20 अगस्त 2026 ब्रेकिंग न्यूज़ live : देश-दुनिया के बड़े अपडेट्स और ताजा खबरें
इंडिया प्राइम टीवी ब्रेकिंग डेस्क: 20 अगस्त 2026 को देश और दुनिया की राजनीति, युद्ध, कूटनीति और ऊर्जा बाजार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण खबरें चर्चा में हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध और संसद के मानसून सत्र तक के सभी ताजा अपडेट्स नीचे देखें।
LIVE updates 09.15 AM IST गुरूवार 20 अगस्त 2026
केन्या में बड़ा हेलीकॉप्टर हादसा! हेलीकॉप्टर क्रैश में 7 लोगों की मौत हो गई। for video click photo

दुर्घटना में जान गंवाने वाले वीआईपी और पर्यटकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- होसे सुआरेज (José Suárez): अमेरिका के प्रसिद्ध मीडिया नेटवर्क ‘टेलीमुंडो’ (Telemundo/NBCUniversal) के कार्यकारी अधिकारी (Executive)।
- रोजर दुआर्टे (Roger Duarte): मियामी (फ्लोरिडा) के जाने-माने बिजनेसमैन और रेस्टोरेंट मालिक, जिन्हें पूर्व में फोर्ब्स ’30 अंडर 30′ में भी स्थान मिला था।
- मिशेल सेंसी-कॉन्टुगी (Michele Sensi-Contugi): इक्वाडोर (Ecuador) के राष्ट्रीय खुफिया केंद्र के निदेशक/प्रमुख।
- स्टेफनी हॉलीहान (Stephany Hollihan): मिशेल सेंसी-कॉन्टुगी की पत्नी (इनके पास अमेरिका और इक्वाडोर दोनों देशों की नागरिकता थी)।
- हेनरी पार और एडम लवते (Henry Par & Adam Lvatee): फ्लोरिडा का एक अन्य अमेरिकी जोड़ा, जो यात्रा के शौकीन थे।
- केन्याई पायलट: हेलीकॉप्टर का संचालन कर रहा स्थानीय पायलट।
यह सभी लोग लग्जरी टूर एजेंसी &Beyond के माध्यम से वाइल्डलाइफ सफारी टूर पर निकले थे। हेलीकॉप्टर लोइसाबा कंजर्वेंसी (Loisaba Conservancy) से उड़ान भरकर उत्तरी केन्या के साम्बुरु काउंटी में इवासो न्यीरो (Ewaso Nyiro) नदी क्षेत्र की ओर जा रहा था। यह क्षेत्र अपने आलीशान सफारी कैंपों, एडवेंचर और वन्यजीवों के लिए पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। माउंट ओलोलोक्वे की पहाड़ियों पर पर्यटक अक्सर सूर्योदय देखने और नाश्ता करने जाते हैं।
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गृहमंत्री शाह-सीएम विजय के बीच मुलाकात
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बीच चेन्नई में हुई मुलाकात का मुख्य आंतरिक कारण आगामी परिसीमन (Delimitation) पर दक्षिण भारतीय राज्यों में बढ़ती चिंताओं को दूर करना है, क्योंकि केंद्र आबादी के आधार पर सीटों के पुनर्गठन में 50% वृद्धि जैसे प्रस्तावों से गतिरोध तोड़ना चाहता है। साथ ही, यह बैठक कावेरी जल विवाद, मेकेदातु बांध परियोजना से जुड़े राजनीतिक दबाव और आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर नए राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिक विवरण के लिए, समाचार रिपोर्ट देखें।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज पर दुनिया की नजर
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। संघर्ष का एक महत्वपूर्ण केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जिसके जरिए दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री तेल व्यापार होता है।
