कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतने वाले वेटलिफ्टर राजा मुथुपांडी की कहानी संघर्ष भरी

इंडिया प्राइम स्पोट्स डेस्क । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पदक विजेता वेटलिफ्टर राजा मुथुपांडी . ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतने के दिन राजा मुथुपांडी ने पुरुषों के 65 किलोग्राम भारोत्तोलन (Weightlifting) वर्ग में बेहद धैर्यपूर्ण और दमदार प्रदर्शन किया। स्कॉटिश इवेंट कैंपस में प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने दबाव के क्षणों में अपनी मानसिक मजबूती का परिचय दिया और कुल 286 किलोग्राम का संयुक्त भार उठाकर पोडियम पर दूसरा स्थान पक्का किया।
ऐतिहासिक परफॉर्मेंस का राउंड-वार विवरण
- स्नैच राउंड (Snatch Round): राजा मुथुपांडी ने अपने अभियान की शुरुआत बेहद सतर्कता के साथ की, लेकिन उन्हें शुरुआती झटका लगा जब वह 126 किलोग्राम की अपनी पहली लिफ्ट में चूक गए। इसके बावजूद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए अपने दूसरे प्रयास में 126 किलोग्राम का वजन सफलतापूर्वक उठाया। तीसरे प्रयास में उन्होंने 129 किलोग्राम भार उठाने की कोशिश की लेकिन वह असफल रहे, जिससे स्नैच में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 126 किलोग्राम रहा।
- क्लीन एंड जर्क राउंड (Clean & Jerk Round): इसी तरह क्लीन एंड जर्क राउंड में भी वह 158 किलोग्राम के अपने पहले प्रयास को पूरा नहीं कर सके। अत्यधिक दबाव के बीच खुद को संभालते हुए उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 160 किलोग्राम का वजन पूरी ताकत से उठाकर जजों को प्रभावित किया। इस सफल प्रयास ने उनके कुल स्कोर को 286 किलोग्राम पर पहुंचा दिया। उन्होंने स्वर्ण पदक की होड़ में आने के लिए आखिरी प्रयास में 165 किलोग्राम का साहसिक फैसला लिया, लेकिन उसे क्लियर नहीं कर सके।
अंततः, उनके 286 किलोग्राम के कुल स्कोर ने पापुआ न्यू गिनी के मोरेया बारू (282 किग्रा) को पछाड़कर भारत की झोली में रजत पदक डाल दिया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक मलेशिया के मोहम्मद अजनिल बिदिन ने 299 किलोग्राम के नए राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड के साथ जीता। पदक जीतने के बाद मुथुपांडी ने स्वर्ण पदक चूकने पर थोड़ा मलाल तो जताया, लेकिन दबाव में उनकी इस शानदार रणनीति ने भारत के वेटलिफ्टिंग दल के लिए उस दिन को बेहद खास बना दिया।
वेटलिफ्टर राजा मुथुपांडी का जीवन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतने वाले भारतीय वेटलिफ्टर राजा मुथुपांडी का जीवन और उनका खेल सफर बेहद कड़े संघर्षों और अटूट दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक कहानी है। तमिलनाडु के एक बेहद साधारण और गरीब परिवार से आने वाले राजा मुथुपांडी को अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल के लिए जरूरी उचित पोषण (न्यूट्रिशन) और महंगे ट्रेनिंग उपकरणों को जुटाने के लिए शुरुआती दिनों में गंभीर आर्थिक तंगहाली से जूझना पड़ा था।
तमाम वित्तीय बाधाओं के बावजूद उनके परिवार ने उनके सपनों का पूरा साथ दिया, और आगे चलकर भारतीय सेना (Indian Army) में शामिल होने के बाद उनके खेल करियर को एक बेहद अनुशासित, पेशेवर और मजबूत माहौल मिला जिससे उनकी प्रतिभा और निखर कर सामने आई।
वैश्विक मंच पर इस बड़ी सफलता को हासिल करने की उनकी राह शारीरिक चुनौतियों और गंभीर चोटों से भरी रही है। कुछ साल पहले वह पीठ की एक गंभीर चोट (Back Injury) का शिकार हो गए थे, जिसने उनके खेल करियर पर लगभग पूर्णविराम लगा दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और महीनों के कड़े पुनर्वास (Rehabilitation) और डॉक्टरों की देखरेख में मेहनत कर खेल में पहले से भी अधिक मजबूत वापसी की।
बरसों तक देर रात तक पसीना बहाने, सख्त डाइट का पालन करने और गुमनामी में टनों वजन उठाने की उनकी तपस्या आखिरकार ग्लासगो 2026 के मंच पर रंग लाई, जहां उन्होंने कुल 286 किलोग्राम भार उठाकर देश को गौरवान्वित किया।






