अलीपुर हादसा: यमुना नदी में डूबे 4 स्कूली छात्र, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

updated | Monday, July 13, 2026 | 08:40 PM IST दिल्ली के अलीपुर में रविवार शाम से लापता 4 बच्चों में 2 के शवों की तलाश अभी भी यमुना नदी में जारी है। 14 से 15 साल की उम्र के चार नाबालिग दोस्त नहाते समय रविवार (12 जुलाई 2026) शाम को नदी के तेज बहाव में बह गए।राहत और बचाव कार्य (Rescue Operation) के दौरान इनमें से दो बच्चों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि अन्य दो की तलाश अभी भी जारी है।
इस बीच दिल्ली में मानसून के सीजन और पहाड़ी इलाकों से छोड़े गए पानी की वजह से यमुना का जलस्तर बहुत बढ़ा हुआ है. राहत कर्मियों को नदी के अत्यंत तेज बहाव (Strong Currents), भारी मात्रा में कीचड़ (Silt) और पानी के नीचे जमा मलबे की वजह से खोजबीन करने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नदी अपने सामान्य स्तर से ऊपर बह रही है, जिसकी वजह से किनारों पर पानी काफी गहरा हो चुका है। इसी तेज करंट (बहाव) और गहराई का अंदाजा न होने के कारण बच्चे पानी में उतरते ही अनियंत्रित होकर बह गए
मिली जानकारी के अनुसार जब यह हादसा हुआ, तब बच्चों की माताएं और पिता अपने-अपने काम (ड्यूटी) पर गए हुए थे।हादसे में लापता बच्चे अंशु के पिता, श्याम बिहारी शाह, दिल्ली में ही एक प्राइवेट नौकरी/मजदूरी करते हैं, जो हादसे की खबर मिलने के बाद से ही यमुना घाट पर पथराई आंखों से अपने बेटे का इंतजार कर रहे हैं। जबकि हादसे का शिकार हुए चारों बच्चे (अंशु, सौरभ, अमनदीप और राहुल) सामान्य मध्यमवर्गीय और कामकाजी परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। अन्य बच्चों के माता-पिता भी दैनिक मजदूरी, फैक्ट्री वर्कर या छोटे-मोटे प्राइवेट काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। लापता किशोर अंशु के पिता श्याम बिहारी शाह और अन्य परिजनों ने स्थानीय प्रशासन पर यह आरोप भी लगाया कि सोमवार सुबह रेस्क्यू टीमें घटनास्थल पर थोड़ी देरी से सक्रिय हुईं, हालांकि बाद में एनडीआरएफ के गोताखोरों ने नावों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर सर्चिंग शुरू कर दी थी
सोमवार देर शाम तक दोनों बच्चों के शवों का अंतिम संस्कार नहीं हुआ था और कागजी औपचारिकताएं चल रही थीं। नियमानुसार नदी या किसी हादसे से बरामद हुए शवों को तुरंत अंतिम संस्कार के लिए नहीं सौंपा जाता। उन्हें सबसे पहले नजदीकी सरकारी अस्पताल (बाबू जगजीवन राम मेमोरियल अस्पताल या राजा हरिश्चंद्र अस्पताल) के शवगृह (Mortuary) में पोस्टमार्टम (Post-Mortem) के लिए भेजा जाता है।
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इंडिया प्राइम स्टेट डेस्क अलीपुर हादसा: यमुना नदी में डूबे 4 स्कूली छात्र, दिल्ली के बाहरी उत्तरी जिले के अलीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हिरणकी गांव में रविवार शाम (12 जुलाई) को यमुना नदी में नहाने गए 4 नाबालिग बच्चे तेज बहाव में डूब गए, जिनमें से 2 बच्चों के शव बरामद कर लिए गए हैं और अन्य 2 की तलाश जारी है।
- राहुल (पुत्र सतीश, निवासी डीसीएम कॉलोनी)
- अंशु (पुत्र श्याम बिहारी शाह, निवासी डीसीएम कॉलोनी)
- सौरभ (पुत्र दीपक, निवासी बस स्टैंड के पास)
- अमनदीप (पुत्र महेंद्र सिंह, निवासी ई-ब्लॉक)
(हादसे में जीवित बचे पांचवें बच्चे का नाम लकी है, जिसने किनारे रहकर शोर मचाया था)।
हादसा कैसे हुआ?
- नहाने गए थे 5 दोस्त: इब्राहिमपुर इलाके के रहने वाले 14 से 15 साल के 5 स्कूली दोस्त रविवार शाम को हिरणकी गांव के पास यमुना नदी के ठोकर नंबर 24 पर खेलने और घूमने आए थे।
- रविवार (12 जुलाई, 2026) को पुलिस को इस हादसे की पीसीआर (PCR) कॉल शाम करीब 7:30 से 7:45 बजे के बीच मिली थी।
- मानसूनी बहाव का अंदाजा नहीं: कपड़े गंदे हो जाने के कारण उनमें से 4 दोस्त नदी में नहाने के लिए उतर गए, जबकि उनका 5वां दोस्त (लकी) नदी के किनारे ही बैठा रहा। मानसून के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ा हुआ था और बहाव बेहद तेज था। बच्चे मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाकर नहा रहे थे, लेकिन अचानक पैर फिसलने और पकड़ छूटने के कारण चारों गहरे पानी में समा गए।
- 5वें दोस्त ने मचाया शोर: किनारे बैठे दोस्त ने जब अपने साथियों को डूबते देखा, तो उसने शोर मचाकर स्थानीय लोगों को इसकी सूचना दी,
“हम पास के खेतों में काम कर रहे थे, तभी अचानक नदी किनारे से बच्चे (लकी) के चिल्लाने और रोने की आवाज आई। हम सब दौड़कर नदी की ‘ठोकर नंबर 24’ की तरफ भागे। वहां पहुंचकर देखा कि चारों बच्चे नदी के तेज बहाव में एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पानी का करंट इतना ज्यादा था कि पलक झपकते ही वे हमारी आंखों के सामने गहरे पानी में ओझल हो गए। हमने बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज धारा के आगे बेबस थे।”
“हमें रविवार शाम करीब 7:30 बजे पीसीआर कॉल के जरिए सूचना मिली थी कि हिरंकी गांव के पास पांच नाबालिग लड़के यमुना में नहाने आए थे, जिनमें से चार तेज बहाव में बह गए हैं। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एनडीआरएफ (NDRF), फायर ब्रिगेड और डीडीएमए (DDMA) की टीमों को बोट्स के साथ तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया। अंधेरा और खराब विजिबिलिटी के कारण रविवार रात को ऑपरेशन रोकना पड़ा था, जिसे सोमवार सुबह से दोबारा युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। शवों के बरामद होने के बाद कानून के मुताबिक आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
- सर्च ऑपरेशन: घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस (DFS), एनडीआरएफ (NDRF), डीडीएमए (DDMA) और स्थानीय पुलिस की टीमें मोटर बोट और गोताखोरों के साथ मौके पर पहुंचीं।
- 2 शव बरामद: कल देर रात तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 2 बच्चों के शवों को बाहर निकाल लिया गया है। रात के समय अंधेरा और कम दृश्यता (Poor Visibility) होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को रात 10:30 बजे रोकना पड़ा था।
- सर्च ऑपरेशन दोबारा शुरू: आज सोमवार (13 जुलाई, 2026) की सुबह से बाकी बचे दो बच्चों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया गया है।