20 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 91.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। अमेरिकी WTI क्रूड भी लगभग 85.81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। दोनों प्रमुख बेंचमार्क लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़े हैं।इस स्थिति का महत्व केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। होर्मुज के रास्ते तेल और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही प्रभावित होने पर एशिया, यूरोप और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। यदि लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो इसका असर आयात बिल, रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अगर समुद्री बीमा और shipping cost भी बढ़ती है तो केवल कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि उसे भारत तक पहुंचाने की कुल लागत भी बढ़ सकती है।यही कारण है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अब केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं रह गया है। इसका संबंध भारत की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ता की जेब से भी जुड़ गया है।
ईरान संकट का खाड़ी देशों पर भी असर
अमेरिका-ईरान तनाव का प्रभाव खाड़ी क्षेत्र के दूसरे देशों पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के दावे भी अलग-अलग हैं। अमेरिका की ओर से समुद्री मार्ग को खुला रखने की बात कही जा रही है, जबकि ईरान की गतिविधियों और सुरक्षा स्थिति के कारण कई shipping कंपनियां इस मार्ग से गुजरने में सावधानी बरत रही हैं।इसका अर्थ है कि कागज पर समुद्री मार्ग खुला होने के बावजूद वास्तविक व्यापारिक आवाजाही सामान्य स्तर पर लौटने में समय लग सकता है।
रूस में ईंधन संकट, भारत से पहुंची पेट्रोल की बड़ी खेप
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब रूस के घरेलू ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों और ईंधन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाए जाने के बाद रूस में पेट्रोल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। स्थिति इतनी गंभीर हुई कि रूस, जो लंबे समय से ऊर्जा निर्यातक देशों में प्रमुख रहा है, अब कुछ मात्रा में पेट्रोल का आयात कर रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार भारत से लगभग 68 हजार टन गैसोलीन की एक खेप रूस के Arctic port Vitino पहुंची है। रूस बेलारूस और कजाकिस्तान से भी ईंधन प्राप्त करने की व्यवस्था कर रहा है।रूस ने घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध और अन्य नियंत्रणात्मक उपाय भी अपनाए हैं।
भारत के लिए यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटनाक्रम भारत की refining capacity और वैश्विक ऊर्जा व्यापार में भारतीय कंपनियों की बढ़ती भूमिका को दिखाता है।भारत कच्चा तेल आयात करके उसे पेट्रोल, डीजल और अन्य petroleum products में refine करता है। इसलिए किसी क्षेत्र में refinery shutdown या supply disruption होने पर भारतीय refined products की मांग बढ़ सकती है।
लेकिन इसमें geopolitical जोखिम भी है। रूस और भारत के बीच ऊर्जा व्यापार पहले से ही पश्चिमी देशों की निगरानी में है। इसलिए भारत से रूस को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और प्रतिबंधों की बहस का विषय बन सकती है।
4. रूस-यूक्रेन युद्ध में 103-103 युद्धबंदियों की अदला-बदली
रूस और यूक्रेन ने 19 अगस्त को एक महत्वपूर्ण मानवीय कदम के तहत 103-103 युद्धबंदियों की अदला-बदली की। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापक शांति समझौते को लेकर अभी भी गंभीर मतभेद बने हुए हैं। इसके बावजूद युद्धबंदियों की अदला-बदली उन सीमित क्षेत्रों में से एक है जहां दोनों पक्ष किसी स्तर पर सहयोग कर पा रहे हैं।
यूक्रेन की ओर से बताया गया कि लौटाए गए लोगों में उसके सशस्त्र बलों, सीमा सुरक्षा बल और नेशनल गार्ड से जुड़े लोग शामिल हैं। एक और prisoner exchange महीने के अंत से पहले होने की संभावना भी जताई गई है।
क्या इससे युद्ध खत्म होने की संभावना बढ़ी है?
