ओलंपिक विजेताओं की तरह अब BCCI क्रिकेटर्स को भी मिल सकती है सरकारी नौकरी, बिहार सरकार का बड़ा दांव – Jagran

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बिहार सरकार ने खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। …और पढ़ें
खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने की समीक्षा बैठक। (सोशल मीडिया)
डुमरी स्पोर्ट्स सिटी का 574 करोड़ से विकास।
बीसीसीआई क्रिकेटरों को भी सरकारी नौकरी का प्रस्ताव।
जिला खेल उत्कृष्टता केंद्र 2026 तक होंगे कार्यात्मक।
एजेंसी, पटना। बिहार में खेल और खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।
बिहार सरकार ने पटना जिले के पुनपुन प्रखंड में ‘डुमरी स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट’ (Dumri Sports City Project) के विकास में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
यह प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी लगभग 100 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी, जिसके लिए 574 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव पटना के जिलाधिकारी (DM) और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को भेजा जा चुका है।
खेल विभाग द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में ‘डुमरी स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट’, एथलीट विकास योजनाओं और बिहार में खेलों के विकास के लिए दीर्घकालिक रोडमैप की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान खेल मंत्री ने अधिकारियों को परियोजना में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि डुमरी स्पोर्ट्स सिटी बिहार के लिए एक मील का पत्थर (Landmark) साबित होगी।
इससे खेल के बुनियादी ढांचे, खेल-आधारित आर्थिक गतिविधियों, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाओं और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में भविष्य के विस्तार के बड़े अवसर पैदा होंगे।
बैठक में मौजूद विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण के लिए टेंडर जारी करने से पहले एक पेशेवर कंसल्टेंसी (Professional Consultancy) को काम पर रखा जाए, ताकि इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सके।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि परियोजना की मासिक समीक्षा की जाए और इसके दीर्घकालिक स्वरूप को देखते हुए निर्माण कार्यों को चरणों में प्राथमिकता दी जाए।
राज्य के विभिन्न जिलों में बन रहे ‘जिला खेल उत्कृष्टता केंद्रों’ की भी समीक्षा की गई। अरवल, मधेपुरा और किशनगंज के केंद्र 15 जून 2026 से शुरू होने जा रहे हैं।
इन केंद्रों में क्रमशः कबड्डी, बैडमिंटन और ताइक्वांडो के लिए आवासीय प्रशिक्षण (Residential Training) सुविधाएं दी जाएंगी। सीवान, मुंगेर और जमुई में फुटबॉल पर केंद्रित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित किए जाएंगे।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवींद्रन शंकरण ने बताया कि इन केंद्रों के लिए एथलीटों की पहचान और प्रशिक्षकों (Coaches) का चयन कर लिया गया है। बिहार के सभी जिला खेल उत्कृष्टता केंद्रों को 30 सितंबर 2026 तक पूरी तरह कार्यात्मक बना दिया जाएगा।
खेल मंत्री ने ग्रामीण स्तर पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पंचायत स्पोर्ट्स क्लबों को सक्रिय करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके लिए खेल विभाग और पंचायती राज विभाग को आपस में समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया है।
खिलाड़ियों के कल्याण के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना का दायरा बढ़ाने पर चर्चा हुई।
अब ओलंपिक पदक विजेताओं के साथ-साथ BCCI द्वारा भारतीय पुरुष और महिला सीनियर क्रिकेट टीमों में चुने जाने वाले बिहार के खिलाड़ियों को भी इस योजना का लाभ देने पर विचार किया जा रहा है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो पात्र एथलीट नीति के तहत लेवल-9 की सरकारी नौकरियों के हकदार होंगे।
बैठक में बिहार में होने वाले आगामी बड़े आयोजनों की भी रूपरेखा तय की गई।
बिहार के इस पूरे स्पोर्ट्स एक्शन प्लान को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के माध्यम से नीति आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। खेल मंत्री ने साफ किया कि बिहार एक ऐसा व्यापक खेल इकोसिस्टम बनाने की दिशा में काम कर रहा है जो खेल को स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रतिभा विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ेगा।
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