडार और कमांड सेंटर कहा जा सकता है. यह अत्याधुनिक सर्विलांस सेंसर ब्राजीलियाई एम्ब्रेयर विमान पर फिट किए गए हैं. इस सिस्टम का मुख्य काम भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोनों, मिसाइलों और यहां तक कि समुद्री सतह पर मंडराने वाले खतरों की बहुत पहले ही टोह लेना और अर्ली वॉर्निंग जारी करना है.
‘नेत्र’ दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों और रडार एमिशन को पकड़ने में भी माहिर है, जिससे युद्ध के समय दुश्मन की स्थिति को सटीकता से ट्रैक किया जा सकता है. यह भारतीय लड़ाकू विमानों को हवा में ही निर्देश देने और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन्स को संभालने में ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के रूप में काम करता है.
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DRDO Netra AEW&C
तीन विमानों का सफल परीक्षण और वायुसेना की बढ़ी ताकत
इस महत्वकांक्षी स्वदेशी कार्यक्रम के तहत DRDO ने वायुसेना के लिए तीन एम्ब्रेयर विमान प्लेटफॉर्मों पर स्वदेशी मिशन एवियोनिक्स और निगरानी प्रणालियों को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट किया था. इससे पहले इन तीनों विमानों को ‘इनिशियल ऑपरेशनल क्लीयरेंस’ कॉन्फिगरेशन के तहत वायुसेना को सौंप दिया गया था, जहां वायुसेना के पायलटों और तकनीकी विशेषज्ञों ने वास्तविक परिचालन स्थितियों में इसके कड़े और व्यापक परीक्षण किए. 
वायुसेना की सक्रिय भागीदारी के साथ किए गए इन विकासात्मक और उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के सफल होने के बाद ही अब इसे फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस दिया जा रहा है, जो यह साबित करता है कि इस स्वदेशी प्रणाली ने वायुसेना की सभी कठोर परिचालन आवश्यकताओं को शत-प्रतिशत पूरा किया है.
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DRDO Netra AEW&C
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘नेत्र’ का रणनीतिक महत्व
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास कुल छह हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली का बेड़ा है. इनमें से तीन बड़े विमान रूसी आईएल-76 के एयरफ्रेम हैं, जिनमें इजरायल द्वारा निर्मित ‘फाल्कन’ सेंसर लगाए गए हैं. वहीं, बाकी के तीन विमान DRDO द्वारा निर्मित स्वदेशी ‘नेत्र’ सिस्टम हैं, जिन्हें अब FOC मिलने जा रहा है. 
इस कार्यक्रम से मिले मूल्यवान अनुभव और तकनीकी ज्ञान का उपयोग DRDO अब भविष्य के अन्य अत्याधुनिक और बड़े स्वदेशी एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल कार्यक्रमों को विकसित करने में करेगा, जिससे भारतीय सेनाओं की रणनीतिक ताकत और अधिक मजबूत होगी.
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