सिर्फ युद्धबंदियों की अदला-बदली को शांति समझौते का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। रूस और यूक्रेन के बीच क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी और भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था जैसे मूल मुद्दों पर अभी भी बड़ा अंतर है।
इसलिए फिलहाल इसे मानवीय और confidence-building कदम के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा, न कि युद्ध समाप्ति की शुरुआत के रूप में।
यूक्रेन में Zelenskyy के सहयोगी पर भ्रष्टाचार जांच के बीच कार्रवाई
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अपनी वरिष्ठ सहयोगी इरीना मुद्रा को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और कथित money-laundering जांच से जुड़े घटनाक्रम के बीच सामने आई है। युद्ध के दौरान यूक्रेन को पश्चिमी देशों से बड़े पैमाने पर आर्थिक और सैन्य सहायता मिल रही है। ऐसे में भ्रष्टाचार के आरोप वहां की सरकार के लिए केवल घरेलू राजनीतिक समस्या नहीं हैं।
पश्चिमी देशों की ओर से यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता के साथ transparency और institutional accountability लगातार महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। इसलिए सरकार के भीतर किसी वरिष्ठ अधिकारी पर जांच या कार्रवाई का असर यूक्रेन की घरेलू राजनीति के साथ-साथ उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ संबंधों पर भी पड़ सकता है।
भारत की राजनीति में राहुल गांधी का बयान चर्चा में
20 अगस्त को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से जुड़ी रिपोर्टों में राहुल गांधी के एक कथित बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक नेतृत्व के भविष्य और संभावित उत्तराधिकारी को लेकर टिप्पणी की। यह दावा सूत्रों के हवाले से सामने आया है, इसलिए इसे आधिकारिक कांग्रेस बयान के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
यदि कांग्रेस की ओर से इस बयान की औपचारिक पुष्टि होती है, तो यह 2029 के लोकसभा चुनाव से काफी पहले भाजपा के नेतृत्व और उत्तराधिकार की राजनीति को लेकर विपक्ष की रणनीति का संकेत माना जा सकता है।
इसका राजनीतिक महत्व क्या है?
भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री पद और किसी प्रमुख राजनीतिक दल के नेतृत्व को लेकर चर्चा अक्सर चुनावी रणनीति का हिस्सा बन जाती है। राहुल गांधी द्वारा कथित रूप से नेतृत्व परिवर्तन या उत्तराधिकारी की चर्चा करना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है क्योंकि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पिछले एक दशक से नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द काफी मजबूत रहा है। हालांकि, किसी नेता के कथित बयान को पार्टी की आधिकारिक रणनीति मानना तब तक उचित नहीं होगा जब तक कांग्रेस स्वयं इसकी पुष्टि न करे।
संसद का मानसून सत्र खत्म, सरकार-विपक्ष के बीच टकराव बरकरार
भारत में संसद का मानसून सत्र समाप्त हो चुका है। सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक बहस और टकराव देखने को मिला।सत्र में कई विधेयकों को पारित किया गया। इनमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा कानून भी शामिल रहा संसदीय कामकाज के दौरान कई मौकों पर विपक्षी दलों ने सरकार की नीतियों और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग की।
संसद के कामकाज का बड़ा सवाल
भारतीय लोकतंत्र में केवल कानून पारित होना ही महत्वपूर्ण नहीं है। विधेयकों पर पर्याप्त बहस, विपक्ष की भागीदारी और संसदीय समितियों की भूमिका भी कानून निर्माण की गुणवत्ता निर्धारित करती है।
इसलिए 2026 के मानसून सत्र का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितने विधेयक पारित हुए, बल्कि यह भी देखना होगा कि उनमें से कितने पर व्यापक संसदीय चर्चा हुई।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने का फैसला न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। कानून में बदलाव के बाद मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई है। इस कदम का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के दबाव को कम करने और न्यायिक कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में क्षमता बढ़ाना है।
क्या इससे तुरंत लंबित मामले कम होंगे?
जरूरी नहीं। सिर्फ न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। अदालतों में infrastructure, courtrooms, registry staff, research support और efficient case management भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यदि अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ प्रशासनिक क्षमता भी बढ़ाई जाती है, तभी इसका प्रभाव लंबित मामलों के निपटारे पर ज्यादा स्पष्ट दिखाई देगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध का अगला मोर्चा: ऊर्जा
रूस में पैदा हुआ पेट्रोल संकट युद्ध के एक नए आयाम को दिखाता है।
अब युद्ध केवल battlefield पर सैनिकों और हथियारों के बीच नहीं है। तेल रिफाइनरी, fuel depot, logistics network और energy infrastructure भी रणनीतिक लक्ष्य बन चुके हैं।
यदि यूक्रेन रूसी refining capacity पर दबाव बनाए रखता है और रूस जवाब में ऊर्जा infrastructure तथा परिवहन नेटवर्क पर कार्रवाई करता है, तो इसका प्रभाव वैश्विक energy market तक पहुंच सकता है।
भारत जैसे देश के लिए यह दोहरी स्थिति पैदा करता है। एक ओर भारतीय refineries को refined petroleum products के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं, दूसरी ओर पश्चिम एशिया और रूस दोनों में अस्थिरता के कारण global crude supply और shipping cost बढ़ सकती है।
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